19/06/2021
: गोपीनाथ कविराज।|लेखक एवम् मनीषी||बनारस|
जन्म - महामहोपाध्याय श्री गोपीनाथ कविराज का जन्म 7 सितंबर सन् 1887 को एक बंगाली परिवार में ब्रिटिश भारत के धमरई जिला ढाका में एक छोटे से गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री बैकुंठनाथ बागची था। कविराज उन्हें सम्मान में कहा जाता था।
शिक्षा-दीक्षा - संस्कृत, योग और तंत्र के प्रकांड विद्वान महामहोपाध्याय श्री गोपीनाथ कविराज की शिक्षा-दीक्षा जयपुर और वाराणसी में हुई। उनकी प्रारंभिक शिक्षा श्री मधुसूदन ओझा और विद्वान शशिधर 'तर्क चूड़ामणि' के निर्देशन में जयपुर में हुई। उसके बाद उन्होंने अपनी आगे की शिक्षा वाराणसी के क्वींस कॉलेज से पूरी की। क्वींस कॉलेज से एम. ए. करने के बाद वे 1923 से 1937 तक वाराणसी के शासकीय संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य रहे। इसके साथ ही वे सरस्वती भवन ग्रंथमाला के संपादक भी रहे थे।
ग्रंथ - श्री श्री विशुद्धनंद प्रसंग, तांत्रिक साधना, अखंड योग, भारतीय साधना की धारा, श्री कृष्ण प्रसंग, मृत्यविज्ञान और कर्मरहस्य, त्रिपुर रहस्य, गोरख सिद्धांत संग्रह, साहित्य चिंतन, सिद्ध भूमि ज्ञानगंज(बंगाली)।
सम्मान - सन् 1964 में उन्हें तांत्रिक बाग्ड:य में शाक्त दृष्टि के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार(संस्कृत) प्राप्त हुआ। उन्हें सन् 1964 में ही भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण प्राप्त हुआ। सन् 1956 में काशी हिंदू विश्विद्यालय से उन्हें डी.लिट की उपाधि मिली।
मृत्य -12 जून सन् 1976 को काशी में इस महान मनीषी का देहांत हो गया।
लेखन : रंजना पटेल(टीम "काशी वॉक")
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संपादन : स्मृति सिंह(टीम"काशी वॉक")
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पोस्टर : राजन विश्वकर्मा(टीम"काशी वॉक")
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