18/05/2026
मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने वाली है। कांग्रेस अब 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार जल्द ही पूरे मध्यप्रदेश में एक विशाल और ऐतिहासिक पदयात्रा की शुरुआत होने जा रही है, जिसे कांग्रेस नेतृत्व का सबसे बड़ा जनसंपर्क अभियान माना जा रहा है। इस यात्रा में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे, वहीं सबसे बड़ा आकर्षण रहेंगे Rahul Gandhi, जिनके आने की चर्चा ने कार्यकर्ताओं में अभी से नया उत्साह भर दिया है।
बताया जा रहा है कि यह पदयात्रा तीन चरणों में निकाली जाएगी और इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि प्रदेश की हर विधानसभा तक पहुँचकर जनता की वास्तविक समस्याओं को समझना होगा। कांग्रेस इस बार केवल चुनावी भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि गांव-गांव, कस्बों और शहरों में सीधे जनता से संवाद कर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
सूत्रों की मानें तो यात्रा का पहला चरण उन क्षेत्रों पर केंद्रित होगा जहाँ किसान, बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे सबसे ज्यादा प्रभाव डाल रहे हैं। दूसरा चरण आदिवासी और पिछड़े इलाकों में जाएगा, जहाँ कांग्रेस भाजपा सरकार पर उपेक्षा के आरोप लगाते हुए जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। तीसरे चरण में बड़े शहरों और राजनीतिक रूप से निर्णायक विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा।
कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मध्यप्रदेश में जनता के बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है। किसान फसल के दाम को लेकर परेशान हैं, युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं और महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। ऐसे में कांग्रेस इस पदयात्रा के जरिए जनता की आवाज़ को सड़क से विधानसभा तक ले जाने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह यात्रा केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं होगी, बल्कि 2028 के चुनावी युद्ध का शुरुआती बिगुल साबित हो सकती है। पिछले कुछ समय से कांग्रेस लगातार बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने में जुटी हुई है। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक, हर स्तर पर रणनीति बनाई जा रही है ताकि भाजपा को सीधी चुनौती दी जा सके।
इस यात्रा में प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी आगे लाने की योजना है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि कांग्रेस केवल पुराने नारों के सहारे नहीं, बल्कि नई सोच और नए नेतृत्व के साथ जनता के बीच उतर रही है। खास बात यह भी है कि यात्रा के दौरान हर विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय मुद्दों पर अलग-अलग बैठकें और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कांग्रेस के भीतर इसे “जनता के बीच वापसी अभियान” के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सत्ता केवल सोशल मीडिया या बड़े विज्ञापनों से नहीं मिलती, बल्कि जनता के दुख-दर्द में साथ खड़े होने से मिलती है। यही कारण है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी पदयात्रा को बड़ा जनआंदोलन बनाने की तैयारी की जा रही है।
यदि यह यात्रा सफल होती है तो आने वाले समय में मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कांग्रेस अभी से 2028 की लड़ाई को लेकर जिस तरह मैदान में उतरती दिखाई दे रही है, उसने भाजपा की राजनीतिक चिंता बढ़ा दी है। आने वाले महीनों में यह पदयात्रा प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन सकती है, क्योंकि कांग्रेस अब केवल विपक्ष की भूमिका में नहीं, बल्कि सत्ता में वापसी के संकल्प के साथ आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।