13/06/2025
रोहिणी तपे,मृग बाजे,कुछ कुछ आर्द्रा जाय।
घाघ कहे सुण भड्डरी, श्वान भात नहीं खाय।।
महा कवि घाघ अपनी पत्नी (भड्डरी) से कहते हैं कि अगर #रोहिणी नक्षत्र में जोरदार तपन काल रहता है और #मृगशिरा नक्षत्र में जोरदार आँधियाँ चले तथा #आर्द्रा नक्षत्र के कुछ दिन बीतने पर अगर बरसात होती है तो इतना अच्छा जमाना(सुकाल)आता है कि मनुष्य तो क्या श्वान(कुत्ता)भी भूखा नहीं रहता है।
तीतर वरणी बादली, विधवा वरणी रेख।
वा बरसे वा घर(घरवास)करे,इणमें मीन मेख।।
रोहिण तपे मिर्ग बाजे, आद्रा अनचितीया गाजे।
रोहिणी नक्षत्र के बाद सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करता है। रोहिणी इस वर्ष 25 मई से 8 जून तक रहा हैं। मृगशिरा 8 जून से 23 जून तक हैं। इसमें "तपन काल" बंद हो कर आँधियों का दौर शुरू होना चाहिए।
✨️मृगशिरा नक्षत्र के पहले दो दिन आँधी नहीं चलती है तो मूसा(चूहों)का बाहुल्य रहता हैं।।(9-10जून)
✨️अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर कातरा(फसल को खाने वाला कीट)का प्रकोप रहेगा।(11-12जून)
✨️अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर तीडी(टिड्डी)का प्रकोप रहता है।(13-14जून)
✨️अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर ताव(बुखार) ज्यादा चलेगा।(15-16जून)
✨️अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर जल हरण(जल की कमी)रहती है।(17-18जून)
✨️अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर विषवर (साँप-बिच्छू) का प्रकोप रहता है।(19-20जून)
✨️ अगले दो दिन आँधी नहीं चलने पर वस्तुओं के भाव (कीमतें) बढ़ती है।(21-22जून)
✨️ 23 जून को विकलांग वाला खोडिया मृग हैं।
कहने का मतलब है कि पूरे मृगशिरा नक्षत्र मे हवा चलती रहनी चाहिए। हवा घुटनी नहीं चाहिए।
"दो मूसा, दो कातरा, दो तीडी, दो ताव।
दो की बाजी जल हरे, दो विषवर,दो भाव।।"
यह भी कहा है....
"दो तीडी, दो कातरा, दो मूसा, दो ताव।
दो झोला, दो झांझली,दो घटावे भाव।।"
रोहिणी बाजे,मृग तपे ।
तो गैहला हाली क्यूँ पचे।।
"खोड़ियो मृग अभूम्मो जाय।
सावण रा दिन सतरा जाय।।"
यानी अगर इस दिन भी आँधी नहीं चली तो सावण मास के सतरह दिन बीतने तक वर्षा की संभावना नहीं रहेगी।
आगे आर्द्रा में बरसात हो जाए और सिन्ध व मारवाड़ में बाजरा समय पर बौने का मौका मिल जाए तो बाजरी का जबरदस्त उत्पादन होता हैं।
"आर्द्र बूठी भा अर ऊभी झौला खा।"
यानि आर्द्रों में बाजरी बो दी जाय तो वह लहलहाती हुई झोला खाती हुई बढती हैं।
इसके आधार पर इस वर्ष बाजरे की बुआई के सबसे अनुकूल दिन 24 जून से 8 जुलाई तक हैं।