26/06/2020
Darshan Haryali Devi
Rudarparyag Uttarakhand
हरियाली देवी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक एवम् पवित्र शक्तिपीठ है , जो कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के जसोली गाँव में स्थित है | यह मंदिर समुन्द्रतल से 1371 मीटर की ऊँचाई पर स्थित विशाल हिमालयन पर्वतो से घिरी हुई है | मंदिर में हर हरियाली देवी के एक श्वेत मूर्ति शामिल है जो शेर को सवारी करते हैं और मंदिर में हरिर्य्य देवी की एक राजकुमारी मूर्ति है, जो शेर की ओर झुकती है। इस मंदिर में मूर्ति पीले रंग की एक शेर की पीठ पर बैठी हुई है और आभूषणों के साथ नियमित रूप से मनगढ़ंत है। मंदिर यहां मूल रूप से तीन मूर्तियों- मा हरिली देवी, क्षेत्रपाल और हीत देवी के घर हैं। यह मंदिर रुद्रप्रयाग से 37 किमी दूर है और मोटी जंगलों के साथ-साथ विभिन्न उच्च पर्वत और चोटियों से घिरा हुआ है । हरियाली देवी मंदिर में विराजित देवी को “सीता माता” , “बाला देवी” , और “वैष्णो देवी” के नाम से भी जाना जाता है साथ ही साथ इस मंदिर में क्षेत्रपाल और हीत देवता की मुर्तिया भी है | भारत के 58 सिध्पीठो मंदिरों में से यह मंदिर एक महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध मंदिर यात्रा करने के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है | जसोली क्षेत्र में हरियाली देवी का पौराणिक मंदिर शंकराचार्य के समय से निर्मित होना बताया जाता है, जिससे मंदिर के साथ पौराणिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं | यह मंदिर एक बहुत ही निराशाजनक संरचना है , जो कि ईंट और मोर्टार से बना है । मंदिर की बुनियादी सजावट, वर्मिलियन और पीले रंगों के साथ की गयी है , जो हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र मानी जाती है । हरियाली देवी मंदिर को कई बार पुनर्निर्मित किया गया है क्योंकि 1400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण मंदिर में जलवायु के प्रतिकूल प्रभावों की संभावना है । रुद्रप्रयाग में कई मंदिरों के लिए पुनर्निर्माण एक सामान्य प्रथा है । हरियाली देवी मंदिर वास्तुकला के महत्व के बजाय इसकी आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।
हरियाली देवी मंदिर में हर वर्ष प्राचीन काल से कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर तीन दिनों का मेला और दिवाली के अवसर पर दो दिनों का मेला का आयोजन किया जाता है | इन दोनों अवसरों पर हज़ारो की संख्या में भक्तजन माँ हरियाली का आशीर्वाद लेने के लिए आते है और दिवाली के अवसर पर माँ हरियाली की डोली (हरियाली देवी की मूर्ति) को 7 किमी की दुरी पर “हरियाली कांठा” तक ले जाते है | सबसे ख़ास बात यह भी है कि सभी भक्तजन एक हफ्ते पहले से ही मीत-मांस , मदिरा , अंडे , प्याज और लहसुन का सेवन करना बंद कर देते है , जो भी भक्तजन इस यात्रा में शामिल होता है , उन्हें इन सभी खाद्यसामग्री का सेवन ना करना अनिवार्य होता है और इस यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस यात्रा में सिर्फ पुरुष ही शामिल होते है | इस पूजा में माँ हरियाली साक्षात रूप में भक्तो के समक्ष दर्शन देती है और जो कि श्रधाल या भक्त कोई मन्नत लेकर जाता है , माँ हरियाली देवी उसे फल के रूप में
आशीर्वाद देती है और भक्त की मनोकामना को पूरी करती है