Sapno Ki Rajdhani Gairsain [Pyaru Gairsain]

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http://www.facebook.com/Gairsain Gairsen or Gairsain [ɡɛːrˈsɛːɳ]) is a village in Chamoli district in central Uttarakhand, India.

According to an old tale the name Gairsain comes from the Garhwali language. Gair means deep and sain means plane, referring to a place such as a valley, a plane area at the foot of hills. It is situated in the center of the Garhwal and Kumaoun mandal. It is 1,750 metres (5,740 ft) high above sea level. Gairsain is also the site of the source of the Ramganga River, the doodhatoli parwat where the

Ramganga River rises. Gairsain is just about 16 km from Almora border at the national highway 87 extension. Nearest railway station from Gairsain is Ramnagar which is 150 km away. Nearest airport is Gaucher which is about 54 km

06/03/2018

आधार कार्ड की अनिवार्यता लेकिन गैरसैंण में नहीं बन रहे हैं आधार कार्ड, बच्चों व बडे सयानों को भी आधार कार्ड के लिए लगाने पड रहे हैं कर्णप्रयाग, चौखुटिया के चक्कर। अनजान बना है प्रशासन ।

06/03/2018
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गढ. भुमी

गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान गैरसैंण गैर किले
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09/09/2016

प्रवेश पत्र - उत्तराखंड सहकारी बैंकों में रिक्त वर्ग-3 (लिपिक/कैशियर) सीधी भर्ती की लिखित परीक्षा-2015 http://www.govexam.com/GVPUAT_ACC16/Default.aspx

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30/03/2016

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उत्तराखंड संकट: नैनीताल हाईकोर्ट ने कल होने वाले शक्ति परीक्षण पर लगाई रोक

Posted on: Mar 30, 2016 11:21 AM IST | Updated on: Mar 30, 2016 05:19 PM IST

Mukesh Yadav, ETV UP/Uttarakhand

उत्तराखंड सियासी संकट को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए 31 मार्च को विधानसभा में होने वाले शक्ति परीक्षण पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए मंगलवार तक केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी.

बस एक क्लिक पर देखें उत्तराखंड में सियासी उतार-चढ़ाव का LIVE अपडेट



दरअसल, हरीश रावत को 31 मार्च को सदन में बहुमत साबित करने के नैनीताल हाईकोर्ट के एकल पीठ के फैसले को बीजेपी ने डबल बेंच में चुनौती दी थी. इस मामले में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने डबल बेंच के सामने केंद्र सरकार का पक्ष रखा.

जल्दबाजी में राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया?

सुनवाई के दौरान अदालत ने एजी मुकुल रोहतगी से यह भी पूछा कि जब राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए 28 मार्च का समय दिया था तो जल्दबाजी में राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया?

रोहतगी ने जवाब में कहा, क्योंकि हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप सामने आ रहे थे इसलिए राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा. अदालत ने इस दौरान कहा कि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि धारा-356 का राजनीतिक इस्तेमाल न हो.

रोहतगी ने 29 मार्च के एकलपीठ के आदेश पर तीन दिन के लिए स्टे के साथ ही शक्ति परीक्षण टालने और अगले सप्ताह सुनवाई करने का अनुरोध किया था. केंद्र सरकार की दलील थी कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा है. ऐसे में हरीश रावत को बहुमत साबित करने का मौका नहीं मिलना चाहिए.

बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग

वहीं, नैनीताल हाईकोर्ट की एकलपीठ में चल रहे अन्य मामले में कांग्रेस के बागी विधायकों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है. बागी विधायकों ने हाईकोर्ट की एकलपीठ में स्पीकर के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें वोट देने के लिए अयोग्य करार दिया था. अब इस मामले में अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी. कांग्रेस की ओर से पैरवी कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने 9 बागी विधायकों की सदस्यता को रद्द करने का अनुरोध किया.

राष्ट्रपति शासन को लेकर फंसा सियासी पेंच

केंद्र सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सिंगल बेंच के अंतरिम आदेश पर स्टे की मांग की थी. रोहतगी का कहना था कि जब तक इस मामले पर पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, 31 मार्च को सदन में बहुमत साबित करने से संबंधित फैसले पर स्टे लगाया जाए.

इसके अलावा, कांग्रेस भी बागियों को सदन में मतदान करने के अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा फिर से खटखटाया था. कांग्रेस बागियों को सदन में मौजूद रहने और उसे वोटिंग का हक देने के फैसले से खुश नहीं है. ऐसे में कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ डिविजनल बेंच में अपील की.

30/03/2016

बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग

वहीं, नैनीताल हाईकोर्ट की एकलपीठ में चल रहे अन्य मामले में कांग्रेस के बागी विधायकों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है. बागी विधायकों ने हाईकोर्ट की एकलपीठ में स्पीकर के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें वोट देने के लिए अयोग्य करार दिया था. अब इस मामले में अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी. कांग्रेस की ओर से पैरवी कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने 9 बागी विधायकों की सदस्यता को रद्द करने का अनुरोध किया.

30/03/2016

जल्दबाजी में राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया?

सुनवाई के दौरान अदालत ने एजी मुकुल रोहतगी से यह भी पूछा कि जब राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए 28 मार्च का समय दिया था तो जल्दबाजी में राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया?

रोहतगी ने जवाब में कहा, क्योंकि हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप सामने आ रहे थे इसलिए राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा. अदालत ने इस दौरान कहा कि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि धारा-356 का राजनीतिक इस्तेमाल न हो.

रोहतगी ने 29 मार्च के एकलपीठ के आदेश पर तीन दिन के लिए स्टे के साथ ही शक्ति परीक्षण टालने और अगले सप्ताह सुनवाई करने का अनुरोध किया था. केंद्र सरकार की दलील थी कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा है. ऐसे में हरीश रावत को बहुमत साबित करने का मौका नहीं मिलना चाहिए.

30/03/2016

उत्तराखंड सियासी संकट को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए 31 मार्च को विधानसभा में होने वाले शक्ति परीक्षण पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए मंगलवार तक केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी.

हाईकोर्ट से बीजेपी को झटका, 31 को हरीश रावत साबित करेंगे विधानसभा में बहुमतउत्तराखंड में मचे सियासी घमासान के बीच नैनीता...
29/03/2016

हाईकोर्ट से बीजेपी को झटका, 31 को हरीश रावत साबित करेंगे विधानसभा में बहुमत

उत्तराखंड में मचे सियासी घमासान के बीच नैनीताल हाईकोर्ट ने बीजेपी को तगड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने हरीश रावत की याचिका पर फैसला देते हुए निर्देश दिया है कि 31 मार्च को वह विधानसभा में बहुमत साबित करें.
अदालत ने साफ किया कि विश्वासमत प्रस्ताव के दौरान सदन में कांग्रेस के 9 बागी विधायक भी हिस्सा ले सकेंगे. इसके लिए अदालत ने नैनीताल हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को बतौर पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. कांग्रेस की ओर से पैरवी करने वाले अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बागी विधायकों के वोट को अलग रखा जाएगा. मतलब सिर्फ गणना करने के लिए उनके वोट रखे जाएंगे.

31 मार्च को 11 बजे वोटिंग होगी और 1 अप्रैल को रजिस्ट्रार जनरल कोर्ट में अपनी रिपोर्ट रखेंगे. खास बात ये है की वोटिंग की प्रक्रिया को गोपनीय रखने का आदेश कोर्ट ने दिया है.

कांग्रेस ने दी थी अदालत में फैसले को चुनौती

दरसअल, उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के खिलाफ कांग्रेस ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. कांग्रेस की ओर से मामले की पैरवी सिंघवी और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल कर रहे हैं. सिंघवी सोमवार सुबह दिल्ली से नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचे थे और थोड़ी देर बाद कपिल सिब्बल भी नैनीताल पहुंच गए थे.

इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रविवार को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की संस्तुति की थी. राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद-356 के तहत इसकी घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे. उसके बाद उत्तराखंड विधानसभा निलंबित कर दी गई. यह पूरा घटनाक्रम मात्र एक दिन पहले का है, जब कांग्रेस के नेतृत्ववाली राज्य सरकार को सदन में बहुमत साबित करना था.

'राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला लोकतंत्र की हत्या'

कांग्रेस के नेताओं और रावत ने राष्ट्रपति शासन लगाने के केंद्र के इस फैसले को लोकतंत्र की हत्या करार दिया था. उनका कहना था कि जब राज्यपाल ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को 28 मार्च को बहुमत साबित करने का मौका दिया था, तब केंद्र सरकार ने 24 घंटे पहले निर्वाचित सरकार को बर्खास्त करने की जल्दबाजी क्यों की.

अदालत ने साफ किया कि विश्वासमत प्रस्ताव के दौरान सदन में कांग्रेस के 9 बागी विधायक भी हिस्सा ले सकेंगे. इसके लिए अदालत ने नैनीताल हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को बतौर पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. कांग्रेस की ओर से पैरवी करने वाले अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बागी विधायकों के वोट को अलग रखा जाएगा. मतलब सिर्फ गणना करने के लिए उनके वोट रखे जाएंगे.

31 मार्च को 11 बजे वोटिंग होगी और 1 अप्रैल को रजिस्ट्रार जनरल कोर्ट में अपनी रिपोर्ट रखेंगे. खास बात ये है की वोटिंग की प्रक्रिया को गोपनीय रखने का आदेश कोर्ट ने दिया है.

कांग्रेस ने दी थी अदालत में फैसले को चुनौती

दरसअल, उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के खिलाफ कांग्रेस ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. कांग्रेस की ओर से मामले की पैरवी सिंघवी और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल कर रहे हैं. सिंघवी सोमवार सुबह दिल्ली से नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचे थे और थोड़ी देर बाद कपिल सिब्बल भी नैनीताल पहुंच गए थे.

इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रविवार को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की संस्तुति की थी. राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद-356 के तहत इसकी घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे. उसके बाद उत्तराखंड विधानसभा निलंबित कर दी गई. यह पूरा घटनाक्रम मात्र एक दिन पहले का है, जब कांग्रेस के नेतृत्ववाली राज्य सरकार को सदन में बहुमत साबित करना था.

'राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला लोकतंत्र की हत्या'

कांग्रेस के नेताओं और रावत ने राष्ट्रपति शासन लगाने के केंद्र के इस फैसले को लोकतंत्र की हत्या करार दिया था. उनका कहना था कि जब राज्यपाल ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को 28 मार्च को बहुमत साबित करने का मौका दिया था, तब केंद्र सरकार ने 24 घंटे पहले निर्वाचित सरकार को बर्खास्त करने की जल्दबाजी क्यों की.

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