Lucknow Barabanki Adventure Club

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Khaliya Top, just 8 kms hike away has 360 degree views of the region. Nanda Devi, Panchchuli are the most prominent peak...
31/01/2018

Khaliya Top, just 8 kms hike away has 360 degree views of the region. Nanda Devi, Panchchuli are the most prominent peaks that you can see from the top.

Munsiyari Vilage, Pithoragarh Distt. in Kumaon region. Uttarakhand.

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30/01/2018

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31/12/2017

कुमाऊँ यात्रा : बिनसार, मुंसियारी : 2010बात है नवंबर २०१० की. छुट्टी के लिए तो दफ्तर में पहले से बोल रखा था मगर बैंक खात...
23/12/2017

कुमाऊँ यात्रा : बिनसार, मुंसियारी : 2010

बात है नवंबर २०१० की. छुट्टी के लिए तो दफ्तर में पहले से बोल रखा था मगर बैंक खाते को ये बात नागवार लग रही थी आखिर महीना ख़तम होने को था. मगर हम भी धुन के पक्के थे, एक मित्र से ५००० उधर लिए और निकल पड़े, क्योंकि मौके बार बार तो मिलते नहीं.

पहला व दूसरा दिन (२५ नवंबर):
योजना तो सुबह ३ बजे शुरू करने की थी मगर ठीक उसी रात हमारे एक ख़ास मित्र की विदाई पार्टी होनी थी जो रात को २ बजे तक चली. खैर जैसे तैसे सुवह दस बजे हम (मैं अकेला ही था मगर लखनऊ वाले अपने आप को सम्मान से 'हम' बोलते हैं ) पंचकूला से रवाना हुए और पंचकूला, अम्बाला, यमुना नगर, हरिद्वार, नजीबाबाद, धामपुर होते हुए शाम ६ बजे तक ३८० किमी पूरा करके काशीपुर में रुकना हो पाया। शुरू का आधा रास्ता तो अच्छा था मगर बाद का बहुत ही ख़राब. काफी ऊबड़ खाबड़ और धुल धक्कड़ से भरा था। काशीपुर जिम कॉर्बेट पार्क के पास ही है। मन तो बिनसर की वादियां और पंचचूली की चोटियों के सपने देख रहा था मगर घुमक्कड़ दिल कह रहा था की जिम कॉर्बेट भी देखते चलो, जैसे तैसे दिल पर पत्थर रखकर हम बिनसर की तरफ बढे ये सोचकर की जिम कॉर्बेट तो २-३ दिन की छुट्टियों में भी कर सकते हैं.

चाहते तो हम काशीपुर से नैनीताल वाला आसान रास्ता पकड़ कर चुपचाप बिनसर पहुंच सकते थे मगर खोजी कीड़ा कहाँ मानने वाला था, धानगढ़ी पार करते ही २-३ लोकल लोगों से गुफ्तगू की और निकल पड़े अंदर वाले रास्तो पर जो की बेतालघाट होकर जाता था। खैर ये निर्णय बहुत ही मनोरम निकला जो मुझे आगे जाकर पता चला। पता नहीं क्यों मुझे रास्ते जितने मुश्किल हो सफर उतना ही अच्छा लगता है।

शायद १५ रूपये की पर्ची लेकर बिनसर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के गेट के अंदर पहुंचे। वह पहुंचकर पता चला की रुकने के विकल्प बहुत काम हैं, १-२ महंगे रिसोर्ट या फिर के एम् वी एन का गेस्ट हाउस। मगर किस्मत से गोपाल जी जो एक छोटी सी किराने की दुकान चलते हैं वहां पर उनके पास एक कमरा था सो हमने वही रुकने का निर्णय लिया। ५०० रूपये में बिस्तर, रजाई और खाना पीना सबकुछ हो गया। बिनसर उद्यान से हिमालय की चोटियों का नज़ारा बहुत ही शानदार है, और वन्य जीवन और पछियो की फोटोग्राफी के साथ साथ इस बात के लिए बिनसार खास प्रसिद्ध है। रात को हमने शुद्ध कुमाऊनी खाना खाया और गोपाल जी तथा उनके एक मित्र के साथ लम्बी लम्बी बातें की।

तीसरा दिन:
सूर्योदय का नज़ारा देखने के लिए मैं सुबह सुबह जीरो पॉइंट की तरफ भागा किन्तु आस्मां साफ़ न होने की वजह से थोड़ी निराशा हुई मगर अनुभव फिर भी अद्भुत था। ठीक वैसा ही जैसे शीट ऋतू में हम अपने गाँव में सुबह रजाई छोड़कर सर्दी की सुगंध लेते हुए सीधा आग की तरफ भागते थे। कैमरे की बैटरी ने ऐन वक़्त पर धोखा दे दिया इसलिए तस्वीरें नहीं ले पाया।

खैर वापस गोपाल जी के यहाँ राजमा चावल खाकर हम चले मुंसियारी की तरफ। उम्मीद के विपरीत लगभग पूरा रास्ता काफी अच्छा था और मैं अपनी फटफटी कभी बालकनी जैसी सड़क पर जिसके एक तरफ हिमाच्छादित चोटियां थी तो कभी चीड़ और देवदार के घनघोर जंगलो को भेदती हुई टेढ़ी मेढ़ी सड़क पर दौड़ा रहा था। कभी तो मैं एक छत जैसी सड़क पर होता जिसके दोनों तरफ पहाड़ी खेत और घर थे तो कभी बहुत ही तंग पहाड़ियों से गुजर रहा था जहा दोपहर में भी सूरज की किरणे अपना रास्ता नहीं तलाश प् रही थी।

अंततः बागेश्वर, कंडा, चौकोरी, उडियारी बेंड, थल, नाचनी और बिर्थी होते हुए २२० किमी का सफर तय किया और शाम साढ़े छह बजे मुंसियारी पहुंचे।

देर तो पहले ही हो चुकी थी और मैं पहुंच भी सीधा के एम् वी एन के गेस्ट हाउस जिनके पास १५०० के काम का कमरा ही नहीं था, खैर 180 रूपये में डारमेट्री लिया मगर किस्मत बुलंदी पर थी और आधे घंटे बाद ही मैनेजर ने मुझे उसी दाम में पूरा कमरा दे दिया और भी पंचचूली के मनोरम दृश्य वाला। फिर क्या था, एक थाली खाई और सो गए। दिन सिर्फ दो बचे थे और वह पहुंचकर पता चला की ८ किमी का खलिया टॉप का ट्रेक भी है। यानि की एक दिन तो पूरा सिर्फ ट्रेक के लिए चाहिए। खैर फ़िलहाल तो नींद पूरी करना बहुत महत्त्वपूर्ण था।

आगे क्या हुआ सुबह उठकर ही पता चलेगा। वैसे भी यह लेख उम्मीद से काफी लम्बा हो गया है। इसके लिए क्षमा चाहूंगा।

चौथा दिन:
सुबह उठकर गेस्ट हाउस के मैनेजर से थोड़ी गुफ्तगू हुई और यह निर्णय लिया गया की हम (मैं) खलिया टॉप जायेंगे और ऑफिस में एक और दिन का बिन योजना अवकाश लेंगे। वैसे भी गत वर्ष के गौमुख ट्रेक से ये ज्ञात हो चूका था की पहाड़ों का असली मज़ा लेना है तो ट्रेक जरूर करना चाहिए। फिर क्या था एक गाइड लिया, सब्जी पराठे बांधे और निकल पड़े हम उस पहाड़ को चढ़ने। शुरू का २-३ किमी का रास्ता बाइक पर किया फिर सड़क के किनारे कड़ी करके ट्रेक शुरू किया। सबसे पहले घने जंगल को पार किया फिर लगभग २-४ किमी के बाद पेड़ छोटे होकर झाड़ियों में बदलने लगे। आखरी के २ किमी तो सिर्फ घास का मैदान ही था। पहाड़ों में सर्दियों का आगाज़ हो चुका था इसलिए घास भी हरी से भूरी हो चुकी थी मगर आस्मां काफी साफ़ था और चारों ओर की पहाड़िया और चोटियाँ दूर दूर तक साफ़ नज़र आ रही थी। काश ये तस्वीरें उस दृश्य की बराबरी कर सकतीं।

पहाड़ो के छाँव वाली तरफ की बर्फ थोड़ी ही सही मगर उस ट्रेक के आनंद को परिपूर्ण कर रही थी। बीच में कुछ एक खतरनाक भाग भी थे मगर हौसले से ज्यादा नहीं। टॉप तक पहुंचते पहुंचते दोपहर हो चुकी थी इसलिए ज्यादा वक़्त न गुजरकर जल्दी जल्दी कुछ तस्वीरें खींची और वापस चल पड़े ताकि शाम ढलने से पहले होटल पहुंच सके. लगभग चार बजे हम वापस होटल पहुंचे और थोड़ा चाय नाश्ता करके निकल गए हेलिपैड की तरफ ताकि सूर्योदय का नज़ारा ले सके। वापस आकर होटेक स्टाफ के साथ अलाव का लुत्फ़ उठाया और खाना खा के सो गए.

पांचवा और छठा दिन:
पांचवा दिन बहुत ख़ास तो नहीं था मगर मोटरसाइकिल यात्रा बहुत ही शानदार रही। बैजनाथ, कौसानी, सोमेश्वर, बीनता, गागस, रानीखेत, भतरौंजखान, धानगढ़ी, रामनगर, काशीपुर से होते हुए लगभग ४०० किमी की यात्रा पूरी करके मुरादाबाद पहुंचे शाम ८ बजे।

स्टेशन के पास ही एक टूटा फूटा कमरा लेकर सो गए और सुबह ४ बजे ही निकल गए वहाँ से। पंचकूला पहुंचना हुआ लगभा १०-११ बजे मगर इतनी शानदार यात्रा के बाद ऑफिस जाने का आईडिया कुछ जमा नहीं, इसलिए दाल मखनी और नान खायी और सो गए। 😎

बाकी की तस्वीरें आप मेरे फेसबुक प्रोफाइल में देख सकते है
http://www.facebook.com/RanjeetSinghIndia

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24/11/2017

A note of thanks to our clients who booked complete package with us in the past.

The offer sent and now we are waiting to host them at our beautiful cottage Latoda Hut at the fairyland JIBHI.

The monk always pays back :)

4x4 Extreme Adventure Trip to Spiti Valley.Caution: School Kids, Keep Away.
10/09/2017

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Caution: School Kids, Keep Away.

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Caution: School Kids, Keep Away.

More details: www.TheHimalayanMonk.com

09/09/2017
Hidden gems of Himalayas.Visit this place.Stay at Latoda Hut
06/09/2017

Hidden gems of Himalayas.

Visit this place.
Stay at Latoda Hut

Just a 30 mins. diversion from near the Aut tunnel on Manali Highway, Shringa Rishi Temple is situated near Jibhi village in Kullu district.

The Shringa Rishi Temple (or Shringi Rishi Temple) is considered very sacred by locals and they believe that this deity is one which protects them. Shringi Rishi is one among the eighteen chief deities of Kullu valley.

This temple is dedicated to sage Rishyasringa, who was the legendary saint of Kashyapa's lineage. Shringi Rishi was great saint of the Ramayana era and his father was saint Vibhandak Rishi. Shringi Rishi performed Putrakameshti Yagna for King Dashrath of Ayodhya, after that Lord Rama and his three brothers were born. Shringi Rishi is the ruling deity of Banjar valley. Here Rishi is popularly known as Skirni Deo. This temple has been reconstructed in 2008.

Once a year, in the month of May, thousands of pilgrims come here every year to pay homage to Lord Shringa. During rest of the year the place remains inaccessible due to thickly covered snow.

This place needs a short walk for 10 minutes from the main road.



Photo by: Manish Dwivedi

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Naka Satrikh
Barabanki
225001

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