01/08/2026
कल मुझे रंगरूट और Tapish Foundation द्वारा प्रस्तुत नाटक “जानेमन” देखने का अवसर मिला…
यह सिर्फ़ एक नाटक नहीं था, बल्कि समाज में किन्नर समुदाय के स्वीकार (Acceptance) की ज़रूरत पर आधारित एक संवेदनशील संवाद था।
सबसे पहले बात इस नाटक के कलाकारों की—इतने मँजे हुए, इतने स्वाभाविक कि कई बार भूल ही गए कि हम एक लाइव नाटक देख रहे हैं। हर दृश्य, हर संवाद गहरा असर छोड़ गया।
इस नाटक के साथ Tapish Foundation के बारे में भी जानने का मौका मिला। मध्यप्रदेश में यह अपनी तरह का एक अनूठा संगठन है, जो किन्नर समुदाय के लिए शेल्टर और सहयोग उपलब्ध कराता है।
नाटक ने हमारे मन में बने कई भ्रम और पूर्वाग्रहों को तोड़ा। अवनी और श्री ने समुदाय से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर बात की। लेकिन सबसे ज़्यादा जो बात दिल को छू गई, वह यह थी कि सिर्फ़ कानून, अधिकार और सरकारी योजनाएँ ही काफ़ी नहीं हैं।
सबसे ज़्यादा ज़रूरत है स्वीकार्यता (Acceptance) की।
हम शायद सब कुछ नहीं बदल सकते, लेकिन अपनी शुरुआत तो कर ही सकते हैं। उन्हें “अलग” मानने के बजाय, उसी सहजता और सम्मान से बात करें जैसे हम किसी भी दूसरे इंसान से करते हैं।
कभी-कभी समाज में सबसे बड़ा बदलाव किसी बड़े आंदोलन से नहीं, बल्कि हमारे रोज़मर्रा के व्यवहार से शुरू होता है।
यदि आप भी Tapish Foundation के काम को जानना या सहयोग करना चाहते हैं, तो उनसे ज़रूर जुड़ें। और ऐसे ही सार्थक, संवेदनशील और विचारोत्तेजक नाटकों के लिए रंगरूट के साथ जुड़े रहें
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📍Anand Mohan Mathur Sabhagruh, Indore - ३१ July