01/06/2020
परदे मे मत झांकी
ढकयोडो भरभ उगड ज्यासी ।।
जीवण मे गांठयां उल्ज जासी,,
थुं जाणे देख कितरा अठे बेठा है ,
मुंड मुंडायोडा ,
थुं जाणे कितरा देख अठे
बगला नर भेख बणायोडा ,
थुं जाणे कितरा देख अठै मठधारी तिलक लगायोडा ।
बेठा कितरा अउधूत अठे
तन माँई राख रमायोडा ,,
भग्त री भग्ती ने मत देख ।
धर्म री धज्जियां उड ज्यासी ।।
परदे रै भितर मत झांक ठकियोडो भरम उघड ज्यासी ।
पिछै पडदे री छायां मे जाणे
छल री माया ,
दस तेरा के बीसा पथी ,
थु जाणे जाने सब उल्लझाया है ।
गाबा मे सेंग उघाडा ,
हर पांव तिसलता पाया है ।
मिनका री ने कांई दोस ,
अठे बे देव लुङकता आया है ।।
जमियोडी रंजी मती उडाय ।
पेडारी जडा उखड ज्यासी
।।परदे रै भितर.......
भिन्ता भीतर सु खोली है,
उपर रंग रचोला है ।
चोला तो उपर का खोला ,
भीतर ले समन्द हबोला ।
देख्यां सुं घणा पिस्तावोला ,
किं नही पोल का गोला है
।।
सागर री लहेरा देखी ,
पण भीतर किणी ने नब्ज ने टंटोली है ।।
सोने री खोली उतरता ही ,
ठाकुरजी पिथल रज रल ज्यासी ।।~~
पडदे रे भितर मत झांक ,
जमियोडी ढकयोडो
भरम उघड ज्यासी।।
धरम री चादर ताण ,
सुता कुण मोजा माणे है ।
कणी बने बनीती बिगाडी देख ,
कुणा रो जीव ठिकाणे है ।
करै कुण किरतब काली रात,
बां ने के थु नही जाणे ।
हवा मे खोज मन्डे उणारा ,
पागी थु पग पिछाणे है ।
भेद री बातां ने मत खोल
पोल रो ढोल बिखर ज्यासी ।
पडदे रै भितर मत जांक ढक्योडो भरम उगड ज्यासी ।।
आप री अपणायत ने देख ,
अणेसो मन अवेला ।
थारा ने निजरा सु निहार ,
घिरणा सु नाक चढावेला ,
परवाडा बाच्यां जे पांछा ,
नेण री नींद उडावेला ।
चाले ज्युं चालण दे चरखो ,
आंख्यां री सर्म गमावेला ,
जीवन सु मती री खिलवाड ,
कागजी फुल बिखर ज्यसी ।
पडदे भितर मत झांकी ,
ढकरौडो भरम उगड ज्यासी॥
जीवण जीणो धीर धार ,
कदेयी गांठ्या ने पड ज्यावेली |