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|| ऊँ श्री परमात्मने नमः ||--- :: x :: ---{गीता दर्पण}{श्रद्धेय स्वामी रामसुखदासजी महाराज}--- :: x :: ---“अठारहवाँ अध्या...
29/03/2026

|| ऊँ श्री परमात्मने नमः ||
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{गीता दर्पण}
{श्रद्धेय स्वामी रामसुखदासजी महाराज}
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“अठारहवाँ अध्याय का तात्पर्य”
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*मनुष्यमात्रके उद्धारके लिये उनकी रुचि,योग्यता और श्रद्धाके अनुसार तीन साधन बताये गये हैं---कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग {शरणागति} | इनमेंसे किसी भी एक साधनमें मनुष्य लग जाय तो उस का उद्धार हो जाता है |

* जो मनुष्य यज्ञ, तप और दान तथा नियत कर्तव्य-कर्मोंको आसक्ति और फलेच्छाका त्याग करके करता है एवं जो कुशल-अकुशल कर्मोंमें राग-द्वेष नहीं करता, वही वास्तवमें त्यागी है |

नियत कर्मोंको करते हुए भी उसको पाप नहीं लगता और उसको कहीं भी कर्म-फल प्राप्त नहीं होता | उसके सम्पूर्ण संशय-सन्देह मिट जाते हैं और वह अपने स्वरूपमें स्थित हो जाता है | यह कर्मयोग है |

* जो मनुष्य सात्त्विक ज्ञान, कर्म, बुद्धि, धृति और सुखको धारण करके कर्तृत्व-भोक्तृत्वसे रहित हो जाता है, वह अगर सम्पूर्ण प्राणियोंको मार दे, तो भी उसको पाप नहीं लगता |

अपने स्वरूपमें स्थित होनेपर उसको पराभक्तिकी प्राप्ति हो जाती है और उससे वह परमात्म-तत्त्वको यथार्थ जानकर उसमें प्रविष्ट हो जाता है | यह ज्ञानयोग है |

* मनुष्य भगवान् का आश्रय लेकर सम्पूर्ण कर्तव्य-कर्मोंको सदा साङ्गोपाङ्ग करता हुआ भी भगवत्कृपासे अविनाशी पदको प्राप्त हो जाता है |

जो मनुष्य भगवान्के परायण होकर सम्पूर्ण कर्मोंको भगवान् के अर्पण करता है, वह भगवत्कृपासे सम्पूर्ण विघ्न-बाधाओंसे तर जाता है |

जो अपनेसहित शरीर-मन-इन्द्रियोंको भगवान् में ही लगा देता है, वह भगवान्को ही प्राप्त होता है | जो सम्पूर्ण धर्मोंके आश्रयका त्याग करके अनन्यभावसे केवल भगवान्के शरण हो जाता है,उसको भगवान् सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त कर देते हैं | यह भक्तियोग है |

नारायण! नारायण! नारायण! नारायण!
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{गीता प्रेस गोरखपुरसे प्रकाशित पुस्तक ‘’गीता दर्पण” से}
Sabhar

28/03/2026

जरा रुकिए! यह साधारण दिखने वाली मूली आपके शरीर को अंदर से डिटॉक्स करने की ताकत रखती है। किडनी से लेकर स्किन तक, इसके फायदे आपको हैरान कर देंगे।

कुछ साल पहले मैंने अपनी एक रिश्तेदार लड़की के बारे में पोस्ट लिखा था। जिसकी दोनों किडनी फेल हो गई थी।लड़की मायके और ससुर...
22/03/2026

कुछ साल पहले मैंने अपनी एक रिश्तेदार लड़की के बारे में पोस्ट लिखा था। जिसकी दोनों किडनी फेल हो गई थी।लड़की मायके और ससुराल दोनों में ही सक्षम घरों से थी । ईश्वर ने सब कुछ दिया था अच्छा कद 5 फुट 8 इंच, सुंदर चेहरा, अरबपति ससुराल। लेकिन ईश्वर ने 26 साल की कम उम्र में कभी ना दूर होने वाली बीमारी दे दी ।अचानक एक रात उसको सांस नहीं आ रही थी। अपोलो में एडमिट कराया तब मालूम हुआ कि दोनों किडनी में काम करना बंद कर दिया है। लगभग 7 साल पहले तब से लगातार डायलिसिस चल रही थी। किडनी की वज़ह से दोनों फेफड़े खराब हो गए थे ,हार्ट खराब हो गया था।लंग्स की दो रोबोटिक सर्जरी मेदांता चंडीगढ़ में हुई थी और छोटी-मोटी तीन चार सर्जरी मैक्स दिल्ली में हुई थी। डायलिसिस तो हर हफ्ते में दो बार होती थी।
7 सालों से बहुत कष्ट में थी ।लंबे-लंबे बाल काट दिए गए थे, क्योंकि केयर होना मुश्किल था ।
रोबोटिक सर्जरी के दौरान पिछले साल तो वह 11 दिन वेंटिलेटर पर रहकर वापस रिकवर की थी।
लेकिन पिछले दिनों इतना कष्ट झेलने के बाद आखिर उसे कष्ट से मुक्ति मिल गई।
मैं इतना स्तब्ध थी कि कुछ लिख नहीं पाई अंदर से बहुत तकलीफ़ हो रही थी। जितनी बातें उसने मुझसे शेयर की थीं आज तक। शायद अपने मां-बाप पति से भी नहीं की होगीं। मेरी बेस्ट फ्रेंड थी ।हमारी घंटों बात होती थी।
लेकिन इस पूरे मामले में मुझे उसका ससुराल मिसाल लगा। ख़ासकर उसका पति ,जिसे आज के युग में किसी देवता से कम नहीं समझा जाना चाहिए।एक ऐसी लड़की जो शादी के एक डेढ़ साल बाद ही इतनी बीमार हो जाए कि उस पर हफ्ते का हज़ारों का खर्चा है और महीने का लाखों का खर्च आए ।
जिसका ना कोई बच्चा हो ,ना वो फिजिकल रिलेशनशिप रखने की स्थिति में हो । ऐसे में उसे लड़के ने अपना तन -मन -धन सब इस लड़की की सेवा में लुटा दिया ।अधिकारी बाप का इकलौता बेटा जिसके पास अरबों की प्रॉपर्टी हो खुद बहुत अच्छी जॉब में हो। अनगिनत रिश्ते तभी आने लगे जब वो बीमार हो गई। एक वक्त हुआ कि घर वालों ने बहुत दबाव बनाया कि वो शादी कर लें ।
लड़के से बिना पूछे रिश्ता तक पक्का कर लिया लेकिन वो लड़की नहीं देखने गया। लड़के ने कहा कि मैं अपनी किडनी दूंगा और शादी नहीं करूंगा ।(हालांकि मल्टीपल ऑर्गन फैल्योर की वज़ह से ट्रांसप्लांट संभव नहीं था।)
अब तक इलाज में लगभग 85- 90 लाख रुपए खर्च किए लेकिन कभी उफ्फ़ तक नहीं की।
हमारे समाज में तो ऐसी मिसालें हैं कि अगर पांच बच्चों की मां दो दिन बुखार में बिस्तर पर लेट जाए तो उठा कर उससे रोटी बनवाएंगे, ये नहीं सोचेंगे कि ये मर गई तो बच्चों का क्या होगा।
कोरोना के समय वो ऑक्सीजन मास्क लगाकर रोटी बनाते हुए औरतों के वीडियो देखे होंगे आपने।
रुपए के बात फिर भी छोड़िए सबसे ज़्यादा एक बात मुझे अभी भी दिमाग में घूम रही है जो उसने बताई थी कि भाभी हम अभी भी अपनी इस तीसरी मंजिल वाले कमरे में रहते हैं जिसमें शादी करके आए थे। क्योंकि हमको वही अच्छा लगता है। लेकिन क्योंकि सीढ़ी चढ़ने -उतरने के काबिल नहीं है इसलिए यही हमको गोदी में उठाकर ऊपर- नीचे ले जाते हैं।
मतलब क्या ही महानता रही होगी इस लड़के में।
यहां दूसरा होता तो वह सोचता कि इतना खर्च कर रहे हैं और महारानी के नखरे हैं कि इनको ऊपर- नीचे ले जाओ ,नीचे किसी कमरे में पटक देता कूड़े की तरह ।
जो कि ज़्यादातर घरों में होता (सभी के लिए बात नहीं है अपवाद होते हैं इन्हीं की तरह)
ऐसे ही बहुत सारी छोटी-मोटी बातें लगातार दिमाग में घूम रही हैं। बस यही सुकून है कि उसने पिछले जन्म के कोई पुण्य किया था जो ऐसा पति मिला।ईश्वर ने कुछ छीना था तो कुछ दिया भी ।इस छोटे से जीवन में उसने बहुत प्यार पाया इसी का संतोष है।

(पोस्ट टेंपरेरी है, हटा दूंगी। फीड में दिखाई देती है तो बहुत नकारात्मकता भर जाती है मन में। आज के जीवन में पैसा -रुपया, प्रॉपर्टी, नौकरी ,नाम पब्लिसिटी कुछ भी लग्ज़री नहीं है । लग्ज़री है कि आप अच्छी तरह से पूरा जीवन जीने को पा जाएं बस ।)
#अभिलाषा_सिंह

11 दुर्गा चालीसा का अद्भुत अनुभव (एक सच्ची घटना)यह घटना लगभग 2019 की है। उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर में एक व्यापारी रहत...
16/03/2026

11 दुर्गा चालीसा का अद्भुत अनुभव (एक सच्ची घटना)
यह घटना लगभग 2019 की है। उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर में एक व्यापारी रहता था। उसका छोटा-सा किराने का व्यापार था। शुरुआत में उसका काम बहुत अच्छा चलता था, लेकिन अचानक कुछ ऐसा हुआ कि उसका व्यापार गिरने लगा।
दुकान पर ग्राहक आना लगभग बंद हो गए।
जहाँ पहले रोज़ 8–10 हज़ार की बिक्री होती थी, वहाँ अब 1000 रुपये भी मुश्किल से आते थे। ऊपर से कर्ज बढ़ने लगा, घर में तनाव रहने लगा और रात को उसे अजीब-सी बेचैनी भी महसूस होने लगी।
कई लोगों ने अलग-अलग कारण बताए —
किसी ने कहा नजर लग गई है, किसी ने कहा ग्रह खराब चल रहे हैं।
एक दिन वह व्यक्ति अपने शहर के एक वृद्ध साधक के पास गया। साधक ने उसकी बात ध्यान से सुनी और बस एक ही उपाय बताया।
उन्होंने कहा —
“41 दिन तक रोज़ 11 दुर्गा चालीसा पढ़ो, बिना एक दिन छोड़े। बस इतना करो और माँ पर विश्वास रखो।”
व्यापारी को शुरुआत में विश्वास नहीं हुआ, लेकिन हालत इतनी खराब थी कि उसने यह साधना शुरू कर दी।
पहले दिन उसने रात को दुकान बंद करने के बाद दीपक जलाया और 11 बार दुर्गा चालीसा का पाठ किया।
पहले 5–6 दिन तक कोई खास फर्क नहीं दिखा।
लेकिन 7वें दिन रात को उसे एक अजीब अनुभव हुआ।
उसने देखा कि जैसे कोई तेज़ प्रकाश उसकी दुकान के सामने खड़ा है।
वह डर गया और तुरंत माँ दुर्गा का नाम लेने लगा।
अगली सुबह जब उसने दुकान खोली तो एक ऐसी घटना हुई जिससे वह खुद हैरान रह गया।
करीब दो महीने बाद पहली बार दुकान पर भीड़ लग गई।
पुराने ग्राहक वापस आने लगे और उसी दिन लगभग 15 हज़ार की बिक्री हुई।
लेकिन असली चमत्कार आगे हुआ।
लगभग 21वें दिन उसने सपना देखा कि एक तेजस्वी स्त्री लाल वस्त्रों में उसकी दुकान के दरवाज़े पर खड़ी हैं और कह रही हैं —
“डर मत, मैं आ गई हूँ।”
सुबह जब वह उठा तो उसका मन बिल्कुल शांत था।
धीरे-धीरे 41 दिन पूरे हुए और उसका व्यापार इतना बढ़ गया कि उसे दुकान बड़ी करनी पड़ी।
आज भी वह व्यक्ति एक बात जरूर कहता है —
“मैं नहीं जानता वह सपना क्या था, लेकिन जिस दिन से मैंने 11 दुर्गा चालीसा का नियम शुरू किया, उस दिन से मेरी किस्मत बदल गई।”
और आज भी वह रोज़ दुकान खोलने से पहले
एक दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा पढ़ता है।
कहते हैं —
भक्ति जब सच्ची होती है, तो माँ को आने में देर नहीं लगती।

इंजीनियर की अम्मा को भी इंजीनियरिंग सीखते देखकर मजा आया 😂🤣 भाई ने क्या मस्त इंजीनियरिंग सिखाई है  😂😂 इंजीनियर की अम्मा ज...
16/03/2026

इंजीनियर की अम्मा को भी इंजीनियरिंग सीखते देखकर मजा आया 😂🤣 भाई ने क्या मस्त इंजीनियरिंग सिखाई है 😂😂 इंजीनियर की अम्मा जैसों के लिए कुछ लाइन 👇
मर्दानगी का असली पैमाना बाज़ुओं का ज़ोर नहीं, बल्कि मन का 'संयम' है। एक पुरुष की असली परीक्षा तब नहीं होती जब सब कुछ उसके पक्ष में हो, बल्कि तब होती है जब उसके धैर्य की परीक्षा ली जा रही हो। वह शांत रहता है, सहता है, और मर्यादा की चौखट नहीं लांघता—लेकिन इस मौन को उसकी कमज़ोरी समझने की भूल भारी पड़ सकती है।
क्योंकि जब वार सीधा 'परिवार की अस्मिता' और अपनों के सम्मान पर होता है, तब वही संयम का बांध एक प्रलयकारी वेग के साथ टूटता है। यह तस्वीर और वीडियो साफ़ बयान करते हैं कि संस्कार और शास्त्र उसे झुकना सिखाते हैं, तो शस्त्र और शौर्य उसे स्वाभिमान की रक्षा करना। जो इंसान अपनों के लिए झुकना जानता है, वो वक्त आने पर दुनिया को झुकाने का माद्दा भी रखता है। अंततः, मर्द वही है जो शांति का रास्ता तब तक न छोड़े जब तक कि सम्मान की बलि न चढ़ने लगे; और जब बात घर की दहलीज तक आ जाए, तो वह काल बनने से भी पीछे न हटे👍

लव जिहाद के किस्से में एक बात हमेशा गौर नहीं की जाती।मोनालिसा की बात करे तो उसके बाप ने उसकी  असली मां से  डिवोर्स लिया ...
12/03/2026

लव जिहाद के किस्से में एक बात हमेशा गौर नहीं की जाती।
मोनालिसा की बात करे तो उसके बाप ने उसकी असली मां से डिवोर्स लिया था और उसके सर पर सौतेली मां लाया था। दूसरी शादी कोई जुर्म नहीं पर जो बच्चे आप के आधार पर जीवन में आए हक उसके साथ न्याय हो उसको देखना चाहिए।
ज्यादा तर घरों में लड़कियों के साथ भेदभाव होता है। ऐसा नहीं कि मुस्लिमों में ये नहीं होता।उस से ज्यादा होता है पर उनका एक सुरक्षा और आक्रमण का एक सिस्टम है।
वो लडकी जो बचपन से भेदभाव झेल के बड़ी हुई हे उस के मन में समाज से ओर परिवार के लिए द्वेष भर जाता है।उसे मौका मिलते ही बगावत करनी होती है। उसके पास ताकत आए ही बदला लेना होता है।
मोनालिसा के पिताजी ने ओर परिवार ने उसे बचपन में जब जरूरत थी तब मॉरल सपोर्ट नहीं दिया। उसकी किस्मत चमकी और वो वायरल हो गई फिर उनको याद आया कि कोई हमारी बेटी भी है।
जेहादी ओ का एक बड़ा रिसर्च सेंटर होता है जो लड़कियों पर नजर रखते है जो जिनका बचपन अच्छा न हो।ये सिर्फ गरीब घरों में नहीं अमीरों के घर भी होता है।
अमीरों के लड़की को फसाने के लिए उनके पास अलग जाल होता है। जिन लड़कियों की मां ही शाहरुख सलमान की फैन हो उनकी बच्ची तो लव जिहाद में फसेंगी ही।
हमने अपनी बेटियों पर ध्यान ही नहीं दिया।दुनिया कैसी है उसको चार साल से ही सिखाना होता है। मां खुद चार साल को बेटी को सोशियल मीडिया पर नचा रही है।बॉलीवुड के गाने पर जो बेटी नाचेगी उसका भविष्य बकरी जैसा होगा।
मोनालिसा को ट्रैप करने के लिए एक बड़ा प्लान बनाया गया था।।
मोनालिसा को लगता है उसने बगावत कर के अपने बुरे परिवार को सबक सिखा दिया है। पर खुद को जला कर उसने ये किया है।

भारत की जवान माताओं को ईश्वर सद बुद्धि दे जिनकी बेटियां दो चार साल की है।

हनुमान चालीसा का पाठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि विज्ञान और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी बेहद फायदेमंद माना ...
12/03/2026

हनुमान चालीसा का पाठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि विज्ञान और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी बेहद फायदेमंद माना जा रहा है। शोध के अनुसार, जब हम हनुमान चालीसा का नियमित पाठ या श्रवण करते हैं, तो इसमें मौजूद लयबद्ध छंद हमारे मस्तिष्क की तरंगों को 'बीटा' से 'अल्फा' स्तर पर ले आते हैं, जिससे मन में अद्भुत शांति और एकाग्रता का अनुभव होता है। एक अध्ययन में यह भी देखा गया है कि इसके नियमित श्रवण से रक्तचाप (blood pressure) और हृदय गति में सकारात्मक बदलाव आते हैं, जो हृदय संबंधी रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा, मंत्रों का ध्वनि कंपन शरीर में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन को कम करके सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे 'फील-गुड' हार्मोन को बढ़ाता है, जिससे तनाव, एंग्जायटी और नींद से जुड़ी समस्याओं में भी काफी राहत मिल सकती है। अध्यात्म और आधुनिक विज्ञान का यह मेल स्पष्ट करता है कि प्राचीन परंपराएं मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक प्रभावी माध्यम हैं।

यह कुंभ में वायरल लड़की मोनालिसा भोसले है यह अपने प्रेमी फरहान के साथ तिरुअनंतपुरम थाने में अपने पिता जय सिंह भोंसले के ...
11/03/2026

यह कुंभ में वायरल लड़की मोनालिसा भोसले है

यह अपने प्रेमी फरहान के साथ तिरुअनंतपुरम थाने में अपने पिता जय सिंह भोंसले के खिलाफ पुलिस प्रोटेक्शन मांगने गई है

इसका कहना है कि वह डेढ़ साल पहले फेसबुक के द्वारा फरहान से मिली थी और वह फरहान से शादी करना चाहती है लेकिन उसके पिता इस रिश्ते के खिलाफ है उसको उसके पिता से जान को खतरा है

इसीलिए उसे सुरक्षा दिया जाए

सोचिए इसके पिता ने इसको पाला पोस बड़ा किया हिंदुओं के पवित्र कुंभ मेले से यह पूरी दुनिया में चर्चित हुई इसके पास पैसे आए तो अब इसको वही बाप अपना दुश्मन लग रहा है जी आप ने इसे पाल पोषकर बड़ा किया

खैर मोनालिसा भोंसले को सूटकेस और फ्रिज की अग्रिम बधाई

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11/03/2026

Name art ❤️
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लोग अक्सर कहते हैं, "अगर तुम सूतक के नियम नहीं मानोगी, तो तुम्हारे जाने के बाद भी कोई ऐसा नहीं करेगा।" मैं मुस्कुराकर जव...
11/03/2026

लोग अक्सर कहते हैं, "अगर तुम सूतक के नियम नहीं मानोगी, तो तुम्हारे जाने के बाद भी कोई ऐसा नहीं करेगा।" मैं मुस्कुराकर जवाब देती हूं..यही तो मैं चाहती हूं।
मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से कोई 10-13 दिन तक हल्दी-तेल वाला स्वादिष्ट खाना छोड़े, सादा उबला भोजन खाकर तकलीफ उठाए। हल्दी तो शुभ है, विवाह-त्योहार में लगती है, लेकिन मृत्यु के बाद इसे छोड़ना शोक की पवित्रता बनाए रखने की परंपरा है। गरुड़ पुराण में भी सूतक काल में सात्विक, सादा भोजन की बात है मसाले, तेल, हल्दी से दूर रहकर आत्मा की शांति और परिवार का त्याग दिखाया जाता है। लेकिन क्या यह नियम मेरे लिए बोझ नहीं बनना चाहिए?
मैं चाहती हूं कि मेरे जाने के बाद लोग मेरी याद में खुशी से खाएं, हंसें, बातें करें। कोई मेरे नाम पर कोसे नहीं कि "उसकी वजह से हमने इतने दिन कड़वा-सादा खाना खाया।" मुझे भूल जाना ही सबसे बड़ा सम्मान होगानियमों में बंधकर तकलीफ नहीं, बल्कि जीवन जीते हुए आगे बढ़ना।
मेरी खुद की सोच यही कहती है मेरी मृत्यु किसी के लिए शोक का बोझ न बने, बल्कि एक स्वाभाविक विदाई हो। अगर कोई मेरी याद करे, तो मेरे अच्छे पलों से करे, न कि परंपराओं के दबाव से। यही मेरी अंतिम इच्छा है कोई तकलीफ न हो, बस मुक्ति और प्रेम रहे।
✍️

मित्रों …. आज जयपुर से दिल्ली लौटते हुए एक ऐसा दृश्य देखा जिसने भीतर तक हिला दिया …. राजस्थान की सीमा पार कर जैसे ही हरि...
11/03/2026

मित्रों …. आज जयपुर से दिल्ली लौटते हुए एक ऐसा दृश्य देखा जिसने भीतर तक हिला दिया …. राजस्थान की सीमा पार कर जैसे ही हरियाणा में घुसे और धारूहेड़ा के आसपास हाईवे पर नज़र गई …. तो लगा जैसे कोई युद्धभूमि हो …. पर यहाँ सैनिक नहीं खड़े थे …. यहाँ सर्विस लेन में कई किलोमीटर लंबी कतारों में खड़े थे हज़ारों डम्पर ट्रक …. जी हाँ …. सैंकड़ों नहीं …. हज़ारों !

हर एक ट्रक पत्थरों और गिट्टी से लबालब भरा हुआ …. ऐसे खड़े जैसे किसी गुप्त आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हों …. जैसे किसी “सिग्नल” के मिलते ही पूरा काफ़िला एनसीआर में घुस जाएगा …. और फिर रातों-रात शहरों की कंक्रीट में बदल जाएगा.

और सबसे दिलचस्प बात …. इन ट्रकों की नंबर प्लेटें ….

किसी पर कीचड़ पुती हुई ….
किसी पर ग्रीस लिपटी हुई ….
किसी की प्लेट ही आधी टूटी हुई ….

यानि पहचान मिटा दो …. और धंधा चलता रहे ….

अब सवाल उठता है ….

ये पत्थर कहाँ से आ रहे हैं ????
क्या हिमालय से तोड़ कर लाए जा रहे हैं ????
क्या शिवालिक की पहाड़ियों को चीर कर निकाले जा रहे हैं ????
या फिर हिन्द महासागर की गहराइयों से गोताखोर निकाल कर ला रहे हैं ????

नहीं मित्रों ….

ये पत्थर निकल रहे हैं उसी अरावली से ….

वही अरावली …. जिसे कुछ महीने पहले तक “माँ” कहा जा रहा था ….
वही अरावली …. जिसे बचाने के नाम पर सोशल मीडिया पर क्रांति की बाढ़ आ गई थी ….
वही अरावली …. जिसके लिए फेसबुक के रणबांकुरे भाला-त्रिशूल लेकर मरने-मारने को तैयार हो गए थे ….

याद है ना वो दिन ????

पोस्ट पर पोस्ट ….
वीडियो पर वीडियो ….
लाखों कमेंट ….

“अरावली हमारी माँ है”
“अरावली को छूने नहीं देंगे”
“प्रकृति बचाओ”

लेकिन मित्रों …. सच कहूँ तो वो सब भावनाएँ मूत्र की झाग जैसी निकलीं ….

ऊपर बहुत फूली हुई ….
लेकिन असल में बिल्कुल खोखली ….

क्योंकि धरातल पर क्या हुआ ????

कुछ भी नहीं ….

ना धरना ….
ना विरोध ….
ना आंदोलन ….

बस फेसबुक पर क्रांति …. और जमीन पर सन्नाटा ….

और अब नतीजा सामने है ….

अरावली को टुकड़ों में काटा जा रहा है ….
उसका सीना फाड़कर पत्थर निकाले जा रहे हैं ….
और उन्हीं टुकड़ों को ट्रकों में भरकर शहरों में भेजा जा रहा है ….

आपको याद होगा …. सरकार एक नियम लाने वाली थी ….

नियम यह था कि 100 फीट से ऊँची जमीन को पर्वत माना जाएगा …. और वहाँ खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा ….

लेकिन उस समय क्या हुआ ????

“तानाशाही” के नाम पर शोर मच गया ….
“लोकतंत्र खतरे में है” का ढोल बज गया ….
और नियम बनने से पहले ही उसे रोकने की मुहिम छेड़ दी गई ….

अब परिणाम देखिए ….

खनन माफिया ने रास्ता निकाल लिया ….

जहाँ जमीन 100 फीट से कम है …. वहाँ टेक्निकली पर्वत नहीं माना जाएगा ….
और वहाँ से पत्थर निकालना “कानूनी जुगाड़” बन जाएगा ….

यानि ….

अरावली भी कटेगी ….
और कागज़ पर सब कुछ नियम के भीतर भी रहेगा ….

तो हे अरावली के वीर बेटों ….

हे प्रकृति के स्वघोषित रक्षक ….
हे फेसबुक के सनातनी योद्धाओं ….

अब कहाँ हो ????

देखो ….

तुम्हारी अरावली माँ के शरीर के टुकड़े किए जा रहे हैं ….
उसकी हड्डियाँ ट्रकों में भरकर शहरों में भेजी जा रही हैं ….
और तुम अभी भी मोबाइल पर अंगूठा चला रहे हो ….

क्या अब भी नहीं जागोगे ????

क्या अब भी नहीं निकलोगे घर से ????

या फिर हमेशा की तरह ….
कुछ दिन और पोस्ट लिखकर ….
कुछ दिन और गालियाँ देकर ….

फिर चुप हो जाओगे ????

बोलो ….

अरावली बचानी है ….
या फिर अगली पीढ़ी को सिर्फ उसकी फोटो दिखानी है ????

बोलो भाई ….

कुछ तो बोलो ….

पारुल सहगल की आंखों देखी

Address

Kanpur
208004

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