05/08/2026
सिर्फ एक मशीन नहीं, मेरी आधी ज़िंदगी का हिस्सा..."
जब पहली बार इस पर चाबी घुमाई थी, तो नहीं सोचा था कि यह सफ़र इतना लम्बा और यादगार होगा। आज, जब ओडोमीटर पर '1,00,000' का आँकड़ा नज़र आया, तो पुरानी हर याद ताज़ा हो गई।
इन एक लाख किलोमीटरों में इसने न जाने कितनी बार मुझे गिरते हुए संभाला, और कितनी बार मेरी मंज़िलों तक पहुँचाया। हर मौसम में, हर सड़क पर, बिना थके, बिना रुके, इसने मेरा साथ निभाया। यह मेरे लिए सिर्फ लोहे का ढांचा नहीं, मेरा साथी है, मेरी पहचान है।
शुक्रिया मेरे दोस्त, मेरे हमसफ़र, इस शानदार सफ़र के लिए।