14/01/2026
Day 2 | नींद भारी थी, पर भक्ति फिर भी जीत गई 😄🙏
Day 1 के बाद हालत ऐसी थी कि अगली सुबह कोई भी जल्दी उठने को तैयार नहीं था। अलार्म बजे, सबने सुना… और फिर सबने मिलकर इग्नोर कर दिया। और मैं मन ही मन सोच रहा था… ड्राइविंग तो सारा मैं कर रहा था, थका मुझे होना चाहिए था! 😄
आख़िरकार दिन की शुरुआत बड़े आराम से 9:30 बजे हुई।
इस बार मंदिर नहीं, ऑटो लिया और नदी के किनारे घूमने निकल पड़े। सुबह की धूप, ठंडी हवा और चारों तरफ श्रद्धालु—बस यूँ ही चलते रहे। सामने हरे राम हरे कृष्ण मंदिर दिख रहा था, लेकिन इस बार मन एकदम क्लियर था,आज सिर्फ़ विठ्ठल-विठ्ठल।
थोड़ी देर में भूख ने याद दिलाया कि आध्यात्म के साथ पेट भी ज़रूरी है। सपना था थालीपीठ और पिठला-भाकरी का, जगह भी मिल गई… लेकिन एक घंटे इंतज़ार के बाद समझ आ गया कि आज ये सुख किस्मत में नहीं है। तो मन मारकर गरम पूरी-भाजी और चाय से काम चलाया—दिल थोड़ा उदास, पेट खुश।
होटल लौटते वक्त अचानक ख्याल आया—तुलजा भवानी मंदिर तो पास ही है। इतिहास याद आते ही कार अपने आप स्टार्ट हो गई। पहुँचते ही 500–600 गाड़ियाँ देखकर दिल बैठ गया। मैंने पत्नी की तरफ देखा, उम्मीद थी वो कहेंगी छोड़ देते हैं… लेकिन वो मुस्कुराईं…..“चलो, एक बार देख लेते हैं।” और मेरी परीक्षा शुरू हो गई 😅
किस्मत ने थोड़ी मेहरबानी की और ₹1000 में 15–20 मिनट में दर्शन हो गए। शाम को तय किया कि मुंबई नहीं, बीच में ही रुकेंगे। लेकिन गूगल मैप ने जाते-जाते डराने का ठेका ले लिया, अंधेरी, सुनसान सड़क पर 12 किलोमीटर, बस एक ही दुआ चल रही थी… नेटवर्क मत जाना!
अगली सुबह मुंबई के लिए निकले और इस बार सब सही रहा। 4 बजे तक बिना किसी ट्रैफिक के घर पहुँच गए।
निष्कर्ष बस इतना—रोड ट्रिप प्लान से नहीं, हालात से चलती है… और यादें अपने आप बन जाती हैं ❤️🚗
Aashish Chawla
Dec 2025