06/04/2026
With Milan Mistry
२६/०३/२०२६.
फिर आज वह दिन आ गया जब सुबह से बैग खाली करना था। गलत मत समझो खाली करके मत खाली करना मतलब जितने भी गरम कपड़े लाए थे वह पहन लेने थे, क्योंकि आज तवांग पहुंचना है , रास्ते में सेला पास होते हुए एक दो और जगह भी कवर करनी है । प्रॉब्लम ये था कि बैग से वजन कम हो के सारा शरीर पे आ चुका है, आज से सभी मोटे दिखना शुरू😄
सभी को कल रात ही बता दिया था की आज से ठंड बढ़ जाएगी तो उस हिसाब से थर्मल, फ्लीस जैकेट सब पहन लेना। और रास्ते में बैसाखी पे सेला वॉरियर प्वाइंट आया जहां पे आर्मी स्टोर , कैंटीन और फोटो प्वाइंट बनाया है। वहां सब ने फोटोग्राफी और शॉपिंग कर के आगे बढ़े।
शॉपिंग के नाम पे हमको तो फ्रिज मैग्नेट चाहिए ,जो मिल गए थे।
और आ गई वो जगह जिस का सभी को बेसब्री से इंतजार था ।सेला पास जो १३७०० फिट की ऊंचाई पे आया हुआ दर्रा है जो तवांग को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। जहां स्नो दिखा नहीं लोग पागल हो गए। गाड़ी से नीचे उतर के सब ने खूब एंजॉय किया , खूब फोटोग्राफी की और आगे बढ़े । सेला लेक भी आधे से ज्यादा फ्रोजन था।
सभी लोग ठंड से जम गए थे तो गाड़ी में बैठते ही हीटर चालू करवाया। दो दिन पहले तक A.c की डिमांड ,आज हीटर. मैदानी इलाकों को छोड़ के अब हिमालय की बाहों में आ चुके थे। पता नहीं इसका क्या जादू है ,जब से देखे है इतना प्यार ही गया कि कभी मन नहीं भरता हमारा। उसकी हवाओं में एक नशा है और हमको ये नशा चढ़ गया है। थोड़े महीने होते है और ये बुलाता रहता है। मैदानी इलाकों में जीना मजबूरी है वरना वापिस जाने का मन ही नहीं करता हमारा।
आगे जसवंतगढ़ वॉर मेमोरियल पे रुकना है।जो १०००० फिट की ऊंचाई पे है। जिस के बारे में आप गूगल कर के पढ़ सकते हो। राइफलमैन जशवंतसिंह ने १९६२ के युद्धमें शून्य से भी नीचे तापमानमें अकेले ७२ घंटे तक चीनी सैनिकों का सामना किया था, उनको मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया था, उन की याद में ये स्मारक बनाया गया है। ४ गढ़वाल राइफल्स के जवान आज भी उनकी सेवा को जीवित मानते है। सब कुछ सुनते हुए रोंगटे खड़े हो जाते है और अपनी सेना के जवानों के प्रति नतमस्तक हो जाता है।
रुको अभी दिन पूरा कहां हुआ? थके तो नहीं हो ना? आगे एक वॉटरफॉल अभी भी बाकी है जिसका नाम जशवंत सिंह जी को युद्ध में मदद करने वाली स्थानीय लड़की नूरा के नाम से रखा गया है। नूरा नंग वॉटरफॉल, जिसको जंग वॉटरफॉल से भी जानते है, जो १०० मीटर की हाइट से गिरता है। वहां का प्राकृतिक सौंदर्य ऐसा है कि निकलने को मन ही नहीं करता पर तवांग भी तो पहुंचना है। ये वॉटरफॉल पे कोयला मूवी का माधुरी दीक्षित के गाने का शूटिंग भी हुआ है।
आज का एक और किस्सा कल सुनाती हूं।
जुड़े रहिए साथ साथ ।
Sh*tal Shah