16/08/2018
भारतीय राजनीति के सर्वोच्च शिखर पुरूष, भारत रत्न परम पूज्य अटल जी, क्या ओजस्वी वक्ता, क्या सादगी, क्या विनम्रता, क्या भाषण शैली, क्या काव्य!! बच्चों जैसी निश्छलता और सागर जैसी गंभीरता!!
ऐसा ही एक किस्सा -
उस बार भी अटल जी लखनऊ से ही उम्मीदवार थे.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार पूछ बैठा. अटल जी, आपकी जीत इस बार मुश्किल है.
अटल जी बोले- नही ऐसी कोई बात नही है, आराम से जीतेंगे.
फिर दुहराया पत्रकार ने, आप बिल्कुल नही जीत पायेंगे.
अपना विश्वप्रसिद्ध पॉज लेकर अटल जी, कुछ पल रुक कर बोले,...
नही जीत पाया तो ......., तो हार जाऊँगा! :)
ठहाकों की बौछार को पीछे छोड़ते हुए, छोटे-छोटे स्वाभाविक डग भरता वह यौद्धा, वह लोकनायक निकल लिया था, चुनावी सभा में हाथ नचा कर अपने ख़ास अन्दाज़ में कहने - प्रधानमंत्री जी, यह अच्छी बात नही.
सूर्य तो फिर उगेगा
धूप तो फिर खिलेगी
लेकिन मेरे बग़ीचे की
हरी-हरी दूब पर,
ओस की बूँद हर मौसम में नहीं मिलेगी!
~अटल बिहारी वाजपेयी (1924 -2018)
विदा मेरे लोकनायक! आप रहेंगे सदा के लिए मन में!
मैं एक कृतज्ञ राष्ट्रवासी आपके चरणों मे शीश नवाकर आपको कोटि कोटि प्रणाम करता हूँ,
हे लोकनायक हो सके तो फिर इसी भारत भूमि पे लौट के आना!!