Mularam siyag khariya khurad Barmer

Mularam siyag khariya khurad Barmer मानव सेवा सबसे बङी सेवा गौ सेवा सबसे बङी सेवा मा बाप की सैवा सबसे बङी सेवा

17/08/2025

वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से सत्यता आधारित पूर्ण जोश, मनोयोग के साथ , बेझिझक उद्बोधन समाज की इस बालिका के द्वारा समाजहित के लिए कड़ा संदेश सभी को सुधार अपने अपने घर से अविलंब कर देना चाहिए सभी भाइयों और बहनों को शेयर अवश्य करें 🇮🇳🙏🙏🇮🇳

27/06/2025

Betiyo ke chanshkar 👍👏

13/06/2025

रोहिणी तपे,मृग बाजे,कुछ कुछ आर्द्रा जाय।
घाघ कहे सुण भड्डरी, श्वान भात नहीं खाय।।
महा कवि घाघ अपनी पत्नी (भड्डरी) से कहते हैं कि अगर #रोहिणी नक्षत्र में जोरदार तपन काल रहता है और #मृगशिरा नक्षत्र में जोरदार आँधियाँ चले तथा #आर्द्रा नक्षत्र के कुछ दिन बीतने पर अगर बरसात होती है तो इतना अच्छा जमाना(सुकाल)आता है कि मनुष्य तो क्या श्वान(कुत्ता)भी भूखा नहीं रहता है।

तीतर वरणी बादली, विधवा वरणी रेख।
वा बरसे वा घर(घरवास)करे,इणमें मीन मेख।।

रोहिण तपे मिर्ग बाजे, आद्रा अनचितीया गाजे।

रोहिणी नक्षत्र के बाद सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करता है। रोहिणी इस वर्ष 25 मई से 8 जून तक रहा हैं। मृगशिरा 8 जून से 23 जून तक हैं। इसमें "तपन काल" बंद हो कर आँधियों का दौर शुरू होना चाहिए।
✨️मृगशिरा नक्षत्र के पहले दो दिन आँधी नहीं चलती है तो मूसा(चूहों)का बाहुल्य रहता हैं।।(9-10जून)
✨️अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर कातरा(फसल को खाने वाला कीट)का प्रकोप रहेगा।(11-12जून)
✨️अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर तीडी(टिड्डी)का प्रकोप रहता है।(13-14जून)
✨️अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर ताव(बुखार) ज्यादा चलेगा।(15-16जून)
✨️अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर जल हरण(जल की कमी)रहती है।(17-18जून)
✨️अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर विषवर (साँप-बिच्छू) का प्रकोप रहता है।(19-20जून)
✨️ अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर वस्तुओं के भाव (कीमतें) बढ़ती है।(21-22जून)
✨️ 23 जून को विकलांग वाला खोडिया मृग हैं।
कहने का मतलब है कि पूरे मृगशिरा नक्षत्र मे हवा चलती रहनी चाहिए। हवा घुटनी नहीं चाहिए।
"दो मूसा, दो कातरा, दो तीडी, दो ताव।
दो की बाजी जल हरे, दो विषवर,दो भाव।।"
यह भी कहा है....
"दो तीडी, दो कातरा, दो मूसा, दो ताव।
दो झोला, दो झांझली,दो घटावे भाव।।"

रोहिणी बाजे,मृग तपे ।
तो गैहला हाली क्यूँ पचे।।
"खोड़ियो मृग अभूम्मो जाय।
सावण रा दिन सतरा जाय।।"
यानी अगर इस दिन भी आँधी नहीं चली तो सावण मास के सतरह दिन बीतने तक वर्षा की संभावना नहीं रहेगी।

आगे आर्द्रा में बरसात हो जाए और सिन्ध व मारवाड़ में बाजरा समय पर बौने का मौका मिल जाए तो बाजरी का जबरदस्त उत्पादन होता हैं।

"आर्द्र बूठी भा अर ऊभी झौला खा।"
यानि आर्द्रों में बाजरी बो दी जाय तो वह लहलहाती हुई झोला खाती हुई बढती हैं।

इसके आधार पर इस वर्ष बाजरे की बुआई के सबसे अनुकूल दिन 24 जून से 8 जुलाई तक हैं।

उत्तम स्वास्थ्य की चाभी है उपवास~~~~~~~~~~~~~~~~~~~भोजन की अधिकता एवं अनियमितता से बने शरीर में विजातीय द्रव्य एवं विषाक...
06/06/2025

उत्तम स्वास्थ्य की चाभी है उपवास
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भोजन की अधिकता एवं अनियमितता से बने शरीर में विजातीय द्रव्य एवं विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का प्रभावशाली उपाय है-उपवास। स्वास्थ्य को बनाए रखने, पाचन संस्थानों में आई खराबी को दूर करने तथा आँतों को पुनः सबल बनाने के लिए उपवास का कम महत्व नहीं है।
उपवास का अर्थ उप+वास- पास में रहना अर्थात् स्वस्थ, नीरोग जीवन के निकट रहना। उपवास आन्तरिक शुद्धि एवं आँतों की सफाई का एक सुगम उपाय बताया गया है। धर्म ग्रन्थों एवं पौराणिक कथाओं में भी उपवास के महत्व का प्रतिपादन किया गया है।
उपवास सम्बन्धी आज की हमारी मान्यताएं हास्यास्पद एवं मूर्खतापूर्ण हैं। लोग उपवास के दिन तो अन्य सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक गरिष्ठ एवं मात्रा में भी अधिक, भिन्न-भिन्न प्रकार का मिष्ठान एवं पकवान खाते हैं। उपवास के एक दिन पूर्व से ही भोजन में भिन्नता दिखाई देती है। इसे उपवास न कहकर चटोरेपन की आदत ही कहेंगे, जिससे न तो किसी उद्देश्य की पूर्ति होती है और न स्वास्थ्य पर ही लाभकारी प्रभाव पड़ता है।
जिस प्रकार एक मशीन को लगातार चलते रहने पर कुछ घण्टे आराम की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार अधिक एवं अभक्ष्य भोज्य पदार्थों के खाने के अत्याचार से पीड़ित पेट को आराम देने के लिए आवश्यकता होती है।
पुराने समय के लोग मानसिक एवं शारीरिक दृष्टि से अधिक स्वस्थ रहते थे। इसका कारण उसकी दिनचर्या, उनका खान-पान था। वे दिनभर परिश्रम करते थे तब कहीं उन्हें भोजन की उपलब्धि होती थी। जंगलों की स्वच्छ हवा, ताजे फल एवं सब्जियाँ उन्हें उपभोग हेतु मिलती थीं। पाकशास्त्र आज जैसे विकसित रूप में उस समय नहीं था। इसी कारण उनके भोजन में सादगी एवं सात्विकता होती थी। मिर्च मसाले से युक्त, गरिष्ठ एवं तले-भुने पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता था तथा धर्मानुसार सही ढंग से व्रत एवं उपवास का सही ढंग से पालन किया जाता था। आज की स्थिति सही इसके विपरीत है फलतः आंतें कुछ ही दिनों में कमजोर हो जाती हैं और व्यक्ति अनेक रोगों से घिर जाता है।
उपवास शरीर में बढ़े तथा जमा स्टार्च एवं चर्बी को जिसके कारण शरीर में एसिड की मात्रा कम हो जाती है बाहर निकाल कर शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। साधारणतः व्यक्ति यह समझ लेता है कि शरीर से मल बाहर निकल ही जाता है, भूख लगती ही है तो पेट सम्बन्धी विकार क्यों होने लगा चाहे वह कैसा भी भोजन करे उसे नुकसान नहीं करेगा। परन्तु यह भूल है, जो खाना खाया जाता है उसमें कुछ का रस बनता हैं, खून बनता है, माँस, मज्जा एवं हड्डी का निर्माण होता है और शेष मल-मूत्र के रास्ते से निकल जाता है। परन्तु गरिष्ठ एवं अधिक मात्रा में किये भोजन का कुछ अंश आँतों के चारों ओर चिपक जाता है जो सड़ांद पैदा करता है और रोगों को आमन्त्रित करने का कारण बनता है। उपवास इसी गन्दगी को बाहर निकाल कर पेट एवं आँतों को स्वस्थ रखने में सहायता करता है।
उपवास का अर्थ पेट को पूर्ण आराम देना तथा भोजन का पूर्णतः त्याग देना है। यह साप्ताहिक भी हो सकता है पाक्षिक अथवा मासिक भी जैसी भी स्थिति हो। तथा लम्बी बीमारी एवं रोग को देख कर लगातार क्रम में भी।
उपवास करने के पूर्व संध्या समय भोजन न करके फलों का रस या उबली तरकारी ही लेनी चाहिए। उपवास के दिन काफी मात्रा में जल लेकर 1-2 मील का पैदल चक्कर लगाना चाहिए तत्पश्चात एनीमा लेना चाहिए इससे आन्तरिक सफाई अच्छी प्रकार हो जाती है। कमजोरी महसूस होने पर नीबू या शहद का पान लिया जा सकता है। उस दिन पूरा-पूरा विश्राम करना चाहिए। उपवास के दूसरे दिन बड़ी सावधानी एवं धैर्य से कार्य लेना चाहिए- क्योंकि उपवास के बाद भूख जोर से लगती है इसलिए ऐसा न हो जाए कि एकदम खाने पर टूट पड़ें इससे लाभ की अपेक्षा हानि होने की सम्भावना हो सकती है। दूसरे दिन फलों के रसों से उपवास तोड़ा जाय- दोपहर या संध्या को फल और सादा भोजन, रोटी, दलिया, तथा उबली सब्जियां ली जावें।
लम्बी बीमारी के पश्चात् किये उपवास या दीर्घकालीन उपवासों में योग्य चिकित्सक से परामर्श एवं सहयोग लेना आवश्यक है। जब एकत्रित विजातीय एवं विषैले पदार्थ बाहर निकल जाएँ और पेट साफ हो जाए तो उपवास चालू नहीं रखना चाहिए अन्यथा स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
युग के अनेकों महापुरुष हमेशा उपवासों के समर्थक रहे हैं, तभी वे वृद्धावस्था में भी उतना ही कार्य कर लेते थे जितना कि युवावस्था में। सन्त बिनोवा की जीवनी शक्ति का रहस्य सादगीपूर्ण जीवन एवं उपवास ही है। व्रत एवं उपवास को किस योगी पुरुष एवं धर्म ग्रन्थों ने नहीं सराहा। परन्तु चिकित्सा पद्धति में रोग निवारणार्थ उपवासों का विशेष महत्व है इसे भुलाया नहीं जा सकता है। उपवास प्रणाली को अपनाकर अर्थ भार से तथा रोगों से आसानी से मुक्त हो सकते हैं। औषधियाँ रोगों को जड़-मूल से भगाती नहीं बल्कि उन्हें दबा देती हैं। जबकि उपवास विधि रोगों को उत्पन्न ही नहीं होने देती। दीर्घ एवं स्वास्थ्यपूर्ण सुखी-सम्पन्न जीवन के लिए उपवास के बारे में जितना लिखा जाए थोड़ा है।

22/05/2025

तपे तावड़ो आकरो, तालरिया में ठाठ
समदां उफणी बादळी , खेतां मुळकियो जाट
तपियो आकरो जेठ जद भीग्यो हो आषाढ़
हळियो धरियो कांधै पर #खेतां चालियो जाट
उत्तर दिशा री बादळी नाँखे मोटी छांट
#मोती बरस्या आंगणे राजी हुयो जाट
उगियो धान खेत में धरती खोलिया कपाट
#लूरां लैवे जाटणी , तेजो गावे जाट
मैणत मीठी मतवाळी , गावे चारण भाट
#आशीष देवे आंतरा , जुग जुग जीये जाट
नीं होवे सिर फोड़िया सोलह दूणी आठ
#बुद्धि है बत्तीस गुणा, कर दिखावे जाट
मेड़ी बैठी जाटणी , खेत बिचाळै खाट
कण कण रमै रामजी जद हळियो खड़े जाट
घी घाले जद #जाटणी , मीठी लागे घाट
खाता खायी जीभड़ी , भरपेट जीमै जाट
धरती थारो काळजो, है शंकर रो ललाट
*थारी लाज राखण नै महादेव बणाया जाट*
✍🏽👆 💕हर हर #महादेवजी👏

27/10/2024

Motivation_Line

16/03/2024
11/10/2023

@ बंगाल समुद्र तट

11/10/2023

एक बच्चे ने पूछा कि ट्रक मालिक कौन होता है? जवाब सुनके आप सब रो पड़ोगे।

जवाब-
*जिसने 50 लाख खर्चा किया बिज़नेस के नाम पे

*घर जेवर सब गिरवी रखे बिज़नेस के नाम पे

*जो हर साल 3 लाख का टोल टैक्स देता है

*जो हर साल 2 लाख टैक्स देता है डीजल पे

*जो हर साल 1 लाख टैक्स देता है गाड़ी के समान के लिए (जी०एस०टी)

*जो हर साल 40000 हजार टैक्स देता है रोड के नाम पे

*जो हर साल 24000 हजार देता है परमिट फिटनेस के लिए

*जो हर साल करवाता है 70 हजार का बीमा

* जो हर साल 50000 हजार का इनकम टैक्स देता है

*जिसके दिए हुए लाखों के घुस के पैसे से आर टी ओ और नेताओं के बच्चे लंदन में पढ़ते हैं

*जो अकेला 20 के रोजगार का कारण है

खुदका बीमा नही है उसका कोई।

ड्राइवर तो स्टीयरिंग घुमाता है, ट्रक तो मालिक ही चलाता है।

किसानों के लोन माफ होते हैं। ट्रक मालिक की एक क़िस्त टूटते ही गाड़ी खिंच जाती है।

गाड़ी लड़ गई, गलती बड़ी गाड़ी वाले की।

पेपर गलत बन गया व्यापारी से, जब्त गाड़ी मालिक की गाड़ी होती है।

फिर भी देश मे 1 करोड़ ट्रक मालिक डटे हुए हैं। लेकिन कबतक?

:-- पंकज कुमार सिंह

ये पोस्ट हर गाड़ी मालिक के नाम । ज्यादा से ज्यादा शेयर करें🙏🙏🙏

 #सूर्य मंदिर कोणार्क
10/10/2023

#सूर्य मंदिर कोणार्क

25/09/2023

my lilan GG २५९२

23/08/2023

#पता_नही_मुझे_ऐसा_क्यो_लगता_है?

मैं बाड़मेर को 2002 से बेहतर जानता आ रहा हु।
एक बाड़मेर जिसमे तिलक बस स्टैंड,हॉस्पिटल ओर रेलवे स्टेशन के अलावा फेमस होने में शिव आइसक्रीम,लवली होटल की चाय,दल्लू जी की कचोरी और कुछ मिष्ठान भण्डार।

समय बदला और समय की आबोह हवा बदली,विकास ने रप्तार पकड़ी,तो ऐसी की रुकने का नाम ही नही ले रही है।

एक शांत और आपसी भाईचारे के भाव वाला बाड़मेर अब नजर नही आता है।

रिफाइनरी ने बाड़मेर को बहुत कुछ दिया,एक उच्च जीवनशैली का तरीका दिया,मशीनरी दी,और यंहा की भूमि में छिपे खनिज लवणों ने बहुत कुछ अवसर दिये।
बस हम लोगो मे ही कमी रही हम अवसरों को ताड़ नही पाए।
इसकी एक वजह ये भी है,कि चीजे बहुत जल्दी-जल्दी हुई और हम थार के वाशिन्दे बहुत सयंम ओर धैर्यवान ठहरे। हमे जो चीज पकड़नी थी,हम वो तो नही पकड़ पाये, लेकिन उसकी पुछड़ी पकड़ ली। और जिसने भी पूंछ पकड़ी उनकी लंका में लाय/आग ही लगी है।

हमे पेट्रोकेमिकल में ज्ञान लेना था,हम पेट्रोल बेचने में लग गए,हमे किलोवाट में बिजली बनाना सीखना था,हम गाड़ियों के किलोमीटर कैसे बढ़ाएं के जुगाड़ में लग गए।

धीरे-धीरे हम थार के शांत वाशिन्दे अब उग्र होने लगे,अब हमारे ऊंठ गाड़े की जगह गाटर लगी बोलोरो केम्पर,गेटवे ले रही थी, ऊँट को हाँकने के लिए पतली कोम्भ/छड़ी की जगह आगे डोसबोर्ड में पोलो चढ़ी डॉग/लाठी/लगियो ने जगह लेनी शुरू की।

जो केम्पर गाड़िया नागाणा,राजेश्वरी,लीलाणा की तरफ जाते-जाते कब चितौड़ की ओर मुड़ गई पता ही नही चला।
जंहा शादी विवाह में आमने-सामने के धड़े वाले तन-गिनायतो में फुंचिया देकर की जाने वाली मजाक,कब गैंगवार में बदल गई पता ही नही चला।

यानी सबकूछ कितना जल्दी बिता।
हरीश जाखड़,खरथाराम गोदारा, कमलेश प्रजापत ओर कुछ जीवते भी है,जिन्होंने जीते जी अपने परिजनों को कर्ज तले डुबो के मार दिया जैसे मामले सामने आने लगे।

नशे की तस्करी आजादी के पहले भी होती आई, लेकिन एक मर्यादिय तरीका था,तस्कर गले मे सोने की 10 तालो की चेन हाथ मे सारी अंगूठियों से अंगुलिया लबालब नही होती थी,मेले कुलचे कपडे में रहता था, ओर अफीम ओर डोडा लोग हाड़तोड़ मेहनत के बदले लेते थे, शौक से नशा नही था।

लेकिन अब तस्करों ने डेमो देने में ही अपना स्टेटस समझा।

मतलब साफ था,इस धंधे में किसी भी घर के पुरूष ही लिप्त थे, महिलाओं की इस दलदल से बहुत दूरी थी।

लेकिन समय कितना जल्दी बदला,इंटरनेट में जब एक GB महीना था तब भी बहुत होता था और आज अनलिमिटेड भी कम पड़ रहा है,ने सब मामला उल्टा-सुल्टा कर दिया।

विज्ञान की तकनीकी अपने साथ दो आंधी लेकर आती है,किसको किस आंधी के साथ जाना है,अवसर खुले प्रदान करती है।

हमारे बाड़मेर में 2018 आते आते इस आंधी ने पुरुषो के बजाय महिलाओं को अपनी ओर आकर्षित किया,जिसका नतीजा निकला,तलाक,प्रेम विवाह,भगा के ले जाना और आत्महत्याये।

एकदम से मोबाइल ने क्रांति कर दी।
KEYPED से एंड्रॉइड फोन की चमचमाती स्क्रीन पर फिसलती अंगुलियों ने जीवन को किस सागर के ओर फिसला दिया पता ही नही चला।

उस बाड़मेर के शांत अबोह हवा में होटल में ठहरना VVIP लोगो का काम माना जाता था,अब वहां देर रात रंगीन पार्टीयो का DJ पर आयोजन होने लगा,बुफर से DJ की धड़कती फ्लोर से दिल पता नही कैसे ही धड़कने लगे की किसी के काबू में नही आये।

युवा लड़कियों ने शहर की ओर पढ़ाई के मार्फ़त रुख किया लेकिन 2018-19आते-आते ये लड़कियां,क्लबो,पबो,OYO ओर फिर नाईट पार्टीयो में कैसे पहुची पता ही नही चला।

ओर समय क्या तेजी से चला,की इनको गाव से शहर आने वाले रास्ते ने चितौड़,मध्यप्रदेश बिहार हरियाणा की ओर चमचमाती गाड़ियों पर कभी पैरों में पायल की छम छम करने वाले पैरों ने एक्सीलेटर को दबा दिया था।

2020 कोरोना ने आपदा में अवसर दिया,ओर साथ मे ताल मिलाया टिक टोक ने।

आभासी दुनिया मे लाखो की वाहवाही ने वाकई पूरे थार मरुस्थल को बदल के रख दिया है।

शहर में बढ़ते सैलून,स्पा सेंटरों ने इस बात को ओर तेज हवा दी,दुनिया मे सबसे ज्यादा कुछ है तो वो है,ग्लेमर।

गली-गली में खुल रहे है बिना अनुमति के स्पा सेंटर,ओर इन सेंटर के बाहर के छपरी छोकरो के साथ सेलूनों ने बाड़मेर के युवाओं को ओर भटकाव की ओर रास्ता दिया।

लड़कियों ने ब्लैकमेल करके पैसे कमाने के लिए अपने जिस्म को हवस के हवाले करने में अब कोई संकोच नही रखा।

बड़े धनाढ्य सेठों से होती हुई ये सौदेबाजीया नोकरी पेशा लोगो की जेबो पर भी छुरी चला रही थी।

इंस्टाग्राम, फेसबुक और सोशल प्लेटफार्म पर अब ग्लेमर का ही चस्का था,2020 के पूरे साल घरों में घुसे लोगो मे कोरोना के ढील के बाद विपरीत जेंडर के प्रति बढ़ा आकर्षक देखने लायक था।

कोई खड्डा भरकर आ रहा है,फिर भी दूसरा इन खड़ड़ो में कूदे जा रहा था।

लड़कियों ने अपनी गैंग बना ली थी,साधु संतों से होते हुवे उधोगपतियो सहित सबको इस मायाजाल में उलझा दिया था।

पैसे कमाने के ओर शौक मौज पूरे करने के लिए 2021 में अनैतिक कार्यो में जबरदस्त इजाफा हुआ।

अफीम,डोडा जो गावो तंक था,अब उस धंधे ने शहरों में नए तरीके से अपने पैर पसारने शुरू किए।

टी-स्टाल।
ये एक नशे के अड्डे के रूप में नया ओर बेहतरीन तरीका इजाद किया गया।
शहर में गली-गली में अलग अलग ब्रेड के टी-स्टाल खुलने लगें।

इन टी-स्टालों के अंदर धुंआ-धौर सिगरेट,गंजा ओर MD जैसे नशे बड़े शानो शौकत से केबिन जैसी व्यवस्था के साथ बहुत ही माकूल ओर सुरक्षित स्थान के रूप में पाव पसारने लगा है।

आज भी शहर में अनेक टी-स्टाल खुल रहे है,क्या बाड़मेर में अचानक इतने लोग चाय पीने लग गए है,क्या इनके पास कोई FSSIL के लाइसेंस है,कुछ नही है।
दुकान में फर्नीचर करवाके किसी छुटमूईये नेता के 50-60फ्लॉवरो को बुलाकर के फीता काटा जाता है,ओर कुछ दिनों तक व्हाट्सएप्प स्टेट्यूस पर तली तपाने के साथ प्रचार की औपचारिकता पूरी होती है।
इन चाय की दुकानों और स्पा,सेलूनों के बारे में बाड़मेर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को गहन पड़ताल करनी ही चाहिए।
आधी आंधी यंही से ही रुक जाएगी।

इसकी साथ पढ़ाई का दूसरा पैटर्न बना लाइबेरिया!

बाड़मेर शहर में 100 में से 90 लाइब्रेरी तो मौत का घर है।
बिना किसी सेफ्टी नॉर्म्स को पूरा करती हुई बिना किसी फायर सिस्टम ओर भूकंप जैसी अनहोनी से बचने के कोई तौर तरीके नही है।
एक बंद कमरे में 2 AC ओर टेबल कुर्सी की व्यवस्था लायब्रेरी कहलाती है।
इस विषय मे बाड़मेर प्रशासन को एक्शन लेना ही चाहिए। भगवान न करे कभी अनहोनी हो,वरना लाशों के ठेर लग जायेंगे, आपने कोटा या लखनऊ या दिल्ली की घटनाओं से फिर कुछ नही सीखा है।

खूब सारे कोचिंग सेंटर एक खुले बाड़े में टिन शैडो के नीचे चल रहे है,किसी दिन क्षणिक बन्तुलियो ने भी तांडव कर दिया तो लेने के देने पड़ जाएंगे।

ये लाइब्रेरीया पढ़ाई कम और इश्क घर ज्यादा साबित हो रहे है।
ये सब मैं पिछले 4 महीनों में शहर के 28 लाइब्रेरी ओर 6 कोचिंग सेन्टर में बैठने के बाद के अनुभव के आधार पर लिख रहा हु।
1000 लोगो के बेच में अगली 5 पंक्ति के बाद के इंसान केवल प्यार की हवाई जहाजों को उड़ाते है और गति देते है।

लाइब्रेरी सबसे सेफ ओर सुरक्षित नयन सुख का स्थान है।

कोचिंग के बाद पानी पताशी वाले फारूक को पता है,छगनी के पैसे भोमा देगा,ओर हरियो के पैसे लुणा देगा।

वर्तमान समय मे बाड़मेर जैसे शहर में कम से कम 15 राज्यो के दिहाड़ी मजदूर,जिसमे UP, बिहार,झारखंड, मध्यप्रदेश,दिल्ली,हरियाणा,पंजाब,बंगाली सोने के गहने ओर मराठी लोग रहते है।

बाड़मेर में किरायानामा ओर पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर शून्य आंकड़े है,जो बेहद ही चिंताजनक हालात है।

बड़े बड़े काम्प्लेक्स ओर सोसायटी में सैकड़ो परिवार रहते है,लेकिन किसी को किसी के बारे में कोई जानकारी नही है।

मकान मालिक मुह मागे मिल रहे किराये के आंधी में अंधे हो रहे है,बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन/किरायानामा के मकान किराये पर दे रहे है,जो आने वाले समय मे सामूहिक हत्याकांड, बड़ी लूट,डकेती जैसी घटनाओं के अवसर पैदा कर रही है।

वाकई बाड़मेर बदला है,हम चंद लोगो के सरकारी सेवाओं में चयन या चंद लोगो के व्यवसाय में सफल होने पर तो छाती जरूर कूट रहे है,लेकिन 90%यंग/युवा जनरेशन जो दोनो लिंग पुरुष और महिला को बर्बाद होते देख रहे है।

कोई राजस्थानी है तो कोई मारवाड़ी, कोई बाबा है,तो कोई तस्कर तो कोई भरवाड़ी।

इन सब से परे जाना और पार पाना छोटी लाइन के पास बड़ी लाइन खिंचने जितना मुश्किल कार्य है।

40-50 लाख में होते मामूली सौदों को देखकर लगता है, बाड़मेर में पैसा तो खूब है,बस कमाने के लिए जिस्म ही चाहिए।
कड़वा है,लेकिन वर्तमान में ये ही शास्वत सत्य है।

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