चकोर

चकोर चल चलते रहें
सफर की चांदनी में।
पहले मंजिल तक फिर मंजिल से आगे की राहों पर।
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क्या कर दिया हमने अपनी धरती को।  आग आग आग...आज आग सुबह से नहीं दिखाई दी क्योंकि आग लगने की जगह ही नहीं बची होगी सभी जगह ...
27/05/2026

क्या कर दिया हमने अपनी धरती को।
आग आग आग...
आज आग सुबह से नहीं दिखाई दी क्योंकि आग लगने की जगह ही नहीं बची होगी सभी जगह आग लग चुकी है। लेकिन आग से उठा धुआं सांसों में महसूस हो रहा है।
लेकिन शाम होते फिर आग की लपटों में बचा खुचा हुआ जंगल आ जाता है।

27/05/2026

उत्तराखंड के पहाड़ों को दिल्ली हरियाणा बना दिया हमने।
जंगलों को जला कर बरसात में आपदा का प्रबंध कर दिया हमने।

27/05/2026

आदिबद्री क्षेत्र के बूंगा गांव में एक माता जी वनाग्नि की चपेट में आने से गुजर ग‌ई।
जंगलों में लगी आग जब उनके मवेशियों के घर गौशाला तक पहुंची तो उस भीषण आग को बुझाने के प्रयास में आग की चपेट में आ ग‌ई।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपनी शरण दे और वन विभाग, उत्तराखंड सरकार प्रशासन जिम्मेदारी लेते हुए शोकाकुल परिवार को आग से नहीं बचा सके तो कम से कम आर्थिक मदद प्रदान करने के मार्ग ढूंढे और वनाग्नि को रोकने के प्रयास को ज़मीं पर उतारें।

इस धुआं शमशान हो चुके पहाड़ को न पहाड़ियों ने बख्शा और न यहां की निर्मोही सरकारों ने।

27/05/2026

जंगल की आग भी जंगली होती है उसके कोई नियम नहीं,
सूखे पत्तों व मानवीय मूर्खता से सुलगी आग , जंगल ज़मीन जल पशु पक्षी इंसान जानवर सबको निगल जाती है।

26/05/2026

चारों ओर आग ही आग धुआं ही धुआं।

25/05/2026

समाज ने बड़ी करवट ली है लिंगभेद मिटा नहीं तो घटा बहुत है।
आजादी के साठ साल बाद इक्कीसवीं सदी के पहले दशक तक जिन गांवों से बेटियां ना के बराबर तक इंटर करने स्कूल आती थी,
इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में तक एक लंबी चींटियों सी कतार में बहुत सी बेटियां इंटर करने मल्ली मज्याडी से सात किलोमीटर दूर कांसुवा इंटर कालेज आती हैं।
बच्चों का पढ़ना बेहद जरूरी है और बेटियों का पढ़ना उससे भी अधिक जरूरी है। भले हमारी शिक्षा व्यवस्था में अभी भी बहुत खामियां हैं लेकिन जितनी भी शिक्षा जैसी भी मिल रही कम से उसे प्राप्त करना बहुत जरूरी है।
रोजमर्रा के इस पैदल लंबे सफर में कितनी मुश्किलें होती होंगी इन बच्चों को , पहले असुरक्षित प्रश्न तो घर से ही चिंताओं के रूप में उठते होंगे लेकिन उन सभी चुनौतियों को कुचल कर ये बेटियां सपनों की अपनी शुरूआती उड़ान पर हैं।
ये दृश्य बेहद ही सुखद दृश्य है।

24/05/2026

विलायती बाबू के हाथों की बिरयानी बल
जंगल में।
जेष्ठ माह की गर्मी में बांझ वृक्षों की छांव तले।।

24/05/2026

जंगल विच नास्ता

23/05/2026

एकांत में संपूर्णता🌄

21/05/2026

बिस्तर पर चाय का आना आनंद दायक हो सकता है लेकिन सुकून तो जंगल में बसता है प्रकृति के मध्य।
सुबह 🌄

21/05/2026

ब्रह्मा भी सोच रहे होंगे कि इंसान की रचना उनकी सबसे बड़ी भूल थी।
वनाग्नि का राक्षस इंसान की कड़ी तपस्या से मिला है।
वन विभाग तो गुलदार के हमलों से लोगों को बचाने में तत्परता से जुटा है वरना मजाल है जो आग लग जाती।

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