Rajputana shaurya

Rajputana shaurya मैं केवल शून्य हु शून्य

18/05/2026

डॉ सुनील गुर्जर तू सिर्फ गु का इतिहास बताता है चादरमोद , जिस दिन तू मेरे सामने आ गया ना इतना पेलूँगा तेरा खानदान 7 पुस्ते तक नाजायज औलादे फेंकेगी।। तुझे इतना मारूंगा की तू भूल जाएगा राजपूतों के खिलाफ...!!

18/05/2026
11/05/2026

ट्रैफिक नियमों का कोई पालन नहीं है

10/05/2026

ये खंगार कौनसे राजपूत होते हैं???क्योंकि यह up, raj, mp में sc/st में आते हैं...!!

इतिहास के पन्नों में कई वीर हुए, लेकिन कल्ला रायमलोत जैसा कोई विरला ही था, जिसने भरे दरबार में बादशाह अकबर की आँखों में ...
10/05/2026

इतिहास के पन्नों में कई वीर हुए, लेकिन कल्ला रायमलोत जैसा कोई विरला ही था, जिसने भरे दरबार में बादशाह अकबर की आँखों में आँखें डालकर अपनी मूंछों पर ताव दिया था।

किस्सा आगरा दरबार का:

एक बार अकबर के दरबार में जब बादशाह ने बूंदी के राजा भोज की पुत्री का प्रस्ताव शहजादे सलीम के लिए रखा, तो राजा भोज धर्मसंकट में पड़ गए। बादशाह का भय था, लेकिन स्वाभिमान गवाही नहीं दे रहा था।

उस भरे दरबार में सन्नाटे को चीरते हुए राव कल्ला रायमलोत खड़े हुए। उन्होंने अपनी मूंछों पर निर्भीकता से ताव देते हुए कहा-
🗣️ "जहाँपनाह! बूंदी की उस राजकुमारी की सगाई तो मेरे साथ हो चुकी है।"

अकबर ने कड़क कर पूछा- "किसके साथ?"
कल्ला जी ने उत्तर दिया- "मेरे साथ! वह मेरी मांग है।"
यह केवल एक जवाब नहीं, बल्कि एक क्षत्रिय का बादशाह को सीधा चुनौती थी।

जीवित रहते सुने अपने ही मरसिये (मृत्यु गीत):

कल्ला जी को पता था कि अब युद्ध निश्चित है। उन्होंने बीकानेर के प्रसिद्ध भक्त-कवि पृथ्वीराज राठौड़ (पीथल) से अपने मरसिये (शोक गीत) जीवित रहते ही सुनने की जिद की।

उन्होंने वचन दिया: "काकाजी! आप जैसा वर्णन मेरे युद्ध का करेंगे, मैं रणभूमि में ठीक वैसा ही पराक्रम दिखाऊंगा।"

सीस कटने के बाद भी लड़ा धड़:

सिवाना के ऐतिहासिक युद्ध में कल्ला रायमलोत ने वह कर दिखाया जो असंभव था। कहते हैं, युद्ध में उनका शीश कट गया, लेकिन उनका धड़ दोनों हाथों में तलवार लेकर मुगलों पर कहर बनकर टूटता रहा। अंत में, जब उनकी पत्नी हाड़ी रानी ने गंगाजल के छींटे दिए, तब जाकर वह शांत हुआ।

आज भी राजपूताना में जब मूंछों की बात होती है, तो जुबां पर एक ही नाम आता है- कल्ला रायमलोत!
नमन है ऐसे वीर योद्धा को!

यह जानकर आपको गर्व होगा कि भारत में क्रिकेट लाने का श्रेय एक राजपूत महाराजा को जाता है।महाराजा रणजीत सिंह जडेजा जी (जाम ...
09/05/2026

यह जानकर आपको गर्व होगा कि भारत में क्रिकेट लाने का श्रेय एक राजपूत महाराजा को जाता है।
महाराजा रणजीत सिंह जडेजा जी (जाम साहब)

उस दौर में जब भारत में आम लोगों को क्रिकेट खेलना तो दूर, देखने की भी इजाजत शायद ही थी, तब 1896 में एक भारतीय शेर लंदन में इंग्लैंड की टीम की तरफ से बल्लेबाजी कर रहा था।

वह न केवल भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी थे, बल्कि उन्होंने ही इस खेल की नींव हमारे देश में रखी।

आज भारत की सबसे प्रतिष्ठित घरेलू लीग, RanjiTrophy, उन्हीं के सम्मान में खेली जाती है।

यह हमारी ऐतिहासिक विरासत है।
इस महान खिलाड़ी को नमन!

07/05/2026

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत केवल और केवल श्री राम जी के कारण मिली..! जय श्री राम

05/05/2026

देखिए इस वीडियो में अब मिली महिलाओं को असली आज़ादी... सुनिए एक महिला के मुख से...!!!

बॉलीवुड और गलत इतिहास की किताबों द्वारा फैलाया गया "सबसे बड़ा झूठ"झूठ: "रावल रतन सिंह ने अलाउद्दीन खिलजी को रानी पद्मावत...
03/05/2026

बॉलीवुड और गलत इतिहास की किताबों द्वारा फैलाया गया "सबसे बड़ा झूठ"
झूठ: "रावल रतन सिंह ने अलाउद्दीन खिलजी को रानी पद्मावती का चेहरा कांच में दिखाया था।"
सत्य: यह 100% मनगढ़ंत कहानी है! इस किस्से को इतिहास के 200 साल बाद 'मलिक मोहम्मद जायसी' नाम के एक कवि ने अपनी कविता 'पद्मावत' में लिखा था।

इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।
असली राजपूती इतिहास तो यह है कि राजपूत अपने प्राण दे देते हैं, लेकिन दुश्मनों की परछाई भी अपनी रानियों पर नहीं पड़ने देते।

⚔️ रावल रतन सिंह ने खिलजी को युद्ध के मैदान में भयंकर टक्कर दी थी।

🔥 और जब बात स्वाभिमान पर आई, तो महारानी पद्मावती ने 16,000 क्षत्राणियों के साथ धधकती आग में "जौहर" कर इतिहास रच दिया।

कांच वाली मनगढ़ंत बात हमारे स्वाभिमान पर वामपंथियों का एक कलंक है! हमें अपने असली और गौरवशाली इतिहास को जानना चाहिए।

इस सत्य को उजागर करने के लिए इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। जय राजपूताना! 🚩

#स्वाभिमान #क्षत्रिय

चलो बताओं आप कोनसे राजपूत हो
03/05/2026

चलो बताओं आप कोनसे राजपूत हो

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