Balaghat Tourism Promotion Council

Balaghat Tourism Promotion Council To exploit the tourism potential of district through sustained efforts
by coordinating various government departments & voluntary agencies.

*सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व* — लालबर्रा, जिला बालाघाट, मध्य प्रदेश📍 स्थानसोनेवानी (Sonewani) एक प्राकृतिक वन्य क्षेत्र है...
23/02/2026

*सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व* — लालबर्रा, जिला बालाघाट, मध्य प्रदेश

📍 स्थान
सोनेवानी (Sonewani) एक प्राकृतिक वन्य क्षेत्र है, जो लालबर्रा तहसील, बालाघाट जिला, मध्य प्रदेश में स्थित है। यह गांव और जंगल क्षेत्र बालाघाट शहर से लगभग 20–40 किलोमीटर की दूरी पर है और इसका पिन कोड 481441 है।

🌿 कंजर्वेशन रिजर्व का दर्जा
मध्य प्रदेश राज्य वन्यप्राणी बोर्ड ने सोनेवानी वन क्षेत्र को “सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व” के रूप में घोषित किया है। इस निर्णय का उद्देश्य क्षेत्र की जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन को सुरक्षित करना है।

📏 क्षेत्रफल और महत्व

रिजर्व लगभग 163.195 वर्ग किमी (16319.58 हेक्टेयर) में फैला है।

यह क्षेत्र पेंच और कान्हा टाइगर रिज़र्व के बीच एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक कॉरिडोर के रूप में काम करता है, जिससे बाघ, हिरण और अन्य वन्यजीवों को मुक्त विचरण का मार्ग मिलता है।

🐅 वन्यजीव और प्राकृतिक विशेषताएँ

सोनेवानी में टाइगर, तेंदुआ, हिरण, पक्षी तथा अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं, और बाघ तथा उसके शावकों के दर्शन भी आसानी से हो जाते है!

क्षेत्र में कई स्थायी तालाब, सर्राटी नदी का जल स्रोत, सघन बांस और सागौन का जंगल है, जो अच्छे आवास और पानी की सुविधा प्रदान करता है।

🌍 पारिस्थितिकी और संरक्षण

सोनेवानी का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरण-मैत्री पर्यटन को बढ़ावा देना भी है।

यह रिजर्व मध्य भारत के ईको-लॉजिस्टिक सर्कल (एक पारिस्थितिक चक्र) का केंद्र है, जो कई अभयारण्यों और टाइगर रिज़र्व को जोड़ता है।

🚗 कैसे पहुंचें

हवाई मार्ग: नजदीकी हवाई अड्डे जबलपुर , नागपुर और गोंदिया हैं।

रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन बालाघाट जंक्शन है।

सड़क मार्ग: बालाघाट से लगभग 40 किमी की दूरी पर स्थित।

📌 भ्रमण का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से जून तक का मौसम सोनेवानी के जंगल को देखने और सफारी के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

#सोनेवानी

22/02/2026

“गोदना – बैगा महिलाओं की जीवित पहचान”

मध्यप्रदेश के घने जंगलों में, साल और सागौन की खुशबू के बीच, बैगा जनजाति की महिलाएँ सिर्फ धरती से नहीं, अपनी परंपराओं से भी जुड़ी होती हैं। उनके शरीर पर बने गोदना (टैटू) सिर्फ सजावट नहीं होते… वो उनकी पहचान, आस्था और इतिहास की जीवित कहानी होते हैं।
कहते हैं, जब दुनिया में कपड़े, गहने और आभूषण नहीं थे, तब बैगा समाज में एक मान्यता थी –
"सोना-चांदी तो यहीं रह जाएगा, पर गोदना ही आत्मा के साथ जाएगा।"
छोटी-सी उम्र में, जब कोई बैगा लड़की किशोरी होती है, तो उसकी दादी या गाँव की कोई अनुभवी महिला उसके शरीर पर सुई और काजल से गोदना बनाती है। उस समय दर्द जरूर होता है… पर उस दर्द में भी गर्व छुपा होता है।
माँ कहती है – “ये निशान तुम्हें तुम्हारे पूर्वजों से जोड़े रखेंगे।”
हाथों पर बेल-बूटे, पैरों पर जाल की आकृति, गर्दन पर विशेष चिह्न – हर डिजाइन का अपना अर्थ होता है।
कुछ गोदना देवी-देवताओं की कृपा के लिए,
कुछ बुरी नजर से बचाने के लिए,
और कुछ सिर्फ इसलिए… ताकि अगली पीढ़ी अपनी जड़ों को कभी न भूले।
एक बुजुर्ग बैगा महिला की झुर्रियों भरी त्वचा पर बने गोदना जब चमकते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे उसकी पूरी जिंदगी उन रेखाओं में लिखी हो।
उसके हर निशान में बचपन की यादें, विवाह का उत्सव, मातृत्व का सुख और संघर्ष की कहानी छुपी होती है।
आज आधुनिकता की दौड़ में बहुत कुछ बदल रहा है…
पर बैगा महिलाओं के गोदना आज भी चुपचाप ये कहते हैं —
“हम मिटेंगे नहीं, क्योंकि हमारी पहचान हमारी त्वचा पर लिखी है।”
ये सिर्फ स्याही के निशान नहीं,
ये इतिहास की सांसें हैं…
जो हर बैगा महिला के शरीर पर धड़कती रहती हैं।

शिव विवाह से तांडव तक: कोटेश्वर धाम लांजी में सजी कला और आस्था की भावमयी संध्याकोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में लोक-भक्ति...
16/02/2026

शिव विवाह से तांडव तक: कोटेश्वर धाम लांजी में सजी कला और आस्था की भावमयी संध्या

कोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में लोक-भक्ति गायन एवं नृत्य नाटिका की मनोहारी प्रस्तुतियाँ

संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिले के लांजी स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में “महादेव महोत्सव” का भव्य आयोजन किया गया। जिला प्रशासन बालाघाट के सहयोग से आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में शिव-शक्ति की विविध कलात्मक अभिव्यक्तियाँ एक मंच पर साकार हुईं। शिव विवाह से लेकर तांडव और मोक्ष तक की आध्यात्मिक यात्रा को लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया गया। पूरा मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और कला के सुरम्य संगम से आलोकित हो उठा।

कार्यक्रम की शुरुआत छतरपुर के लोकगायक श्री रामसिंह राय के मधुर लोकगायन से हुई। उन्होंने “करवे सब की खबरिया कोटेश्वर बाबा भोलेनाथ जी...” से मंगलाचरण करते हुए वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। इसके बाद “शिव शंकर दूल्हा बन आये, नोनी बनी बारात चलो देखने चलिए...” गीत के माध्यम से शिव विवाह की रम्य छटा का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया। “दूल्हा आओ पैलू पैल बैल चढ़ के लांगुरिया...” और राई गीत “कोटेश्वर महादेव आये शरण में तुम्हारी...” ने लोकजीवन की चंचलता और श्रद्धा का सुंदर समावेश किया। गारी गीत “उठो रानी तनक तो झांक लो...” तथा “मोरी सुनियो सुनैना के दामाद जी...” के माध्यम से विवाहोत्सव की पारंपरिक रस्मों और लोकहास्य की झलक दिखाई गई। अंतिम प्रस्तुति “बन्ना जी देखे पेलू पैल बैल पर झूमत आवे जू...” के साथ संपन्न हुई, जिसने दर्शकों को उल्लास और भक्ति के भाव से भर दिया।

इसके पश्चात भोपाल की सुश्री वीथिका मिस्त्री एवं उनके दल ने ओडिसी नृत्य पर आधारित नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर शिव कथा को सजीव कर दिया। प्रस्तुति का आरंभ मंगलाचरण से हुआ, जिसमें लंकापति रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र “जटाटवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले…” पर प्रभावशाली नृत्य संयोजन प्रस्तुत किया गया। इस रचना का निर्माण पद्मविभूषण गुरु केलुचरण महापात्र द्वारा तथा संगीत संयोजन पंडित भुवनेश्वर मिश्रा द्वारा किया गया है। एकताल में निबद्ध इस प्रस्तुति ने शिव के जटाजूट से प्रवाहित गंगा, मस्तक पर अर्धचंद्र और प्रचंड तांडव की छवि को प्रभावपूर्ण ढंग से उकेरा।

दूसरी प्रस्तुति ‘बोटु’ की रही, जो बट्टुकेश्वर भैरव को समर्पित शुद्ध नृत्य रचना है। इसमें ताल, लय और शारीरिक गतियों के माध्यम से मंदिर की मूर्तिकला और वाद्य यंत्रों की अभिव्यक्ति की गई। राग भूपाली और एकताल में निबद्ध इस प्रस्तुति ने ओडिसी नृत्य परंपरा की गंभीरता और सौंदर्य को प्रकट किया। नाट्यशास्त्र की परंपरा के अनुसार शिव द्वारा तांडु को प्रदान किए गए नृत्य तत्वों की झलक इसमें दृष्टिगोचर हुई। अंतिम प्रस्तुति ‘मोक्ष’ नृत्य की रही, जो देवी नारायणी स्वरूप पर आधारित थी। राग बागेश्री में प्रस्तुत इस नृत्य में साधना, समर्पण और ईश्वर में लीन होने की भावना को अभिव्यक्त किया गया। “ध्येयते वर्णे वर्णिमां त्रिनेत्रे चारु हासिनीम्…” श्लोक पर आधारित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को आध्यात्मिक चिंतन की अनुभूति कराई।

समारोह की अंतिम कड़ी में जबलपुर के गायक ईशान मिनोचा एवं उनके साथियों ने भक्ति गायन प्रस्तुत किया। गणेश वंदना से आरंभ हुई प्रस्तुति में “महाकाल की बस्ती…”, “ॐ नमः शिवाय…”, “मेरा भोला है भंडारी…”, “भांग तेरी शिव नाथ जी…”, “भोले का दीवाना…” और “उठा के कांवड़ चले रे कांवड़िये…” जैसे भजनों ने पूरे परिसर को शिवमय बना दिया। इस प्रकार कोटेश्वर धाम में आयोजित महादेव महोत्सव ने लोक परंपरा, शास्त्रीय नृत्य और भक्ति संगीत की त्रिवेणी के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक एकत्व का अद्भुत अनुभव कराया। कार्यक्रम ने न केवल कला के विविध आयामों को मंच प्रदान किया, बल्कि शिव भक्ति की गहन अनुभूति से समूचे वातावरण को आलोकित कर दिया।

15/02/2026
15/02/2026
15/02/2026

15 फरवरी को लांजी में महादेव महोत्सव का होगा आयोजन

कोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में होंगी लोक-भक्ति गायन एवं नृत्य नाटिका की प्रस्तुतियाँ

संस्कृति विभाग, म.प्र. शासन द्वारा बालाघाट जिले के लांजी स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में शिव-सत्य की कला अभिव्यक्तियों पर एकाग्र “महादेव महोत्सव” का आयोजन 15 फरवरी, 2026 को सायं 6.30 बजे से किया जाएगा। समारोह में शिव केंद्रित नृत्य नाटिका, लोक गायन एवं भक्ति गायन की प्रस्तुतियाँ संयोजित की जाएंगी। यह आयोजन शिवभक्ति, लोक परम्परा और शास्त्रीय–सुगम कलाओं के सुरम्य संगम के रूप में श्रद्धा और भक्ति की एक अनुपम संध्या रचेगा। संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन बालाघाट के सहयोग से यह आयोजन किया जाएगा।

लोक सुरों की मधुर धारा में छतरपुर के श्री रामसिंह राय अपने लोक गायन से मंदिर की पावन धरा पर सांस्कृतिक चेतना का दीप प्रज्वलित करेंगे। इसके पश्चात भोपाल की विधिका मिष्ठी की आदिदेव भगवान शिव पर केंद्रित भावप्रवण प्रस्तुति होगी, जिसमें नृत्य नाटिका के माध्यम से कलाकार शिव कथा को जीवंत करेंगे। समारोह की अंतिम कड़ी में जबलपुर के ईशान मिनोचा एवं साथी कलाकार भक्ति गायन की प्रस्तुति देंगे, जिनके स्वरों में रची शिव-आराधना वातावरण को आध्यात्मिक भाव विभोरता से आलोकित करेगी।

15 फरवरी को लांजी में महादेव महोत्सव का होगा आयोजनकोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में होंगी लोक-भक्ति गायन एवं नृत्य नाटिका ...
03/02/2026

15 फरवरी को लांजी में महादेव महोत्सव का होगा आयोजन

कोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में होंगी लोक-भक्ति गायन एवं नृत्य नाटिका की प्रस्तुतियाँ

संस्कृति विभाग, म.प्र. शासन द्वारा बालाघाट जिले के लांजी स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में शिव-सत्य की कला अभिव्यक्तियों पर एकाग्र “महादेव महोत्सव” का आयोजन 15 फरवरी, 2026 को सायं 6.30 बजे से किया जाएगा। समारोह में शिव केंद्रित नृत्य नाटिका, लोक गायन एवं भक्ति गायन की प्रस्तुतियाँ संयोजित की जाएंगी। यह आयोजन शिवभक्ति, लोक परम्परा और शास्त्रीय–सुगम कलाओं के सुरम्य संगम के रूप में श्रद्धा और भक्ति की एक अनुपम संध्या रचेगा। संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन बालाघाट के सहयोग से यह आयोजन किया जाएगा।

लोक सुरों की मधुर धारा में छतरपुर के श्री रामसिंह राय अपने लोक गायन से मंदिर की पावन धरा पर सांस्कृतिक चेतना का दीप प्रज्वलित करेंगे। इसके पश्चात भोपाल की विधिका मिष्ठी की आदिदेव भगवान शिव पर केंद्रित भावप्रवण प्रस्तुति होगी, जिसमें नृत्य नाटिका के माध्यम से कलाकार शिव कथा को जीवंत करेंगे। समारोह की अंतिम कड़ी में जबलपुर के ईशान मिनोचा एवं साथी कलाकार भक्ति गायन की प्रस्तुति देंगे, जिनके स्वरों में रची शिव-आराधना वातावरण को आध्यात्मिक भाव विभोरता से आलोकित करेगी।

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