24/03/2020
(COVID-19)
मेरा इस बार का ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के सबसे ऊंचे शिखर माउंट कोज़िअस्को का सफर काफी रिस्क भरा था। #कोरोना_वायरस का अलर्ट जारी हो चुका था। ऑस्ट्रेलिया जाने के पहले मकान मालिक ने रूम भी खाली करने को बोल दिया था। हबड़-तबड़ में नया घर ढूंढा गया। कॉलेज के साथी व जूनियर्स ने एक दिन में समान शिफ्ट कर के घर सजा दिया था। ट्रैकिंग पर जाने की तैयारी भी करनी बाकी थी। वीसा भी देरी से आया था। टिकट भी महँगी बुक हुई थी। यह सब जाने के एक दिन पहले का वाक्या है। शिफ्टिंग की धूल से एलर्जी हो गयी थी। छीकें आने लगी थी। यह घबराने की बात नही थी पर घबराहट इस बात की थी कि कहीं एयरपोर्ट पर ही मुझे रोक ना लिया जाए। तुरंत के इलाज के लिए सबने एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह दी पर अंग्रजी दवाई बहुत जरूरी ना होने पर मैंने कभी नही खाई। मैंने वैद्य जी से कुछ #आयुर्वेद दवाई का पूछा। उन्होंने श्वास चिंतामणि रस और स्वर्ण युक्त महालक्ष्मी विलास रस को मधु वाणी के साथ मिलाकर सुबह-शाम लेने की सलाह दी। इससे एयरपोर्ट क्लीयरेंस तो मिल गया और एलर्जी भी ठीक हो गयी। इस बार पंडित चंद्रशेखर वैद्य जी के शरद पूर्णिमा शिविर पर मुझे वहां आये बारह हजार स्वांस रोगियो के सामने सम्मान भी दिया था उन्होंने। इतने लोगो के उस दिन उनपर भरोसा देखा, उसी कारण उनका यह नुस्खा पोस्ट किया शायद किसी और को इसका फायदा मिल जाए क्योंकि आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है और आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सा। मगर इन सब के बावजूद मैंने दिल्ली में दो दिन रुकने के बाद भोपाल वापसी पर एयरपोर्ट लेने आये मेरे परिवार के साथ न जा कर कैब से हॉस्पिटल जा कर डॉक्टर से चेकउप करवाया जो दीदी ने पहले से तय कर दिया था। फिर घर जा कर सारा सामान छत पर रख कर धोया। फिर खूब नहाया और अब दो दिन में खुद पर निगरानी रखूंगी। फिर सब दोस्तो के साथ पार्टी और मौजमस्ती। मगर संभाल कर। आप लोग भी ध्यान रखिये। कोरोना एक दिन बीती बात हो जाएगा। #स्टे_सेफ