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03/07/2026

On An Adventure Trip To Goa

Mathura Jn. To Madgaon Jn. By

H. Nizamuddin - Ernakulam SF Express
On This Mansoon

अमावस्या पर गंगा स्नान और गीता भवन - ऋषिकेश 2026 हम जानकी झूला पार करने के बाद गीता भवन के समीप पहुंचे और यहीं बने गंगा ...
25/06/2026

अमावस्या पर गंगा स्नान और गीता भवन - ऋषिकेश 2026

हम जानकी झूला पार करने के बाद गीता भवन के समीप पहुंचे और यहीं बने गंगा घाट पर हमने माँ गंगा को प्रणाम करके स्नान किया।

यहाँ गंगा जी के किनारे बैठकर और उनकी बहती धाराओं को देखकर, मन और आत्मा अपने आप ही शुद्ध होने लगते हैं, ह्रदय में आध्यात्मिक भाव जागृत होने लगता है और मन में ईश्वर के प्रति आस्था और भी दृढ़ हो जाती है, श्रद्धा का भाव उत्पन्न होने लगता है जिससे मन एकाग्रचित्त हो जाता है।

हम जिन समस्यायों को लेकर ऋषिकेश या हरिद्वार आते हैं तो वे समस्याएँ यहाँ आकर समाधान बन जाती हैं। एक शुद्ध शरीर और पवित्र आत्मा लेकर हम वापस यहाँ से घर लौटते हैं।

लेकिन आज हमें घर नहीं लौटना था, आज शाम को हम ऋषिकेश से श्री माता वैष्णोंदेवी कटरा के लिए यात्रा करेंगे जिसके लिए हमारा आरक्षण हेमकुंड एक्सप्रेस में है। यह ट्रेन शाम को पांच बजकर बीस मिनट पर ऋषिकेश से कटरा के लिए प्रस्थान करेगी, कटरा से हम पहले श्रीनगर कश्मीर जायेंगे और उसके बाद लौटकर श्री माता वैष्णोंदेवी के दर्शन करेंगे, तत्पश्चात हम अपने घर की ओर प्रस्थान करेंगे

विस्तृत यात्रा विवरण के लिए नीचे दिये लिंक पर क्लिक कीजिए।
https://upadhyaytrips.blogspot.com/2026/06/gita-bhawan-rishikesh-2026.html?m=1..

जब से सोशल मीडिया आया है, देश में हो रही सभी घटनाएं प्रत्येक भारतीय नागरिक को मिलती रहती हैं, देश में और देश अन्य राज्यो...
24/06/2026

जब से सोशल मीडिया आया है, देश में हो रही सभी घटनाएं प्रत्येक भारतीय नागरिक को मिलती रहती हैं, देश में और देश अन्य राज्यों मे क्या स्थिति है, क्या घटित हो रहा है, क्या बढ़ रहा है सबकुछ, किन्तु हम अपने व्यस्त जीवन में सबकुछ देख और सुनकर ही रह जाते हैं।

किन्तु इस बार पिछले कुछ दिनों में मुझे ऐसी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली जिससे मेरा मन बहुत ही आहत हो गया था। यह जानकारी थी देश के एक युवा है की, जिसने समाज के कल्याण के लिए अपनी आवाज उठाई और प्रशासन ने उसके बदले उससे उसका जीवन ही छीन लिया।

मैने जब यह खबर सुनी तो मेरा मन व्यथित हो उठा, मैने तुरंत इस विषय पर अपने पढ़े लिखे मित्रों से चर्चा की परन्तु कोई संतोष जनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ, मैं जब तक और जानकारी करता, तब तक मुझे ज्ञात हो चुका था कि अब यह खबर सिर्फ एक खबर नहीं रही थी बल्कि क्रांति बन चुकी थी। समूचा देश में इस हत्या के विरोध में प्रदर्शन होने शुरू हों चुके हैं।

और होंगे भी क्यों ना, क्योंकि आज भी भारतीय जनता, प्रशासन और कानून पर विश्वास रखती है और जब वही कानून किसी को आत्मसमर्पण के बाद भी एनकाउंटर कर दे तो यह एक अपराध बन जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए था। हम शहीद हुए भरत भूषण तिवारी जी को विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए नमन करते हैं और उनके लिए उचित न्याय होने की मांग करते हैं।
जय हिंद ,जय भारत

शहीदी दिवस २३ मार्चएक साल बाद चलने वाली ट्रेन को देखकर बड़े बूढ़ों और बच्चों में एक अलग ही उत्साह था, जंग लगी पटरी पर ट्रै...
23/03/2025

शहीदी दिवस २३ मार्च

एक साल बाद चलने वाली ट्रेन को देखकर बड़े बूढ़ों और बच्चों में एक अलग ही उत्साह था, जंग लगी पटरी पर ट्रैन चल रही थी। काफी घास फूस भी पटरियों पर उगी हुई थी इसे रोंदती हुई ट्रेन हुसैनी वाला की तरफ चलती जा रही थी।

रास्ते में एक स्थान पर ट्रेन रुकी, हालाँकि आज शहीदी दिवस था इसलिए यहाँ शरबत वितरण हो रहा था। इसके बाद हुसैनीवाला पहुँच गए। सतलज नदी के किनारे एक छोटा सा टिकटघर बना था, यही हुसैनी वाला का स्टेशन है, यहाँ कोई प्लेटफॉर्म नहीं है।

यहाँ आकर ही मैंने जाना कि मैं पाकिस्तान के बॉर्डर पर आ चुका हूँ। अंग्रेजों के समय में जब पाकिस्तान नहीं बना था उस समय रेलवे लाइन फ़िरोज़पुर से लाहौर होते हुए पेशावर तक जाती थी, इसी रूट पर पंजाब मेल मुंबई से पेशावर के बीच चलती थी और सिर्फ पंजाब मेल ही नहीं, फ्रंटियर मेल भी जिसे अब स्वर्ण मंदिर मेल कहते है अमृतसर होते हुए लाहौर के रास्ते पेशावर जाती थी।

इसके अलावा ग्रैंड ट्रक एक्सप्रेस जो जी टी एक्सप्रेस भी कहलाती है मद्रास से चलकर फ़िरोज़पुर होते हुए पेशावर तक जाती थी। उस समय यह एक मीटर गेज की लाइन थी।

हुसैनीवाला उस समय काफी बड़ा स्टेशन था, सतलज के दोनों छोरों पर केसर 'ए' हिन्द नामक एक विशाल पुल के अवशेष अब भी यहाँ देखे जा सकते हैं और नदी के बीच में खड़े वो पिलर आज भी हमें उस ज़माने की याद दिलाते है जब यहाँ से ट्रेन सीधे लाहौर और पेशावर तक जाती थी।

आजादी के बाद हुसैनीवाला और केसर ए हिन्द रेलवे पुल पाकिस्तान की सीमा में चला गया और पाकिस्तान ने बिना देर किये इस ब्रिज को तोड़ दिया। हमारे तीनों महान क्रांतिकारियों समाधि स्थल भी पाकिस्तान की सीमा में चला गया जो हिंदुस्तानी लोगों को नागवार लगा इसलिए हिंदुस्तानी लोगों की श्रद्धा को देखते हुए प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी के आग्रह पर पाकिस्तान से यह जगह हिंदुस्तान में आई और इससे दुगनी जगह भारत को पाकिस्तान को देनी पड़ी, इसके पीछे मुख्य कारण था सतलज के पार स्थित भगत सिंह जी की समाधी।

जब लाहौर जेल में बंद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव् को फांसी की सजा सुनाई गई तो 24 मार्च की तारीख निश्चित की गई। किन्तु हिन्दुस्तानियों के बढ़ते क्रोध और उपद्रव को देखकर अंग्रेज डर गए और उन्होंने इन तीनों महान क्रांतिकारियों को सजा की तारीख के एक दिन पहले यानि 23 मार्च शाम को सवा सात बजे ही फांसी दे दी और लाहौर जेल की पिछली दीवार को तोड़कर रात के अँधेरे में तीनो के शवों को यहाँ सतलज के पास रेल लाइन के किनारे लाकर जला दिया।

जब गांव वालों ने आधी रात को जंगल में आग लगती देखी तो उन्हें कुछ संदेह हुआ, ग्रामीणों को आते देख अंग्रेज अधजली लाशो को छोड़कर भाग खड़े हुए। ग्रामीणों ने जब इनकी पहचान की तो विधिवत रूप से उनका अंतिम संस्कार किया, और आज उसी स्थान पर उन महान क्रांतिकारियों की समाधियाँ बनी हुईं हैं। पंजाब का वो वीर पुत्तर तो हमेशा के लिए सो गया परन्तु अपने पीछे छोड़ गया भारतीयों के दिलों में बलिदान की वो गाथा जिसे हिंदुस्तान कभी नहीं भुला पायेगा।

आज के दिन यहाँ काफी बड़े बड़े लोग भी देखने को मिल जाते हैं मुझे भी मिले, पंजाब के आदरणीय मुख्यमंत्री जी प्रकाश सिंह बादल। काफी बड़ा काफिला था, आते ही तीनो क्रांतिकारियों की अमर ज्योति पर श्रद्धांजलि दी और उसके बाद मूर्तियों पर माल्यार्पण कर पास में लगे विशाल मंच पर भाषण दिया।

मैं भी कुछ समय के लिए उनका भाषण सुनने लगा परन्तु जब कुछ समझ में नहीं आया तो उठ कर चल दिया , पंजाबी भाषा थी तो कुछ समझ में नहीं आया। वापस स्टेशन पर आकर देखा तो ट्रेन में आने में अभी काफी वक़्त था तो केसर ए हिन्द पुल के पूर्वी सिरे को देखने को चला गया। इसे ईस्टर्न पीयर्स भी कहते हैं। यहाँ किसी ज़माने में पुराना हुसैनीवाला स्टेशन हुआ करता था।
विस्तृत विवरण 👇
https://upadhyaytrips.blogspot.com/2018/03/husainiwala-border.html?m=1

आजकल औरंगजेब और उसकी कब्र को लेकर काफी विवाद है, हम सालों पहले अपनी एलोरा यात्रा के दौरान औरंगजेब की कब्र को देखा था। चू...
22/03/2025

आजकल औरंगजेब और उसकी कब्र को लेकर काफी विवाद है, हम सालों पहले अपनी एलोरा यात्रा के दौरान औरंगजेब की कब्र को देखा था।

चूंकि हमारी ज्यादातर यात्राएं ऐतिहासिक पटल पर निर्भर होती हैं, इसलिए हमने उस स्थान का भ्रमण भी किया जहां मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र स्थित है ।

यह स्थान खुल्दाबाद है जो औरंगाबाद से एलोरा गुफाओं के मध्य रास्ते में पड़ता है।

विस्तृत यात्रा विवरण के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक कीजिए।
https://upadhyaytrips.blogspot.com/2020/04/aurangzeb-tomb.html?m=1

गिरनार पर्वत -- 5 Mar 2023गिरनार पर्वत एक प्राचीन पर्वत है, प्राचीनकाल में यह रैवतक पर्वत कहलाता था और इसके आसपास का भू ...
06/11/2024

गिरनार पर्वत -- 5 Mar 2023
गिरनार पर्वत एक प्राचीन पर्वत है, प्राचीनकाल में यह रैवतक पर्वत कहलाता था और इसके आसपास का भू भाग रैवत प्रदेश कहलाता था जो वर्तमान में सौराष्ट्र प्रान्त है।

पौराणिक काल के हिसाब से सतयुग में यहाँ महाराज रैवत का राज्य था, उनकी पुत्री रेवती थीं जो द्वापर युग में भगवान् श्री कृष्ण के बड़े भ्राता बलराम जी की पत्नी बनी। इसप्रकार भगवान् श्रीकृष्ण और बलराम ने इस प्रदेश को अपने निवास स्थान के रूप में चुना, यहीं समुद्र से थोड़ी से जगह मांगकर द्वारिका नगरी का निर्माण किया। मगध सम्राट जरासंध ने गिरनार पर्वत तक श्री कृष्ण और बलराम का पीछा किया और जब वह गिरनार पर्वत पर आकर, जरासंध की नजरों से ओझल हो गए तो उसने इस पर्वत पर आग लगा दी।

जरासंध यह सोचकर यहाँ से वापस लौट गया कि दोनों भाई इस पर्वत की आग में जलकर भस्म हो गए। किन्तु भगवान् श्री कृष्ण और बलराम यहाँ से बच निकलकर सीधे द्वारिका द्वीप पहुंचे और वहां देवशिल्पी विश्वकर्मा का आहवान कर एक नई नगरी का निर्माण कराया। यही नगरी द्वारिका नगरी के नाम से आज प्रसिद्ध है।

प्राचीन काल से ही गिरनार पर्वत का विशेष धार्मिक महत्त्व रहा है। अनेकों ऋषि मुनियों ने यहाँ साधना में लीं होकर घोर तप किया है और अनेकों सिद्धियों को प्राप्त किया है। यह पर्वत ना सिर्फ वैदिक धर्म के लिए अपितु जैन धर्म के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जैन धर्म के बाईसवें तीर्थकर श्री नेमिनाथ जी का मोक्ष स्थल भी है। भगवान नेमिनाथ को अरिष्टनेमि के नाम से भी जाना जाता है, जो भगवान श्री कृष्ण के चचेरे भाई थे।

गिरनार पर्वत की कथाएं ना केवल वर्तमान या प्राचीन हैं बल्कि यह पौराणिक काल से भी जुड़ी हुईं हैं। जैसा कि मैंने पहले ही सूचित किया है कि गिरनार को पौराणिक काल में रैवतक पर्वत और प्राचीन काल में उर्ज्जयंत पर्वत कहा जाता था। भगवन श्री कृष्ण, उनके भाई बलराम और उनके चचेरे भाई अरिष्टनेमि के अलावा बलराम जी की बहिन सुभद्रा की कथा से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है गिरनार पर्वत से ही अर्जुन ने सुभद्रा का हरण किया था जो कालांतर में वीर अभिमन्यु की माँ थी।

मैं रोपवे के जरिये गिरनार पर्वत की यात्रा पर रवाना हो गया था। आज तक मैंने अनेकों रोपवे में बैठकर यात्राएँ की थीं , किन्तु आज जैसा डर मुझे कभी किसी रोपवे में नहीं लगा था जितना आज गिरनार की तरफ बढ़ते हुए इस रोपवे में लग रहा था। यह सचमुच बहुत ऊँचा था, और साथ ही इसमें ऊपर की खिड़की खुल गई जिसकारण इसमें हवा भी पास हो रही थी, जिसकी बहुत तेज आवाज मुझे ना चाहते हुए भी डरने पर विवश कर रही थी।

एक तो यह हवा की वजह से पहले से ही काफी इधर उधर हिल रहा था, उसके अलावा इसमें मेरे साथ बैठे अन्य सहयात्री भी सेल्फियां खींचने के चक्कर में असंतुलित हो रहे थे, जिससे सिर्फ यही आभास हो रहा था कि यह किसी कारण से नीचे गिरा तो हमारा नामोनिशान नहीं मिलेगा, परन्तु ईश्वर की शक्ति के आगे सभी डर दूर हो जाते हैं।

मेरे साथ के सहयात्री भी इसके जोर जोर से हिलने की वजह से चीखने चिल्लाने लगे थे, कुछ ने तो हनुमान चालीसा का पाठ तक शुरू कर दिया था और अन्ततः हम पर्वत पर पहुंचे और रोपवे से उतरकर हमने राहत की सांस ली। रोपवे का किराया एक तरफ से चारसौ रूपये था और दोनों तरफ से छः सौ रूपये। मैंने रोपवे का इस्तेमाल सिर्फ पर्वत तक आने के लिए ही किया था और इस यात्रा में यही मेरी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।

पर्वत पर पहुंचकर सबसे पहले माता अम्बा जी का मंदिर पड़ता है। माना जाता है यह एक प्राचीन मंदिर है, वैसे गुजरात में अनेकों अम्बा जी के नाम से मंदिर हैं किन्तु मुख्य मंदिर गुजरात राजस्तान की सीमा पर अम्बा जी के नाम से ही प्रसिद्ध है। मैं कभी वहां नहीं गया हूँ किन्तु एकबार अवश्य जाऊंगा, कब जाऊंगा ये अभी पता नहीं है।

मंदिर के बाहर माता जी के अनेकों भक्त खड़े थे, सभी लगभग गुजराती ही थे, पर्वत के ऊपर ठंडी ठंडी हवा लग रही थी, बहुत ही रमणीक और मनोरम स्थान है। यहीं पास में ही माता जी का प्रसाद वितरण चल रहा था, मैंने भी प्रसादी पाई और सुबह के नाश्ते का काम हो गया।

अम्बा माता के दर्शन करने के पश्चात मैं गिरनार पर्वत पर आगे बढ़ चला। अब एक सीढ़ीदार नुमा रास्ता पर्वत की धार पर होकर बना है, यह देखने में बिलकुल चीन की महान दीवार जैसा प्रतीत होता है। गिरनार पर्वत के मुख्य तीन शिखर हैं और तीनों शिखरों पर अलग अलग मंदिर बने हुए हैं। पहले शिखर पर माता अम्बा जी का मंदिर है। उसके बाद दूसरे शिखर पर गुरु गोरखनाथ जी के पदचिन्ह हैं और तीसरे शिखर पर गुरु दत्तात्रेय जी का मंदिर है। गिरनार की परिक्रमा इन तीनों मंदिरों या तीनों शिखरों की यात्रा करके ही पूर्ण होती है।

मैं दो शिखरों की यात्रा करके वापस लौट लिया क्यों कि तीसरे शिखर के लिए पहाड़ उतरना और फिर पुनः चढ़ना अब मेरे वश की बात नहीं थी। इस चीन के जैसी दीवार पर कुछ समय बिताने के बाद मैंने पैदल पर्वत से नीचे उतरना शुरू कर दिया। नीचे की तरफ एक विशाल मंदिरों की श्रृंखला दिखाई दे रही थी। यह जैन धर्म के मंदिर हैं।

विस्तृत यात्रा वर्णन के लिए कृपया नीचे दिए लिंक पर क्लिक कीजिए।
https://upadhyaytrips.blogspot.com/2024/10/girnar-hill-junagarh.html?m=1

कीर्ति मंदिर, बरसाना।श्री राधारानी की माता और महाराज वृषभान जी की पत्नी महारानी कीर्ति को समर्पित कीर्ति मंदिर का निर्मा...
24/08/2024

कीर्ति मंदिर, बरसाना।

श्री राधारानी की माता और महाराज वृषभान जी की पत्नी महारानी कीर्ति को समर्पित कीर्ति मंदिर का निर्माण जगद्गुरु कृपालु महाराज के सानिध्य में जगद्गुरु कृपालु परिषद द्वारा किया गया। सन 2006 में जगद्गुरु कृपालु महाराज ने स्वयं अपने हाथों से इस मंदिर की नीवं रखी थी।
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यह मंदिर ब्रज क्षेत्र में मथुरा जिले के बरसाना में स्थित है और रंगीली महल के नजदीक प्रांगण में निर्मित है। इस मंदिर की वास्तुकला अद्भुत है जो अनायास ही भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। कीर्ति मंदिर का सम्पूर्ण प्रांगण सफ़ेद रंग की संगमरमर से निर्मित है और भक्तगण यहाँ घंटों बैठकर श्री राधारानी का चिंतन करते हैं। इस मंदिर की भव्यता दूर से देखते ही बनती है।
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ना केवल ब्रज क्षेत्र में बल्कि समस्त भारतवर्ष में महारानी कीर्ति का यह एकमात्र मंदिर है जिसमें महारानी कीर्ति की गोद में बैठी श्री राधारानी के सुन्दर और वात्सल्य छवि के दर्शन होते हैं।
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मंदिर के प्रांगण में श्री कृष्ण और राधा रानी के रास लीला से प्रेरित अनुपम विग्रह देखने को मिलते है जिनसे मंदिर की छठा को चार चाँद लग जाते है और उन्हें देखकर भक्तों को सचमुच द्वापर में होने की अनुभूति होती है। इसके अलावा यहाँ एक बड़ी स्क्रीन भी लगी है जिसमें श्री जगद्गुरु कृपालु महाराज के प्रेरणादायक वचन और भजन निरंतर चलते रहते हैं।
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प्राचीन काल के मंदिरों की शैली पर निर्मित, कीर्ति मंदिर के गर्भगृह का निर्माण नागर शैली में ही किया गया है और इसके सम्मुख विशाल मंडप निर्मित है जिसके अंदर आलिशान झूमर सैलानियों को देखते रहने को विवश कर देती है।
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संध्याकाल में मंदिर की छटा देखने में अति उत्तम लगती है क्योंकि सूरज ढलते ही यह मंदिर रंगबिरंगी रोशनियों से सराबोर हो जाता है और देखने वाले इसे देखते ही रह जाते हैं।

ब्रज क्षेत्र में श्री जगद्गुरु कृपालु महाराज जी ने प्रेम मंदिर और कीर्ति मंदिर का निर्माण कराकर, सचमुच भगवान श्री कृष्ण और श्री राधारानी की इस पावन भूमि पर उनके प्रेम और उनकी लीलाओं का साक्षात दर्शन उपलब्ध करवाया है और हम जैसे ऐतिहासिक प्रेमियों के लिए ऐसे मंदिरों का निर्माण कराकर साक्षात अतीत की वास्तुकला को वर्तमान लाकर दिखलाया है।

Vishnu Temple, Narayan pal, C.G.   #बस्तर  #छत्तीसगढ़
15/08/2024

Vishnu Temple, Narayan pal, C.G.


#बस्तर #छत्तीसगढ़

रूकना हमें आता नही, झुकना हमने सीखा नहीजब तक है जान, जब तक है दम, बढ़ते रहेंगे अपने कदम.......... 🇮🇳 ओ....माँ .....तुझे....
15/08/2024

रूकना हमें आता नही, झुकना हमने सीखा नही
जब तक है जान, जब तक है दम, बढ़ते रहेंगे अपने कदम..........
🇮🇳 ओ....माँ .....तुझे..... सलाम 🇮🇳
जय हिंद

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