Dream India Tours- Dream Sariska

Dream India Tours- Dream Sariska So come welcome all of you for a new experience. Feel the touch of nature, visit the historical places and feel a great experience.

अलवर महाराजा जयसिंह जी नरुका, जिन्हें अपने महल में कुत्ते रखना कतई पसंद नहीं था। एक बार लेडी वायसराय अपने कुत्ते के साथ ...
16/01/2021

अलवर महाराजा जयसिंह जी नरुका, जिन्हें अपने महल में कुत्ते रखना कतई पसंद नहीं था। एक बार लेडी वायसराय अपने कुत्ते के साथ महाराजा के शिविर में भोजन के लिए आई, तो महाराजा ने उनसे कहलवाया कि कुत्ते को बाहर छोड़कर फिर भोजन के लिए आवें, पर लेडी वायसराय अपनी ज़िद पर अड़ी रही। आख़िरकार लेडी वायसराय को बिना भोजन किए ही जाना पड़ा।

इन महाराजा के इसी तरह बर्ताव के कारण अंग्रेज इनसे काफी तंग आ गए थे। अंग्रेजों ने इनको गद्दी से खारिज करके विदेश भेज दिया था और इनका देहांत भी पेरिस में हुआ।

अंग्रेजों ने इनके चरित्र पर कीचड़ उछालने के लिए कई भ्रामक खबरें फैलाई जिनमें से एक ये भी थी कि इन महाराजा ने एक बार अपने घोड़े पर पेट्रोल छिड़कर उसे मार डाला।

बहरहाल, ये वही महाराजा हैं जिन्होंने प्रसिद्ध रॉल्स रॉयस कंपनी की कारों का प्रयोग कचरा उठाने में करवाया, क्योंकि वहां साधारण कपड़ों में जाने पर कर्मचारियों ने इनको बाहर निकाल दिया था।

एक नजर अलवर पर :-अलवर तीन महत्वपूर्ण शहरों के मध्य प्रकृति की गोद में बसा हुआ एक खूबसूरत शहर ऊंचे ऊंचे पहाड़,जंगल,धार्मिक...
25/12/2020

एक नजर अलवर पर :-
अलवर तीन महत्वपूर्ण शहरों के मध्य प्रकृति की गोद में बसा हुआ एक खूबसूरत शहर ऊंचे ऊंचे पहाड़,जंगल,धार्मिक स्थान,ऐतिहासिक धरोहरें औऱ एक खूबसूरत भौगोलिक स्थिति कभी सोचा कि हमारा शहर इतना सब कुछ होते हुए भी पर्यटकों को क्यों आकर्षित नहीं कर पाता है। तो चलो हमारे साथ और करते हैं शुभारंभ पर्यटकों को आकर्षित करने का, ले चलते हैं आपको आज से 40000 साल पहले अलवर जिले के इतिहास में जब मानव सभ्यता में जब मनुष्य गुफाओं में रहता था। शिकार करके जीवन यापन करता था। उस समय के मनुष्यों ने अपनी कलाओं और रहन सहन को शैल चित्रों के रूप में उकेरा जिस से आने वाली पीढ़ी उन सब के बारे में जान सकें। पर क्या अलवर को तो कोई समझेगा ही नहीं कि उसने अपने गर्भ में कितना स्वर्णिम इतिहास छुपाया हुआ है। उगता हुआ सूरज,बैल,गाय,घोड़े, व्हेल मछली, शिकार करते हुए, घरों की व्यवस्था,देवता एवं अपने हथियारों को पाषाण कालीन मनुष्य ने कुछ ऐसा उकेरा है कि हज़ारों साल बाद भी वह प्रकृति के द्वारा आज भी सम्भाल कर रखा गया है। तो चलिए हमारे साथ एक नई यात्रा पर आये और अलवर को महसूस करें यहां के इतिहास ,स्थापत्य कला और प्रकृति को।
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Whistling woods(the dream India tours)

सरिस्का की दुर्लभ घटना...बहुत ही दुर्लभ क्षण बहुत ही कम देखा जाता है कि एक जरख और बघेरा एक साथ अपना भोजन आपस में बांटते ...
14/12/2020

सरिस्का की दुर्लभ घटना...
बहुत ही दुर्लभ क्षण
बहुत ही कम देखा जाता है कि एक जरख और बघेरा एक साथ अपना भोजन आपस में बांटते हुए।
Pc:- aman bhatia

अलवर का बाला किला एक बहुत बड़ा किला है और इसे बाला किला के नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ है 'युवा किला'। 300 मीटर खड...
07/12/2020

अलवर का बाला किला एक बहुत बड़ा किला है और इसे बाला किला के नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ है 'युवा किला'। 300 मीटर खड़ी चट्टानों के शीर्ष पर स्थित अलवर किला अलवर शहर के सामने सीना तान कर खड़ा हुआ है।पूर्व में 10 वी शताब्दी में यह निकुम्भ राजपूतों के पास था जिनके राजा का नाम अलगू राय था। यहां नर बलि की प्रथा प्रचलित थी। बाद में यह किला अलावल खान द्वारा निकुम्भ राजपूतों से छीन लिया गया। यह किला 1550 ADAwar में हसन खान मेवाती द्वारा जीर्णोद्धार करवाया गया है और यह 5 किमी लंबा और 1.5 किमी चौड़ा है और इसमें छह ऐतिहासिक प्रवेश द्वार हैं - चांद पोल, सूरज पाल (भरतपुर के राजा सूरज मल के नाम पर), जय पोल, किशन पोल, अंधेरी पोल और लक्ष्मण पोल। किंवदंतियों का कहना है कि अलवर राज्य के संस्थापक प्रताप सिंह ने पूर्व मेंलक्ष्मण पोल के माध्यम से किले में प्रवेश किया। लक्ष्मण पोल एकमात्र मैटेल्ड सड़क है जो शहर और किले को जोड़ती है। अभी वह रास्ता जर्जर हो चुका है। तथा जयपोल के माध्यम से सड़क का रास्ता है।जो कि शहर और किले को जोड़ता है।हसन खान मेवाती ने 1551 ईस्वी में बाला किला का जीर्णोद्धार किया था। उसके बाद, अलवर किले पर मुगलों, मराठों और जाटों का शासन था।

अंत में, 1775 में ए डी। कछवाहा राजपूत प्रताप सिंह ने इस पर कब्जा कर लिया और इसके पास अलवर शहर की नींव रखी। मुगल बादशाह बाबर ने किले में एक रात बिताई थी, जबकि जहाँगीर निर्वासन काल के दौरान तीन साल तक रहे थे और उस समय उन्होंने इसका नाम सलीम महल रखा था। अलवर किला राजस्थान में सबसे बड़े किलों में गिना जाता है जो 5 किलोमीटर की सीमा में फैला है । किले में 6 प्रवेश द्वार हैं और पोल के नाम से जाना जाता है।

किले के 6 द्वार चांद पोल, सूरज पोल, कृष्णा पोल, लक्ष्मण पोल, अंधेरी गेट, और जय पोल हैं। इनमें से प्रत्येक द्वार का नाम कुछ शासकों के नाम पर रखा गया है और उनकी शिष्टता को बयान करता है।

किले को एक शैली में बनाया गया है और किले की दीवारों में सुंदर नक्काशी और मूर्तियां हैं।

इन खूबसूरत नक्काशी के अलावा, किले में सूरज कुंड, सलीम सागर तालाब, जय महल और निकुंभ महल (जर्जर अवस्था में) जैसी कई अन्य उल्लेखनीय इमारतें भी हैं। सड़क: अलवर किला, अलवर शहर के पश्चिम में बाला किला स्थित है, जो कुछ ही दूरी पर स्थित है। का 7 कि.मी. रिक्शा या बस से पैदल चलकर (पहले अनुमति लें) लेकर यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।

रेल द्वारा: अलवर किला निकटतम अलवर रेलवे स्टेशन के माध्यम से दिल्ली, आगरा, मुंबई, चेन्नई, बीकानेर, पाली, जयपुर, अहमदाबाद जैसे प्रमुख शहरों रेलवे स्टेशनों से जुड़ा हुआ है।

हवाई मार्ग द्वारा: अलवर किले को निकटतम जयपुर हवाई अड्डे (157 किमी) और आईजीआई दिल्ली हवाई अड्डे (147 किमी) के माध्यम से पहुँचा जा सकता है जो दिल्ली, मुंबई के लिए नियमित घरेलू उड़ानों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

अलवर किला जानकारी

अलवर किला बाला किला समय: सुबह 10 बजे

नोट:- यह किला पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है।

Welcome to Alwar
06/12/2020

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05/12/2020

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