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Jai Badri Vishal
21/11/2021

Jai Badri Vishal

Auodhya ready for 5 th August 2020
31/07/2020

Auodhya ready for 5 th August 2020

Jai Maa Dhari Devi Temple uttarakhand
17/07/2020

Jai Maa Dhari Devi Temple uttarakhand

12/07/2020

Jai koteshwar Mahadevहर वर्ष सावन के महीने में इस तरह गंगा मैया #रुद्रप्रयाग_के_कोटेश्वर_मंदिर में शिवलिंग को स्पर्श करके निकलती है। जिन लोगों ने कोटेश्वर महादेव का मंदिर देखा होगा वो समझ सकते है क्योंकि नदी बहुत नीचे है और यहाँ बहुत ही ज्यादा चौड़ा है फिर भी गुफा के अंदर तक गंगा मैया भोले की वंदना करके निकलती है..

।।जय भोलेनाथ ।। जय गंगा माँ 🧘🐂🔱

Vikrant Holidays DelhiLatest Model 2×2 Push Back A/c20 Seater Tempo travelers Required Call us  #9711147947 #9899177100
10/07/2020

Vikrant Holidays Delhi
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 #कोटेश्वर_महादेवरुद्रप्रयाग से लगभग तीन किमी, आगे अलकनंदा के तट पर बना प्राचीन दर्शनीय स्थल कोटेश्वर महादेव मं‌दिर अपने...
03/07/2020

#कोटेश्वर_महादेव
रुद्रप्रयाग से लगभग तीन किमी, आगे अलकनंदा के तट पर बना प्राचीन दर्शनीय स्थल कोटेश्वर महादेव मं‌दिर अपने आप में आलौकिक है।
कहा जाता है कि भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव इसी गुफा में छिपे थे।
इस गुफा वाले मंदिर के आसपास शांतिमय और सम्मोहित कर देने वाला माहौल है।
मान्यता है कि कौरवों की मृत्यु के बाद जब पांडव मुक्ति का वरदान मांगने के लिए भगवान शिव को खोज रहे ‌थे तो शिव इसी इसी गुफा मे ध्यानावस्था में रहे थे।
एक अन्य पौराणिक मान्‍यता के अनुसार भस्मासुर नामक राक्षस ने तपस्‍या कर शिव से किसी भी व्यक्ति के सिर पर हाथ रखने पर भस्म करने का वरदान मांगा लिया था।
वरदान पाने के बाद राक्षस ने भगवान शिव को भस्म करने की सोची।
भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव इसी गुफा में छिपे थे।
सीधी खड़ी बड़ी चट्टानों के बीच से निकलते पेड़ और चट्टानों पर लगी विशेष किस्म की वनस्पतियों के बीच शांत अलकनंदा की सुंदरता देखते ही बनती है।
गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से बनी मूर्तियां और शिवलिंग प्राचीन काल से स्थापित हैं।
गुफा के बाहर कल-कल बहती अलकनंदा का विहंगम दृश्य।

26/06/2020

Darshan Haryali Devi
Rudarparyag Uttarakhand
हरियाली देवी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक एवम् पवित्र शक्तिपीठ है , जो कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के जसोली गाँव में स्थित है | यह मंदिर समुन्द्रतल से 1371 मीटर की ऊँचाई पर स्थित विशाल हिमालयन पर्वतो से घिरी हुई है | मंदिर में हर हरियाली देवी के एक श्वेत मूर्ति शामिल है जो शेर को सवारी करते हैं और मंदिर में हरिर्य्य देवी की एक राजकुमारी मूर्ति है, जो शेर की ओर झुकती है। इस मंदिर में मूर्ति पीले रंग की एक शेर की पीठ पर बैठी हुई है और आभूषणों के साथ नियमित रूप से मनगढ़ंत है। मंदिर यहां मूल रूप से तीन मूर्तियों- मा हरिली देवी, क्षेत्रपाल और हीत देवी के घर हैं। यह मंदिर रुद्रप्रयाग से 37 किमी दूर है और मोटी जंगलों के साथ-साथ विभिन्न उच्च पर्वत और चोटियों से घिरा हुआ है । हरियाली देवी मंदिर में विराजित देवी को “सीता माता” , “बाला देवी” , और “वैष्णो देवी” के नाम से भी जाना जाता है साथ ही साथ इस मंदिर में क्षेत्रपाल और हीत देवता की मुर्तिया भी है | भारत के 58 सिध्पीठो मंदिरों में से यह मंदिर एक महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध मंदिर यात्रा करने के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है | जसोली क्षेत्र में हरियाली देवी का पौराणिक मंदिर शंकराचार्य के समय से निर्मित होना बताया जाता है, जिससे मंदिर के साथ पौराणिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं | यह मंदिर एक बहुत ही निराशाजनक संरचना है , जो कि ईंट और मोर्टार से बना है । मंदिर की बुनियादी सजावट, वर्मिलियन और पीले रंगों के साथ की गयी है , जो हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र मानी जाती है । हरियाली देवी मंदिर को कई बार पुनर्निर्मित किया गया है क्योंकि 1400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण मंदिर में जलवायु के प्रतिकूल प्रभावों की संभावना है । रुद्रप्रयाग में कई मंदिरों के लिए पुनर्निर्माण एक सामान्य प्रथा है । हरियाली देवी मंदिर वास्तुकला के महत्व के बजाय इसकी आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।
हरियाली देवी मंदिर में हर वर्ष प्राचीन काल से कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर तीन दिनों का मेला और दिवाली के अवसर पर दो दिनों का मेला का आयोजन किया जाता है | इन दोनों अवसरों पर हज़ारो की संख्या में भक्तजन माँ हरियाली का आशीर्वाद लेने के लिए आते है और दिवाली के अवसर पर माँ हरियाली की डोली (हरियाली देवी की मूर्ति) को 7 किमी की दुरी पर “हरियाली कांठा” तक ले जाते है | सबसे ख़ास बात यह भी है कि सभी भक्तजन एक हफ्ते पहले से ही मीत-मांस , मदिरा , अंडे , प्याज और लहसुन का सेवन करना बंद कर देते है , जो भी भक्तजन इस यात्रा में शामिल होता है , उन्हें इन सभी खाद्यसामग्री का सेवन ना करना अनिवार्य होता है और इस यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस यात्रा में सिर्फ पुरुष ही शामिल होते है | इस पूजा में माँ हरियाली साक्षात रूप में भक्तो के समक्ष दर्शन देती है और जो कि श्रधाल या भक्त कोई मन्नत लेकर जाता है , माँ हरियाली देवी उसे फल के रूप में
आशीर्वाद देती है और भक्त की मनोकामना को पूरी करती है

भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा 🙏🏻
23/06/2020

भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा 🙏🏻

महालक्ष्मी स्वर्ण मन्दिर !!सोने से निर्मित इस मंदिर में करीब 15000 किलो शुद्ध सोने का इस्तेमाल किया गया है। कहा जाता है ...
14/05/2020

महालक्ष्मी स्वर्ण मन्दिर !!
सोने से निर्मित इस मंदिर में करीब 15000 किलो शुद्ध सोने का इस्तेमाल किया गया है। कहा जाता है कि इस मंदिर में लगे सोने के बराबर स्वर्ण पूरे विश्व में किसी पूजा स्थल में प्रयोग नहीं हुआ है। सोने से बने इस मंदिर में धन की देवी लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना की जाती है।

तमिलनाडु के वेल्लोर में स्थित इस मंदिर को श्रीपुरम अथवा महालक्ष्मी स्वर्ण मन्दिर के नाम से जाना जाता है।
वेल्लोर शहर के दक्षिण भाग में बने इस मंदिर को बनाने में 300 करोड़ से ज्यादा की लागत आई थी। मंदिर के अंदर और बाहर दोनों तरफ सोने की लगभग नौ से पंद्रह परतें बनाई गई हैं। श्रीपुरम मंदिर का सरोवार भी काफी प्रसिद्ध है, देश की सभी प्रमुख नदियों का पानी लाकर इस मंदिर में सर्वतीर्थम सरोवर का निर्माण किया गया है।

लगभग 100 एकड़ में फैले इस मंदिर के चारों ओर आपको हरियाली देखने को मिलेगी। इस मंदिर के अंदर जाते वक्त कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना पड़ता है। श्रीपुरम मंदिर के अंदर आप शॉर्ट पैंट या निक्कर में प्रवेश नहीं कर सकते। इसके अलावा मंदिर के अंदर मोबाइल फोन, कैमरा आदि किसी भी तरह की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाना सख्त मना है

दर्शन के लिए मंदिर हर रोज सुबह 8 बजे से रात्रि 8 बजे तक खुलता है। मंदिर में खासतौर पर लोगों के आकर्षण के लिए कुछ आर्टिफिशियल लाइट्स लगाई गई हैं। रात के समय लाइट्स की रोशनी में मंदिर को जगमगाता देख आप मंदिर की खूबसूरती से मोहित हो उठेंगे। मंदिर की के आसपास 24 घटें सुरक्षाबलों का कड़ा पहरा रहता है।

Jai Badri vishal
14/05/2020

Jai Badri vishal

Vishnu Prayag Sangam Alaknanda & Dhauli Ganga River
14/05/2020

Vishnu Prayag
Sangam Alaknanda & Dhauli Ganga River

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