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Kashi Walk बनारस शहर को देखने के कई नजरिये है। 'काशी वॉक' बनारस को देखने का एक नया नजरिया है ।

12/03/2022
  - श्री प्रकाश | कानूनविद व समाजसेवी ||बनारस|धर्मनिरपेक्ष भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले संविधान सभा के सदस...
03/08/2021

- श्री प्रकाश | कानूनविद व समाजसेवी ||बनारस|

धर्मनिरपेक्ष भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले संविधान सभा के सदस्य पद्मविभूषण श्री प्रकाश का जन्म काशी की पुण्य धरती पर आज ही के दिन यानी 3 अगस्त सन् 1890 को डॉ. भगवान दास के घर हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक काशी में ही प्राप्त की। बनारस के सेन्ट्रल हिंदू स्कूल से उन्होंने माध्यमिक शिक्षा और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से बी.ए. की परिक्षा उत्तीर्ण की।

वे एक अच्छे कानूनविद् थे। उन्होंने कानून की पढ़ाई इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्विद्यालय से पूरी की।

पद्मविभूषण श्री प्रकाश महोदय स्वतंत्र भारत में पंडित जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री भी रहे, इसके अलावा उन्होंने कुछेक राज्यों में राज्यपाल का पदभार भी संभाला।

पद्मविभूषण श्री प्रकाश समाज सेवा में भी हमेशा अग्रणी रहे। वाराणसी में उन्होंने अग्रवाल समाज, काशी सेवा समिति तथा अन्य कई संस्थाओं की स्थापना की। वे महात्मा गांधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू के परम मित्र थे, उन्होंने इन लोगों के साथ मिलकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई।

आज उनके जन्म दिन के अवसर पर काशी वॉक के पूरे परिवार की तरफ से इस महान विभूति को शत् शत् नमन।

लेखन : रंजना पटेल(टीम "काशी वॉक")
https://www.facebook.com/ranjana.patel.520
संपादन : स्मृति सिंह(टीम"काशी वॉक")
https://www.facebook.com/smritisingh29
पोस्टर : राजन विश्वकर्मा(टीम"काशी वॉक")
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बनारस दुनिया का प्राचीनतम जीवंत शहर है। इस शहर को देखने के कई नजरिये हैं। 'काशी वॉक' बनारस को देखने का एक नया नजरिया लेकर आया है, जिसमें हर्ष जायसवाल (स्टोरीटेलर, गाइड, मेंटर & स्पीकर) आपको न केवल बनारस दिखाते हैं बल्कि साथ में सुनाते हैं इस शहर की कहानियाँ, आपको ले जाते हैं सबसे प्राचीन जगहों पर, महसूस कराते हैं आपको बनारस का अध्यात्म। तो 'काशी वॉक' में आपका स्वागत है।

दही - गुड़ खिलाकर शिव गोविंद भाई को  भारत वॉक की यात्रा मंगलमय होने की कामना के साथ उन्हें कल विदा किया गया। आप अभी प्रया...
03/08/2021

दही - गुड़ खिलाकर शिव गोविंद भाई को भारत वॉक की यात्रा मंगलमय होने की कामना के साथ उन्हें कल विदा किया गया। आप अभी प्रयागराज पहुंच चुके हैं और अगला गंतव्य चित्रकूट है, यात्रा वृतांत इसी तरह से आपको बताता रहूँगा।

  - जटार घाट(चोर घाट)।इस घाट का निर्माण ग्वालियर के राजा जीवाजी राव शिंदे के दीवान बालाजी चिम्नाजी जटार ने करवाया था। इस...
26/07/2021

- जटार घाट(चोर घाट)।

इस घाट का निर्माण ग्वालियर के राजा जीवाजी राव शिंदे के दीवान बालाजी चिम्नाजी जटार ने करवाया था। इस घाट के ऊपर में बहुमंजिला इमारत का निर्माण भी उन्होंनें ही करवाया था। ब्रिटिश इतिहासकार जेम्स प्रिंसेप ने इस घाट को चोर घाट कहा है, क्योंकि स्थानीय लोगों का कहना था कि पहले इस घाट पर स्नान करने वाले लोगों के सामान चोरी हो जाते थे। इसलिए यह घाट चोर घाट के नाम से प्रचलित हो गया। घाट पर बाला जी जटार द्वारा निर्मित कराया हुआ "लक्ष्मीनारायण" का प्राचीन मंदिर भी स्थित है, जो अपने निर्माण कला का अनूठा उदाहरण माना जाता है। यह मंदिर रंगबिरंगी कांच से निर्मित है। जिसके कारण इसे जड़ाऊ मंदिर भी कहा जाता है। घाट स्थित गंगा में कालगंगा तीर्थ की भी स्थिति मानी जाती है।
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बनारस दुनिया का प्राचीनतम जीवंत शहर है। इस शहर को देखने के कई नजरिये हैं। 'काशी वॉक' बनारस को देखने का एक नया नजरिया लेकर आया है, जिसमें हर्ष जायसवाल (स्टोरीटेलर, गाइड, मेंटर & स्पीकर) आपको न केवल बनारस दिखाते हैं बल्कि साथ में सुनाते हैं इस शहर की कहानियाँ, आपको ले जाते हैं सबसे प्राचीन जगहों पर, महसूस कराते हैं आपको बनारस का अध्यात्म। तो 'काशी वॉक' में आपका स्वागत है।

  - राम घाट। जयपुर के राजा सवाई मानसिंह ने इस घाट और घाट पर ही स्थित राम पंचायतन मंदिर का निर्माण करावाया था। यहाँ रामपं...
12/07/2021

- राम घाट।

जयपुर के राजा सवाई मानसिंह ने इस घाट और घाट पर ही स्थित राम पंचायतन मंदिर का निर्माण करावाया था। यहाँ रामपंचायतन मंदिर स्थित होने के कारण ही इस घाट का नाम "राम घाट" पड़ा। इस मंदिर को औरंगजेब द्वारा नष्ट कर दिया गया था फिर 18 वीं शताब्दी में इसका पुनःनिर्माण सवाई मान सिंह ने करवाया। पहले यह घाट मेहता घाट तक विस्तृत था। पुरातन ग्रंथों के अनुसार घाट के सामने गङ्गा में राम, ताम्रवराह, इन्द्रद्युम्न और इक्ष्वाकु तीर्थों की उपस्थिति मानी जाती है। इस घाट के बगल में ही संग वेद विद्यालय स्थापित है, जहाँ वेद की शिक्षा दी जाती है तथा शांति निकेतन में संगीत और संस्कृति की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस घाट पर रामनवमी पर गङ्गा में स्नान व दर्शन की विशेष मान्यता है। इस घाट पर महाराष्ट्र के लोक देवता खंडोबा का मंदिर भी स्थित है। मराठी समुदाय के लोग खंडोबा देवता का पूजन करते हैं तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। बनारस महायोजना-2031 के तहत इस घाट के 200 मीटर के अंदर कोई भी दुकान और भवन निर्माण पर रोक लगा दिया गया है।
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बनारस दुनिया का प्राचीनतम जीवंत शहर है। इस शहर को देखने के कई नजरिये हैं। 'काशी वॉक' बनारस को देखने का एक नया नजरिया लेकर आया है, जिसमें हर्ष जायसवाल (स्टोरीटेलर, गाइड, मेंटर & स्पीकर) आपको न केवल बनारस दिखाते हैं बल्कि साथ में सुनाते हैं इस शहर की कहानियाँ, आपको ले जाते हैं सबसे प्राचीन जगहों पर, महसूस कराते हैं आपको बनारस का अध्यात्म। तो 'काशी वॉक' में आपका स्वागत है।

  - मेहता घाट। वर्ष 1960 के शुरुआत में पश्चिम बंगाल के व्यापारी बल्लभ राम शालिग्राम मेहता ने घाट की जमीन खरीद कर इसे पक्...
10/07/2021

- मेहता घाट।

वर्ष 1960 के शुरुआत में पश्चिम बंगाल के व्यापारी बल्लभ राम शालिग्राम मेहता ने घाट की जमीन खरीद कर इसे पक्का घाट बनावाया तभी से इसे "मेहताघाट" के नाम से जाना जाने लगा। पहले यह राम घाट का ही कच्चा हिस्सा था। इस घाट पर कोई मंदिर तो नही है लेकिन इसके ऊपरी हिस्से में मेहता अस्पताल एवं प्रसिद्ध सांगवेद संस्कृत विद्यालय स्थित है। घाट के पास महाराष्ट्र के लोगों की अधिकता है। यह घाट पक्का एवं स्वच्छ है। इस घाट का धार्मिक महत्व कम होने के कारण यहाँ स्थानीय निवासी ही स्नान करते हैं।
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बनारस दुनिया का प्राचीनतम जीवंत शहर है। इस शहर को देखने के कई नजरिये हैं। 'काशी वॉक' बनारस को देखने का एक नया नजरिया लेकर आया है, जिसमें हर्ष जायसवाल (स्टोरीटेलर, गाइड, मेंटर & स्पीकर) आपको न केवल बनारस दिखाते हैं बल्कि साथ में सुनाते हैं इस शहर की कहानियाँ, आपको ले जाते हैं सबसे प्राचीन जगहों पर, महसूस कराते हैं आपको बनारस का अध्यात्म। तो 'काशी वॉक' में आपका स्वागत है।

  - गणेश घाट। 18वीं सदी के पहले पूणे के अमृतराव पेशवा ने अग्निश्वर और रामघाट के एक हिस्से का पक्का निर्माण कराया और इसे ...
04/07/2021

- गणेश घाट।

18वीं सदी के पहले पूणे के अमृतराव पेशवा ने अग्निश्वर और रामघाट के एक हिस्से का पक्का निर्माण कराया और इसे नई पहचान दी। उन्होंने यहाँ अमृत विनायक(गणेश भगवान) मंदिर का निर्माण कराया। इस प्रचीन मंदिर के स्थित होने के वजह से ही इस घाट का नाम "गणेश घाट" पड़ा। यह घाट भोंसले घाट के बाद स्थित है। देवों में प्रथम होने की वजह से गणेश घाट की मान्यता विशेष तौर पर है। गंगा और भगवान गणेश से जुडे़ सभी प्रमुख आयोजन इस घाट और मंदिर पर किए जाते हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र के लोगों की आस्था भी इस घाट और मंदिर के प्रति काफी है।
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बनारस दुनिया का प्राचीनतम जीवंत शहर है। इस शहर को देखने के कई नजरिये हैं। 'काशी वॉक' बनारस को देखने का एक नया नजरिया लेकर आया है, जिसमें हर्ष जायसवाल (स्टोरीटेलर, गाइड, मेंटर & स्पीकर) आपको न केवल बनारस दिखाते हैं बल्कि साथ में सुनाते हैं इस शहर की कहानियाँ, आपको ले जाते हैं सबसे प्राचीन जगहों पर, महसूस कराते हैं आपको बनारस का अध्यात्म। तो 'काशी वॉक' में आपका स्वागत है।

  : लाल बहादुर शास्त्री।|स्वतंत्रता सेनानी एवम् राजनेता||वाराणसी|जन्म - भारत के दूसरे प्रधानमंत्री एवम् स्वतंत्रता सेनान...
24/06/2021

: लाल बहादुर शास्त्री।|स्वतंत्रता सेनानी एवम् राजनेता||वाराणसी|

जन्म - भारत के दूसरे प्रधानमंत्री एवम् स्वतंत्रता सेनानी भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1904 में वाराणसी के मुगलसराय में हुआ था।

पारिवारिक जीवन - सत्य और अहिंसा के पुजारी, मुख्य रूप से पूर्ण रूपेण गाँधीवादी नेता श्री लाल बहादुर शास्त्री के पिता का नाम श्री मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव था, जो की प्राथमिक स्कूल में शिक्षक थे। उनकी माता का नाम श्रीमती राम दुलारी था। बचपन में सभी लाल बहादुर शास्त्री को नन्हें के नाम से पुकारते थे। उनका विवाह श्री गणेश प्रसाद की पुत्री ललिता के साथ हुआ। उन्होंने अपने विवाह में दहेज स्वरूप बस एक चरखा और कुछ मीटर हाथों से बुना हुआ कपड़ा लेकर अपनी सादगी का परिचय दिया।

शिक्षा-दीक्षा - भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रारंभिक शिक्षा उनके पिता के देहांत हो जाने के कारण उनके ननिहाल में हुई। आगे जाकर उन्होंने हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की परीक्षा पास की। उसके उपरांत उन्होंने वाराणसी के ही महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि ली।

राजनीतिक जीवन - श्री लाल बहादुर शास्त्री के राजनीतिक मार्गदर्शक श्री पुरुषोत्तम टंडन, पंडित गोविंद बल्लभ पंत और श्री जवाहर लाल नेहरू रहे। श्री लाल बहादुर शास्त्री ने स्वतंत्रता संग्राम में खुलकर भागीदारी की। उन्होंने महात्मा गांधी के साथ सन् 1921 में असहयोग आंदोलन, सन् 1930 में दांडी मार्च और सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में पूर्ण रूप से सक्रिय भूमिका निभाई। श्री जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल में वो उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव नियुक्त हुए। पंडित गोविंद बल्लभ पंत के कार्यकाल में उन्हें उत्तर प्रदेश के पुलिस एवम् परिवहन मंत्रालय सौंपा गया। परिवहन मंत्री के रूप में उन्होंने पहली बार महिला कंडक्टर्स की नियुक्ति की एवम् पुलिस मंत्री के रूप में उन्होंने ही पहली बार भीड़ नियंत्रण के लिए लाठी चार्ज की जगह पानी की बौछार का इस्तेमाल शुरू किया।

प्रधानमंत्री कार्यकाल - भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री 9 जून सन् 1964 से 11 जनवरी सन् 1966 तक अठारह माह के लिए भारत के दूसरे प्रधानमंत्री रहे। उनके प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सन् 1965 में भारत-पाक युद्ध हुआ। जिसमें उन्होंने अपनी राजनीतिक कुशलता का परिचय देते हुए पाकिस्तान को युद्ध में करारी शिकस्त दी।

मृत्यु - 11 जनवरी सन् 1966 में ताशकंद सोवियत संघ रूस में श्री लाल बहादुर शास्त्री की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अयुब खान के साथ युद्ध समाप्ति के समझौते पर हस्ताक्षर करने के उपरांत रहस्यमयी तरीके से मृत्यु हो गई।
उन्हें मरणोपरांत भारत सरकार द्वारा भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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  - भोंसले घाट(नागेश्वर घाट)। महाराष्ट्र के नागपुर क्षेत्र के भोंसले वंश के महाराजा ने सन् 1795 में घाट पर एक महल का निर...
23/06/2021

- भोंसले घाट(नागेश्वर घाट)।

महाराष्ट्र के नागपुर क्षेत्र के भोंसले वंश के महाराजा ने सन् 1795 में घाट पर एक महल का निर्माण करवाया। इसी वजह से घाट का नाम "भोंसले घाट" पड़ा। काशी की महत्ता का सम्मान करते हुए घाट को पक्का और यहाँ महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत और स्थापत्य कला के तौर पर महल का निर्माण करवाया गया था। पहले घाट को "नागेश्वर घाट" के नाम से पुकारा जाता था, क्योंकि घाट पर एक बहुत पुराना नागेश्वर नाथ मंदिर है, जिसका काशी के 12 ज्योतिर्लिंगों में भी प्रमुख स्थान है। घाट पर ही मराठा स्थापत्य कला का प्रतीक महल आज भी मौजूद है जिसमें लक्ष्मीनारायण और रघुराजेश्वर आदि शिव मंदिर विराजमान हैं। घाट पर ही महल का प्रवेश द्वार है। घाट पर ज्यादातर महाराष्ट्र से आने वाले सैलानियों का जमावड़ा रहता है।
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