Padharo Alwar

Padharo Alwar Padharo Alwar is an initiative by Alwar Tigers to promote tourism & guide tourists to visit beautiful places at Alwar.

राजस्थान के अलवर में हरी-भरी पहाड़ियों के बीच स्थित सिलीसेढ़ झील के शांत पानी के ठीक बीच में, सिलीसेढ़ लेक पैलेस अपनी मन...
11/09/2025

राजस्थान के अलवर में हरी-भरी पहाड़ियों के बीच स्थित सिलीसेढ़ झील के शांत पानी के ठीक बीच में, सिलीसेढ़ लेक पैलेस अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता और शानदार शाही वास्तुकला से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

#सिलीसेढ़_झील #अलवर

"अलवर शहर को 'राजस्थान का सिंह द्वार' भी कहा जाता है।"इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है। अलवर का बाला किला (Bala Quila) अपनी...
23/08/2025

"अलवर शहर को 'राजस्थान का सिंह द्वार' भी कहा जाता है।"

इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है। अलवर का बाला किला (Bala Quila) अपनी मजबूती और शानदार इतिहास के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि इस किले को मुगलों और मराठों के हमलों के बावजूद कभी पूरी तरह से नहीं जीता जा सका। यहां तक कि मुगल बादशाह अकबर ने अपने बेटे सलीम (जहाँगीर) को तीन साल के लिए इसी किले में नजरबंद रखा था। यह किला अरावली की पहाड़ियों पर इतनी ऊंचाई पर बना है कि इसे जीतना लगभग असंभव था, इसीलिए इसे 'सिंह द्वार' का नाम मिला।

नीलकंठ महादेव मंदिर, टहलाराजस्थान के अलवर जिले में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर एक प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है, जो अपनी अनू...
22/08/2025

नीलकंठ महादेव मंदिर, टहला
राजस्थान के अलवर जिले में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर एक प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है, जो अपनी अनूठी वास्तुकला, धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर अरावली पर्वतमाला की सुरम्य वादियों में, सरिस्का टाइगर रिज़र्व के घने जंगलों के भीतर स्थित है। विशेष रूप से मानसून के मौसम में, जब चारों ओर हरियाली खिल उठती है, इस स्थान की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है।

इतिहास और वास्तुकला
यह मंदिर 6वीं से 9वीं शताब्दी के बीच प्रतिहार राजवंश के शासकों द्वारा बनवाया गया था। मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं की सुंदर नक्काशी, कलात्मक मूर्तियां और कामुक मुद्रा में बनी आकृतियां इस काल की उत्कृष्ट शिल्पकला का प्रमाण हैं। हालाँकि, मंदिर का कुछ हिस्सा अब खंडहर में बदल चुका है, लेकिन इसकी भव्यता आज भी देखी जा सकती है।

धार्मिक महत्व
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसका नाम उनके 'नीलकंठ' स्वरूप से लिया गया है। इस मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि और सावन के महीने में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जो यहाँ आकर भगवान शिव की पूजा करते हैं।

कैसे पहुँचें?
सड़क मार्ग: यह मंदिर अलवर शहर से लगभग 70 किलोमीटर और दौसा शहर से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप निजी वाहन या टैक्सी से यहाँ आसानी से पहुँच सकते हैं।
निकटतम रेलवे स्टेशन: अलवर जंक्शन (लगभग 70 किमी) और दौसा रेलवे स्टेशन (लगभग 60 किमी) इसके सबसे नज़दीक हैं।
निकटतम हवाई अड्डा: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 120 किमी) यहाँ से सबसे पास है।

#पधारो_अलवर

04/07/2025

 #पधारो_अलवर  #अलवर
04/07/2025

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बारिश के बाद अलवर के जयसमंद बांध का नज़ारा...  #पधारो_अलवर
04/07/2025

बारिश के बाद अलवर के जयसमंद बांध का नज़ारा... #पधारो_अलवर

पांडुपोल, अलवर जिले में स्थित सारिस्का टाइगर रिजर्व का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। इस स्थान का महाभारत काल से गहरा संबंध...
09/12/2024

पांडुपोल, अलवर जिले में स्थित सारिस्का टाइगर रिजर्व का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। इस स्थान का महाभारत काल से गहरा संबंध है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, पांडवों ने अपने वनवास के दौरान यहां शरण ली थी। यहाँ भगवान हनुमान का एक प्राचीन मंदिर भी है।

पांडुपोल में एक सुंदर 35 फीट ऊँचा झरना भी है, जो चट्टानों से निकलता है। इसके अलावा, यहां लंगूर, मोर, और अन्य वन्य जीव भी देखे जा सकते हैं।

यदि आप प्रकृति प्रेमियों हैं और इतिहास में रुचि रखते हैं, तो पांडुपोल आपके लिए एक आदर्श स्थान है।

Garba Ji, Alwar
02/12/2024

Garba Ji, Alwar

सिलीसेढ़ लेक पैलेस, अलवर - राजस्थानSiliserh Lake Palace, Alwar Rajasthan
02/12/2024

सिलीसेढ़ लेक पैलेस, अलवर - राजस्थान
Siliserh Lake Palace, Alwar Rajasthan

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