Buddhavana This place was mentioned in the script written by THIEN SEINNGH when he followed the way of Lord Bud

This place was mentioned in the script written by THIEN SEINNGH when he followed the way of Lord Buddha visiting he fond that while travelling from Nalanda to Rajgrih through mountain ranges he reaches to the place just beside the mountain of Rajgrih in village AYER which is now called BUDDHAVANN AYER which lies just between two bodh places BODHGAYA and RAJGIRH WISVA SHANTI STOOP. many boddhist pe

ople were searching that place which lies between Gaya and Rajgrih which was mentioned in script but place was not found but when they followed the same way of travelling they found it on the mountain of village Ayer you can also find this place on google maps as Buddhavann!

Dukh ka jad.... Attachment hai.
06/08/2017

Dukh ka jad.... Attachment hai.

15/07/2017

*किसी ने गौतम बुद्ध से पूछा,
*आप बड़े है फिर भी निचे बैठते है?
*बहुत ही खूबसूरत जवाब दिया..*
*"नीचे बैठने वाला इंसान कभी गिरता नहीं.*."|।

"अनजाने कर्म का फल"एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में महल के आँगन में भोजन करा रहा था ।राजा का रसोईया खुले आँगन में भोजन पका...
28/09/2016

"अनजाने कर्म का फल"

एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में महल के आँगन में भोजन करा रहा था ।
राजा का रसोईया खुले आँगन में भोजन पका रहा था ।
उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के उपर से गुजरी ।
तब पँजों में दबे साँप ने अपनी आत्म-रक्षा में चील से बचने के लिए अपने फन से ज़हर निकाला ।
तब रसोईया जो लंगर ब्राह्मणो के लिए पका रहा था, उस लंगर में साँप के मुख से निकली जहर की कुछ बूँदें खाने में गिर गई ।
किसी को कुछ पता नहीं चला ।
फल-स्वरूप वह ब्राह्मण जो भोजन करने आये थे उन सब की जहरीला खाना खाते ही मौत हो गयी ।
अब जब राजा को सारे ब्राह्मणों की मृत्यु का पता चला तो ब्रह्म-हत्या होने से उसे बहुत दुख हुआ ।

ऐसे में अब ऊपर बैठे यमराज के लिए भी यह फैसला लेना मुश्किल हो गया कि इस पाप-कर्म का फल किसके खाते में जायेगा .... ???
(1) #राजा .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना जहरीला हो गया है ....
या
(2 ) #रसोईया .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना बनाते समय वह जहरीला हो गया है ....
या
(3) #वह चील .... जो जहरीला साँप लिए राजा के उपर से गुजरी ....
या
(4) #वह साँप .... जिसने अपनी आत्म-रक्षा में ज़हर निकाला ....

बहुत दिनों तक यह मामला #यमराज की फाईल में अटका (Pending) रहा ....

फिर कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने उस राज्य मे आए और उन्होंने किसी महिला से महल का रास्ता पूछा ।
उस महिला ने महल का रास्ता तो बता दिया पर रास्ता बताने के साथ-साथ ब्राह्मणों से ये भी कह दिया कि " #देखोभाई ....जरा ध्यान रखना .... वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है ।"

बस जैसे ही उस महिला ने ये शब्द कहे, उसी समय #यमराज ने फैसला (decision) ले लिया कि उन मृत ब्राह्मणों की मृत्यु के पाप का फल इस महिला के खाते में जाएगा और इसे उस पाप का फल भुगतना होगा ।

यमराज के दूतों ने पूछा - प्रभु ऐसा क्यों ??
जब कि उन मृत ब्राह्मणों की हत्या में उस महिला की कोई भूमिका (role) भी नहीं थी ।
तब यमराज ने कहा - कि भाई देखो, जब कोई व्यक्ति पाप करता हैं तब उसे बड़ा आनन्द मिलता हैं । पर उन मृत ब्राह्मणों की हत्या से ना तो राजा को आनंद मिला .... ना ही उस रसोइया को आनंद मिला .... ना ही उस साँप को आनंद मिला .... और ना ही उस चील को आनंद मिला ।
पर उस पाप-कर्म की घटना का बुराई करने के भाव से बखान कर उस महिला को जरूर आनन्द मिला । इसलिये राजा के उस अनजाने पाप-कर्म का फल अब इस महिला के खाते में जायेगा ।

बस इसी घटना के तहत आज तक जब भी कोई व्यक्ति जब किसी दूसरे के पाप-कर्म का बखान बुरे भाव से (बुराई) करता हैं तब उस व्यक्ति के पापों का हिस्सा उस बुराई करने वाले के खाते में भी डाल दिया जाता हैं ।

अक्सर हम जीवन में सोचते हैं कि हमने जीवन में ऐसा कोई पाप नहीं किया, फिर भी हमारे जीवन में इतना कष्ट क्यों आया .... ??

ये कष्ट और कहीं से नहीं, बल्कि लोगों की बुराई करने के कारण उनके #पाप-कर्मो से आया होता हैं जो बुराई करते ही हमारे खाते में ट्रांसफर हो जाता हैं !

अनंत चतुर्दशी से पितृपक्ष आरंभ होता है और कई लोग शायद इस समय गया(बिहार) जाने की सोच रहे होंगे | उनके लिए छोटी सी एक जानक...
17/09/2016

अनंत चतुर्दशी से पितृपक्ष आरंभ होता है और कई लोग शायद इस समय गया(बिहार) जाने की सोच रहे होंगे | उनके लिए छोटी सी एक जानकारी ये है कि गया और बोधगया दोनों में थोड़ी सी दूरी है | बोधगया बौद्ध धार्मिक पर्यटन का स्थल है जो गया शहर से थोड़ा सा बाहर होता है | ऐसे में जब आप होटल की बुकिंग फ़ोन से करवाएं तो एक बार पूछ लीजिये कि होटल किस जगह है, और आपके लिए दूरियां पैदल पार करने लायक होंगी भी या नहीं |

इस समय गया में बहुत ज्यादा भीड़ होती है | ट्रैफिक पुलिस गाड़ियों के आवागमन का नक्शा बदलती है | बनारस की ही तरह गया में संकरी गलियां हैं | जो आपको जी.पी.एस. सिस्टम पर दिख रही है जरूरी नहीं कि वो बड़ी कार के पार करने लायक गली हो | इन्टरनेट के ढंग से काम करने की भी कोई गारन्टी नहीं होती | बिहार के अख़बारों में नक़्शे जारी किये जाते हैं | हो सके तो अखबार की कटिंग, या प्रिंट अपने पास रखिये |

आपकी मंगलमय यात्रा की कामना के साथ मेरा गया के निवासियों से भी आग्रह रहेगा कि अपने शहर के पर्यटन स्थलों के बारे में, रास्तों के बारे में वो लोगों को बताएं | सोशल मीडिया के इस दौर में आपकी पोस्ट किसे दिख जाए, किसके काम आ जाए ये कहना मुश्किल है | तीर्थयात्री की मदद करके एक पुण्य का लाभ तो हिन्दू होने के नाते आपको उठाना ही चाहिए |

धन्यवाद

05/09/2016

पिता कल्पवृक्ष होते हैं !

"क्रोधित रहना, किसी और पर फेंकने के इरादे से एक गर्म कोयला अपने हाथ में रखने की तरह है, जो तुम्ही को जलती है |"-गौतम बुद...
12/07/2016

"क्रोधित रहना, किसी और पर फेंकने के इरादे से एक गर्म कोयला अपने हाथ में रखने की तरह है, जो तुम्ही को जलती है |"
-गौतम बुद्ध

Real meaning of poision..
26/04/2016

Real meaning of poision..

Each Morning We are Born again.What we do Today is what Matters Most.
24/03/2016

Each Morning We are Born again.
What we do Today is what Matters Most.

14/03/2016

Buddha

01/02/2016

आधे दुःख गलत लोगो से उम्मीद रखने से होते है...

और बाकी आधे सच्चे लोगो पे शक करने से होते है...”॥

New small temple ( puja grih) made at buddhavana aerMore photos soon willl be updated..  Watchout the architect design..
24/09/2015

New small temple ( puja grih) made at buddhavana aer

More photos soon willl be updated..
Watchout the architect design..

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Buddhavana, Ayer
Gaya
805135

Téléphone

+9102260501150

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