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या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥📖 अर्थ:जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति (ऊर्...
26/03/2026

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
📖 अर्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति (ऊर्जा) के रूप में विराजमान हैं,
उन देवी को बार-बार नमस्कार है 🙏

25/03/2026
25/03/2026

🔹 5. श्लोक (2.50)
संस्कृत:
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्॥
अर्थ:
समझदारी से किया गया कर्म अच्छा और बुरा दोनों फल छोड़ देता है।
इसलिए योग (संतुलित कर्म) करो — यही कर्म में कुशलता है।

25/03/2026

4. श्लोक (2.47) 👉 सबसे प्रसिद्ध
संस्कृत:
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अर्थ:
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल पर नहीं।
इसलिए कर्म करो, लेकिन फल की चिंता मत करो।

25/03/2026

3. श्लोक (2.20)
संस्कृत:
न जायते म्रियते वा कदाचिन्
नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥
अर्थ:
आत्मा न कभी जन्म लेती है, न मरती है। यह अजर-अमर और हमेशा रहने वाली है। शरीर के नष्ट होने पर भी आत्मा नष्ट नहीं होती।

25/03/2026

2. श्लोक (2.13)
संस्कृत:
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा।
तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति॥
अर्थ:
जैसे शरीर में बचपन, युवावस्था और बुढ़ापा आता है, वैसे ही आत्मा एक शरीर छोड़कर दूसरे शरीर में जाती है। समझदार व्यक्ति इससे भ्रमित नहीं होता।

25/03/2026

1. श्लोक (2.11)
संस्कृत:
अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे।
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः॥
अर्थ:
तुम जिनके लिए शोक कर रहे हो, वे शोक करने योग्य नहीं हैं। ज्ञानी व्यक्ति जीवित या मृत किसी के लिए शोक नहीं करते।

24/03/2026

धर्म नगरी आरंग में बड़े ही धूमधाम से हिन्दू नव वर्ष मनाया गया श्री महाकाल की झांकी सभी लोगो का मनमोह ली

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