10/09/2014
एक जादूगर जादू दिखा रहा है।
'नेक्स्ट आयटम ऑफ द प्रोग्राम: इकॉनोमिक्स ऑफ इंडिया-भारत का अर्थशास्त्र।" जादूगर ने कहा और लड़कियों ने उसकी दोनों ओर दो बड़े टेबुल रखे, जिन पर दो बड़े डिब्बे रखे गए। एक पर लिखा था: सार्वजनिक क्षेत्र और दूसरे पर निजी क्षेत्र। दोनों डिब्बे खोलकर दिखाए गए। वे खाली थे। लड़कियां दो मुर्गियां लेकर आईं। जादूगर ने एक मुर्गी सार्वजनिक और दूसरी निजी क्षेत्र के डिब्बे में रखी। जादू की लकड़ी घुमाई और सबसे पहले निजी क्षेत्र का डिब्बा खोला। मुर्गी बाहर आई और उसके बाद जादूगर ने दस ताजे अंडे निकाल कर दिखाए। दर्शकों ने तालियां बजाईं। उसके बाद जादूगर ने सार्वजनिक क्षेत्र का डिब्बा खोला। वहां से मुर्गी भी गायब थी। और कुछ नुचे हुए पंख मिले।
''आय, अंडा मिलना तो दूर इदर पब्लिक सेक्टर का मुर्गी भी साफ हो गिया।" जादूगर ने इस बार पांच अंडे सार्वजनिक क्षेत्र के और पांच अंडे निजी क्षेत्र के डिब्बे में रखे। डिब्बों को बंद किया और जादू की लकड़ी घुमाई। डिब्बों को खोला तो निजी क्षेत्र के पांच अंडे गायब थे, मगर उनकी जगह पांच चूजे बाहर आए। सार्वजनिक क्षेत्र के डिब्बे से पांच अंडे गायब थे, लेकिन चूजा नहीं निकला।
''कैसा है पब्लिक सेक्टर साहिबान, मुर्गी भी गायब हो गया, अंडा रखा तो अंडा भी गायब हो गिया। थोड़ा जांच-इन्कवायरी करना होगा।" जादूगर मंच से उतरा। सामने की पंक्ति में बैठे एक मिनिस्टर साहब की जेब से एक अंडा निकाल कर दिखाया। कुछ दूर एक आईएएस अधिकारी बैठे थे, उनकी नाक से अंडा टपकाकर निकाला। थोड़ी दूर पर एक ट्रेड यूनियन नेता बैठा था। उनकी टोपी उठाकर एक अंडा उसमें से निकाला। एक अंडा इंजीनियर की बगल से निकाला और एक अंडा बाबू की जेब से निकाला।
''ये वो पांच अंडा है साहिबान जो पब्लिक सेक्टर से गायब हो गिया था। हाम नहीं पकड़ता तो साब उसका आमलेट बनाकर खा जाता।" जादूगर ने कहा और दर्शकों ने तालियां बजाई।
~शरद जोशी (सरकार का जादू:जादू की सरकार)