09/06/2026
*पीलीभीत टाइगर रिजर्व : स्थापना दिवस पर विशेष*
आज 9 जून का दिन उत्तर प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसी दिन वर्ष 2014 में Pilibhit Tiger Reserve को भारत के 45वें टाइगर रिजर्व के रूप में मान्यता प्राप्त हुई थी। स्थापना के बाद से यह संरक्षित क्षेत्र न केवल बाघों के लिए एक सुरक्षित आवास के रूप में उभरा है, बल्कि जैवविविधता संरक्षण, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और इको-टूरिज्म के क्षेत्र में भी एक उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है।
नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित पीलीभीत टाइगर रिजर्व लगभग 730 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहाँ घने साल वन, विशाल घास के मैदान, आर्द्रभूमियाँ और अनेक नदियाँ मिलकर एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करती हैं। शारदा, माला, खन्नौत तथा गोमती जैसी नदियाँ इस क्षेत्र को जीवन प्रदान करती हैं।
पीलीभीत की पहचान केवल बाघों तक सीमित नहीं है। यहाँ तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल, बारहसिंगा, फिशिंग कैट, लेपर्ड कैट, जंगल कैट और विश्व की सबसे छोटी जंगली बिल्लियों में से एक रस्टी-स्पॉटेड कैट भी पाई जाती है। इसके अतिरिक्त 350 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ इस क्षेत्र को पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग बनाती हैं।
बाघ संरक्षण की सफलता
स्थापना के समय जहाँ बाघों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, वहीं बेहतर संरक्षण प्रबंधन, वन कर्मियों की सतर्कता और स्थानीय समुदायों के सहयोग से यहाँ बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज पीलीभीत देश के उन चुनिंदा टाइगर रिजर्वों में शामिल है जहाँ बाघों का घनत्व काफी अच्छा माना जाता है।
विशेष बात यह है कि यहाँ बाघों और भालुओं की एक साथ साइटिंग भी अक्सर देखने को मिलती है, जो इस क्षेत्र की स्वस्थ पारिस्थितिकी और पर्याप्त संसाधनों का संकेत है।
जैवविविधता का अद्भुत संसार
मानसून के आगमन के साथ पीलीभीत का जंगल और भी जीवंत हो उठता है। रंग-बिरंगी तितलियाँ, दुर्लभ कीट, उभयचर, सरीसृप और असंख्य पक्षी इस क्षेत्र की जैवविविधता को और समृद्ध बनाते हैं। यहाँ 12 से अधिक प्रकार के कछुए, अनेक प्रजातियों के साँप तथा दुर्लभ पक्षी जैसे जार्डन बुशचैट, फिन वीवर, बंगाल फ्लोरिडा, सात प्रकार के गिद्ध और मानसून के संदेशवाहक विभिन्न पक्षी प्रजातियों को भी देखा जा सकता हैं।
स्थानीय समुदायों की भूमिका
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सफलता में आसपास के ग्रामीणों और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संरक्षण के साथ-साथ लोगों की आजीविका, पर्यावरण शिक्षा और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया गया है। इससे स्थानीय लोगों में वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हुआ है।
भविष्य की जिम्मेदारी
स्थापना दिवस केवल उपलब्धियों का उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमें भविष्य की जिम्मेदारियों का भी स्मरण कराता है। बढ़ते विकास कार्यों, जलवायु परिवर्तन और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों के बीच इस अमूल्य प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
आज स्थापना दिवस पर हम उन सभी वन कर्मियों, प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय समुदायों को नमन करते हैं जिनके अथक प्रयासों से पीलीभीत टाइगर रिजर्व आज देश के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुका है।
"पीलीभीत टाइगर रिजर्व केवल बाघों का घर नहीं, बल्कि प्रकृति, जैवविविधता और सह-अस्तित्व का जीवंत उदाहरण है।"
अख्तर मियां खान
अध्यक्ष
टरक्वाइज वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी