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प्रकृति ने देवभूमि उत्तराखंड को अनगिनत प्राकृतिक सौगातों से नवाज़ा है। इन्हीं अनमोल धरोहरों में से एक है चमोली जिले में ...
01/06/2026

प्रकृति ने देवभूमि उत्तराखंड को अनगिनत प्राकृतिक सौगातों से नवाज़ा है। इन्हीं अनमोल धरोहरों में से एक है चमोली जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध फूलों की घाटी (Valley of Flowers), जो अपनी अद्भुत सुंदरता और जैव विविधता के लिए पूरे विश्व में जानी जाती है।

हर वर्ष 1 जून को पर्यटकों के लिए घाटी के द्वार खोल दिए जाते हैं और 31 अक्टूबर को शीतकाल के कारण इसे बंद कर दिया जाता है। इस दौरान देश-विदेश से हजारों पर्यटक यहां पहुंचकर रंग-बिरंगे फूलों से सजी प्रकृति की अनुपम छटा का आनंद लेते हैं।

लगभग 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली इस घाटी में 600 से अधिक प्रजातियों के फूल पाए जाते हैं। इनमें ब्रह्मकमल, ब्लू पॉपी, कोबरा लिली, प्रिमूला, पोटेंटिला, एनीमोनी, मैरीगोल्ड, डेज़ी, ऑर्किड और कई दुर्लभ हिमालयी पुष्प शामिल हैं।

फूलों की घाटी तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को ऋषिकेश – जोशीमठ – गोविंदघाट – पुलना – घांघरिया जैसे प्रमुख पड़ावों से होकर गुजरना पड़ता है। घांघरिया से लगभग 4 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद प्रकृति के इस स्वर्ग के दर्शन होते हैं।

भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ पल निकालकर यदि आप प्रकृति के बीच सुकून और शांति की तलाश में हैं, तो फूलों की घाटी आपका इंतजार कर रही है।

🌸 तो बताइए, आप कब बना रहे हैं फूलों की घाटी आने का मन?

चमोलीचमोली जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित भ्यूंडार घाटी में 15,225 फीट की ऊंचाई पर स्थित लोकपाल लक्ष्मण के कपाट ...
22/05/2026

चमोली
चमोली जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित भ्यूंडार घाटी में 15,225 फीट की ऊंचाई पर स्थित लोकपाल लक्ष्मण के कपाट आज विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुभ मुहूर्त में प्रातः 11 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए खोल दिए गए है। अब आगामी 4 माह तक श्रद्धालु यहां लक्ष्मण जी के दर्शन और पूजा अर्चना कर सकेंगे।

भ्यूंडार घाटी में दंडी पुष्कर्णी सरोवर के समीप स्थित यह पवित्र मंदिर सनातन आस्था के साथ ही प्राकृतिक सौंदर्य, अध्यात्म और हिमालयी संस्कृति का अद्भुत संगम है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्री राम के अनुज लक्ष्मण जी ने यहां त्रेतायुग में तपस्या की थी। जिसके चलते यह एकमात्र मंदिर है, जहां लक्ष्मण जी की पूजा अर्चना भगवान श्री राम और सीता माता के बिना की जाती है। कपाट खुलने के मौके पर यहां मंदिर समिति के सदस्य, स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे।




पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन पर उत्तराखंड में तीन दिन का राजकीय शोकदेहरादून। उत्तराखंड के पूर्...
19/05/2026

पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन पर उत्तराखंड में तीन दिन का राजकीय शोक

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के आकस्मिक निधन पर प्रदेश सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मंगलवार को आदेश जारी किए गए।

अपर सचिव महावीर सिंह चौहान द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 19 मई 2026 से 21 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में राजकीय शोक रहेगा। इस दौरान राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा तथा किसी भी प्रकार के शासकीय मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।

आदेश में यह भी कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री की अंत्येष्टि 20 मई 2026 को पुलिस सम्मान के साथ संपन्न कराई जाएगी। अंत्येष्टि के दिन राज्य सरकार के सभी कार्यालय बंद रहेंगे।

सरकार ने सभी विभागों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

Former Uttarakhand Chief Minister and Bharatiya Janata Party leader Bhuwan Chandra Khanduri passed away on Tuesday after...
19/05/2026

Former Uttarakhand Chief Minister and Bharatiya Janata Party leader Bhuwan Chandra Khanduri passed away on Tuesday after a prolonged illness in Dehradun. A retired Major General, Khanduri was undergoing treatment at a private hospital in Dehradun for a long time.


17/05/2026

उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा के बाएं तट पर भारत के चार धामों में से एक धाम बद्रीनाथ धाम मौजूद है. यहां से लगभग 100 मीटर की दूरी पर गर्म कुण्ड या तप्त कुंड के नीचे की ओर और अलकनंदा के ऊपरी छोर पर नारद कुंड (Narad Kund Uttarakhand) स्थित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवर्षि नारद ने 6000 वर्षों तक कठोर तप किया था. साथ ही भगवान विष्णु ने भी काफी लंबे समय तक यहां निवास किया था. इस कुंड का बद्रीनाथ धाम से भी गहरा नाता है. क्योंकि इसी कुंड से भगवान विष्णु की प्रतिमा को निकालकर आदि गुरु शंकराचार्य ने मंदिर में स्थापित किया था.




चमोली जिले में स्थित पंच केदारों में चतुर्थ केदार भगवान श्री रुद्रनाथ जी की चल विग्रह डोली आज अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ग...
17/05/2026

चमोली जिले में स्थित पंच केदारों में चतुर्थ केदार भगवान श्री रुद्रनाथ जी की चल विग्रह डोली आज अपने शीतकालीन गद्दी स्थल गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर से मध्य हिमालय स्थित रुद्रनाथ मंदिर के लिए विधिवत रवाना हो गई।

कपाट खुलने की प्रक्रिया के तहत गोपीनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना आयोजित की गई। पूजा के उपरांत भगवान रुद्रनाथ की देव डोली जयकारों, पुष्प वर्षा और सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच श्रद्धालुओं के साथ मंदिर के लिए प्रस्थान कर गई।

मंदिर के मुख्य पुजारी हरीश भट्ट ने बताया कि रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सोमवार 18 मई को मध्याह्न में परंपरानुसार एवं वैदिक विधि-विधान के साथ ग्रीष्मकाल के लिए खोले जाएंगे। कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु भगवान रुद्रनाथ के एकानन स्वरूप के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर सकेंगे।





16/05/2026

सोनिया मिश्रा की रिपोर्ट:
हिमालय की बर्फीली वादियों में बसे बद्रीनाथ धाम के पास एक रहस्यमयी जगह है — लीलाढुंगी। कहते हैं, यहां भगवान विष्णु ने ऐसी लीला रची थी, जिसने बद्रीनाथ और केदारनाथ दोनों धामों की कहानी बदल दी।

पुरानी मान्यता के अनुसार, कभी पूरा बद्री क्षेत्र भगवान शिव का निवास था। तभी भगवान विष्णु यहां आए। चारों ओर बर्फ से ढके पहाड़, अलकनंदा का कलकल बहता जल और तपस्या का शांत वातावरण देखकर उनका मन यहीं बस गया। लेकिन समस्या ये थी कि यहां कोई स्थान खाली नहीं था।

तब भगवान विष्णु ने एक अनोखी योजना बनाई।
वे बामणी गांव की एक पत्थर शिला पर एक छोटे से रोते हुए बालक का रूप धारण करके बैठ गए। उसी समय भगवान शिव और माता पार्वती तप्त कुंड स्नान के लिए निकल रहे थे।

जैसे ही माता पार्वती की नजर उस मासूम बच्चे पर पड़ी, उनका हृदय ममता से भर उठा। भगवान शिव ने संकेत दिया — “ये साधारण बालक नहीं है…” लेकिन मां का दिल नहीं माना। पार्वती जी उस बच्चे को अपने घर के अंदर ले गईं, उसे प्यार से सुलाया और फिर शिवजी के साथ स्नान के लिए चली गईं।

लेकिन जैसे ही दोनों बाहर गए, बालक रूपी भगवान विष्णु मुस्कुराए… और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

जब शिव-पार्वती वापस लौटे, लाख कोशिशों के बाद भी दरवाजा नहीं खुला। तभी उन्हें एहसास हुआ कि यह कोई साधारण बालक नहीं, स्वयं भगवान नारायण हैं, जिन्होंने अपनी लीला से बद्रीधाम को अपना निवास बना लिया।

इसके बाद भगवान शिव केदारनाथ की ओर चले गए और वहीं विराजमान हो गए, जबकि बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु का धाम कहलाया।





15/05/2026

देवभूमि में पांडवों के आने के साक्ष्य पंच केदारों में तो मिलते ही हैं लेकिन क्या आपको पता है? कि यहां भगवान विष्णु के चरणों के निशान भी दिखाई देते हैं जिसे देखने के लिए प्रतिवर्ष कई श्रद्धालु यहां ट्रेकिंग कर यहां पहुंचते हैं. देवभूमि उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम स्थित है, जो चार धामों में से एक है. बद्रीनाथ धाम से 3 किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर नीलकंठ पर्वत की तलहटी में बसे चरण पादुका (Charan paduka) तक पहुंचा जाता है. जहां भगवान विष्णु के चरणों के निशान एक शिला (पत्थर) पर दिखाई देते हैं. कहते हैं कि जब भगवान विष्णु तिब्बत की ओर से आ रहे थे तो यहां उनके चरण (पैर) पड़े थे. जिसे देखने के लिए श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.



#बद्रीनाथ

At least 38 pilgrims have died due to health-related reasons in the first 26 days of the ongoing Char Dham Yatra in Utta...
14/05/2026

At least 38 pilgrims have died due to health-related reasons in the first 26 days of the ongoing Char Dham Yatra in Uttarakhand, officials said on Thursday.

The pilgrimage commenced on April 19 with the opening of the Gangotri and Yamunotri shrines. The Kedarnath and Badrinath temples opened their gates for devotees on April 22 and 23, respectively.

Kedarnath recorded the highest fatalities with 21 deaths, a State Emergency Operation Centre (SEOC) report said. Badrinath reported seven deaths, while Gangotri and Yamunotri recorded five casualties each.

These deaths were caused due to various health reasons, including altitude-related illness and cardiac arrest, officials said.

Over 11.81 lakh pilgrims visited the shrines by Wednesday evening. Kedarnath recorded the highest footfall of 4.91 lakh devotees, while over 3.02 lakh visited Badrinath. Yamunotri and Gangotri recorded 1.94 lakh and 1.92 lakh visitors, respectively.

Registrations for the Char Dham and Hemkund Sahib Yatra have crossed the 33.96 lakh mark. Kedarnath saw the maximum 11.68 lakh registrations, followed by 10.19 lakh for Badrinath. Gangotri and Yamunotri saw 5.90 lakh and 5.69 lakh registrations, respectively. Hemkund Sahib recorded 0.48 lakh enrolments.

The state has recorded 89,727 registrations for May 14 and 91,267 for May 15.

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