25/05/2026
समाज ने बड़ी करवट ली है लिंगभेद मिटा नहीं तो घटा बहुत है।
आजादी के साठ साल बाद इक्कीसवीं सदी के पहले दशक तक जिन गांवों से बेटियां ना के बराबर तक इंटर करने स्कूल आती थी,
इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में तक एक लंबी चींटियों सी कतार में बहुत सी बेटियां इंटर करने मल्ली मज्याडी से सात किलोमीटर दूर कांसुवा इंटर कालेज आती हैं।
बच्चों का पढ़ना बेहद जरूरी है और बेटियों का पढ़ना उससे भी अधिक जरूरी है। भले हमारी शिक्षा व्यवस्था में अभी भी बहुत खामियां हैं लेकिन जितनी भी शिक्षा जैसी भी मिल रही कम से उसे प्राप्त करना बहुत जरूरी है।
रोजमर्रा के इस पैदल लंबे सफर में कितनी मुश्किलें होती होंगी इन बच्चों को , पहले असुरक्षित प्रश्न तो घर से ही चिंताओं के रूप में उठते होंगे लेकिन उन सभी चुनौतियों को कुचल कर ये बेटियां सपनों की अपनी शुरूआती उड़ान पर हैं।
ये दृश्य बेहद ही सुखद दृश्य है।