Yadram ki Kalam Se

Yadram ki Kalam Se मैं घुम्मकड़। डाक्टर घुम्मकड़ आपको घुम्मकड़ी दुनिया की सैर करवाता हूं।

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा 125. ताजमहल आप इस अद्भुत जगह के बारे में तो जानते ही होंगे । ताजमहल भारत के आगरा में यमुना नदी...
09/05/2026

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा 12

5. ताजमहल आप इस अद्भुत जगह के बारे में तो जानते ही होंगे । ताजमहल भारत के आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित एक बेहद खूबसूरत सफेद संगमरमर का स्मारक है । इस स्मारक के पीछे की प्रेम कहानी काफी प्रसिद्ध है ।ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ के आदेश पर उनकी प्रिय पत्नी मुमताज महल की याद में सन् 1632 में करवाया था। इस प्यारे दंपति की कब्रें यहीं स्थित हैं। कब्रों के अलावा, आप मस्जिद, अतिथि गृह और बाहरी प्रांगण तथा उससे आगे के गलियारों में भी स्थापत्य कला की सुंदरता देख सकते हैं।...

5. ताजमहल आप इस अद्भुत जगह के बारे में तो जानते ही होंगे । ताजमहल भारत के आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित एक बेहद ख.....

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा 113. मोआई प्रतिमाएँपूर्वी पोलिनेशिया के ईस्टर द्वीप पर रापा नुई जनजाति द्वारा 1250 से 1500 के ...
08/05/2026

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा 11

3. मोआई प्रतिमाएँपूर्वी पोलिनेशिया के ईस्टर द्वीप पर रापा नुई जनजाति द्वारा 1250 से 1500 के बीच खूबसूरती से तराशी गई ये मानव आकृतियाँ स्थित हैं । इन सभी के सिर विशाल हैं।इन्हें कभी पूर्वजों का प्रतीक माना जाता था, तो कभी ये शक्तिशाली पूर्व सरदारों का प्रतीक होते थे। समय के साथ इनमें से अधिकतर नष्ट हो गए, लेकिन सौभाग्य से शेष आज भी रानो राराकु ज्वालामुखी की ढलानों पर खड़े हैं । इनका निर्माण 18वीं शताब्दी में रहस्यमय तरीके से रोक दिया गया था और आज तक कोई भी इसका कारण नहीं जान पाया है।...

3. मोआई प्रतिमाएँपूर्वी पोलिनेशिया के ईस्टर द्वीप पर रापा नुई जनजाति द्वारा 1250 से 1500 के बीच खूबसूरती से तराशी गई ये म....

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -10अगले दिन हमारे ग्रुप का प्रोग्राम मायापुर धाम जाने का था। लेकिन हम चार लोगों की टोली ने विश...
08/05/2026

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -10

अगले दिन हमारे ग्रुप का प्रोग्राम मायापुर धाम जाने का था। लेकिन हम चार लोगों की टोली ने विश्व प्रसिद्ध ईको पार्क जाने का प्रोग्राम बनाया। आराम से दिशा-मैदान जा नाश्ता किया और चल पड़े ईको पार्क की ओर।1967 में एक हिन्दी फिल्म बनी थी "" इन इवनिंग इन पैरिस ""। उस फिल्म में एक बेहतरीन गाना है : अजी, ऐसा मौका फिर कहाँ मिलेगा....

अगले दिन हमारे ग्रुप का प्रोग्राम मायापुर धाम जाने का था। लेकिन हम चार लोगों की टोली ने विश्व प्रसिद्ध ईको पार्क ज.....

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -9सवेरे छह बजे हम बस द्वारा चल पड़े गंगासागर की ओर । कहा जाता है कि "सारे तीरथ बार-बार, गंगासा...
06/05/2026

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -9

सवेरे छह बजे हम बस द्वारा चल पड़े गंगासागर की ओर । कहा जाता है कि "सारे तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार" । ‌ये मान्यता है कि यहाँ की एक बार की यात्रा और डुबकी ही जीवन के सभी पापों को धोकर मोक्ष प्रदान करने के लिए पर्याप्त है। कोलकाता से गंगासागर की दूरी 110 किलोमीटर है जिसे बस द्वारा तय करने में लगभग 4 घंटे का समय लगता है। काकद्वीप के हरवुड पॉइंट जेट्टी पर बस ने हमें उतार दिया, क्योंकि काकद्वीप से वाहन आगे नहीं जा सकते। काकदीप से पानी के जहाज़ के द्वारा कोई 40 मिनट की यात्रा के बाद हम कचूबेरी घाट पहुँचे। जहाज का टिकिट मात्र आठ रुपए हैं। जहाज़ पर 40 मिनट की यह यात्रा बड़ी सुहावनी होती है। जल पक्षियों के झुंडों को देखने और दाना डालने में यह समय कब निकाल जाता है, पता ही नहीं चलता है। ये पक्षी भी अभ्यस्त है। दाना फेकते झुंड के झुंड पक्षी हवा में ही दाना पकड़ने के लिये झपटते हैं। बड़ा मनमोहक दृश्य होता है। इन जहाजों का आवागमन ज्वार-भाटे पर निर्भर करता है। ज्वार-भाटे के कारण जल धारा की दिशा बदलती रहती है। जब जल प्रवाह सही दिशा में होता है तभी ये जहाज़ परिचालित होते है। अन्यथा ये सही समय का इंतज़ार करते हैं।...

सवेरे छह बजे हम बस द्वारा चल पड़े गंगासागर की ओर । कहा जाता है कि “सारे तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार” । ‌ये मान्यता ह...

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -8रात 11-30 बजे गरीब रथ से चल सुबह कोई 9 बजे कलकत्ते के शालीमार स्टेशन उतर चार्टेड बस से होटल ...
03/05/2026

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -8

रात 11-30 बजे गरीब रथ से चल सुबह कोई 9 बजे कलकत्ते के शालीमार स्टेशन उतर चार्टेड बस से होटल में आ नहाने की तैयारी में जुट गये।कोलकाता बेहद खुशनुमा और रंगीन शहर है। हावड़ा स्टेशन से लोग जब हुगली नदी पर बना पुल पार कर शहर में दाखिल होते हैं, एक खुशी उनके चेहरे पर तैर जाती है। ऐसे ही इसे 'सिटी ऑफ़ जॉय' नहीं कहा जाता है। जीवन की आपाधापी में आज भी ये शहर आपको जीने के सही मायने बताता है। सांस्कृतिक राजधानी के साथ ही इस महानगर को 'ब्लैक सिटी ऑफ़ इंडिया' भी कहते हैं।...

रात 11-30 बजे गरीब रथ से चल सुबह कोई 9 बजे कलकत्ते के शालीमार स्टेशन उतर चार्टेड बस से होटल में आ नहाने की तैयारी में जुट ...

मेरी  पुरी-गंगासागर  यात्रा -7एक सच्चे यात्री की दिली इच्छा होती है और जब भी समय मिलता है, वह सड़क यात्रा की योजना बनाता...
01/05/2026

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -7

एक सच्चे यात्री की दिली इच्छा होती है और जब भी समय मिलता है, वह सड़क यात्रा की योजना बनाता है। रोमांचक और आनंद से भरपूर रोड ट्रिप जैसा साहसिक अनुभव और कोई नहीं हो सकता।रोमांचक रोड ट्रिप के लिए प्रसिद्ध मार्गों में से एक है पुरी से शुरू होकर कोणार्क तक का । ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध ये स्थान रास्ते में दर्शनीय स्थलों से भरपूर हैं और यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।...

एक सच्चे यात्री की दिली इच्छा होती है और जब भी समय मिलता है, वह सड़क यात्रा की योजना बनाता है। रोमांचक और आनंद से भरप....

30/04/2026

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -6

दुनिया में मनुष्य-जन्म एक ही बार होता है और जवानी भी केवल एक ही बार आती है। साहसी और मनस्वी नामक प्राणी को इस अवसर से हाथ नहीं धोना चाहिए। कमर बांध लो भावी घुमक्कड़ो! संसार तुम्हारे स्वागत के लिए बेकरार है।''पुरी से चिलिका तक का सफर बेहद खूबसूरत है। यात्रा के दौरान आपको हरे-भरे खेत, छोटे-छोटे गांव, नारियल के पेड़, और नीले आसमान के साथ सुंदर प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलते हैं। चिलिका झील के पास पहुंचते ही ठंडी हवा का अहसास होता है और झील का शांत पानी आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। चिलिका झील का इतिहास बेहद दिलचस्प है, । प्राचीन कथा अनुसार, चिलिका झील का निर्माण भगवान विष्णु ने देवी लक्ष्मी को शरण देने के लिए किया था, जिनका एक राक्षस पीछा कर रहा था। कुछ अन्य कथाओं के अनुसार, चिलिका झील का निर्माण देवी पार्वती के आंसुओं से हुआ था, जो अपने पुत्र गणेश की मृत्यु पर शोक मना रही थीं। उत्पत्ति चाहे जो भी हो, चिलिका झील अपने आसपास रहने वाले कई पीढ़ियों के लोगों के लिए जीवन और आजीविका का स्रोत बनी हुई है ।...

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा – 5अभी पिछले दिनों गुगल महाराज पर एक सज्जन की सुनो सुनो सुनो पोस्ट पढ कर मेरा मन मानो तो आकाश ...
27/04/2026

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा – 5

अभी पिछले दिनों गुगल महाराज पर एक सज्जन की सुनो सुनो सुनो पोस्ट पढ कर मेरा मन मानो तो आकाश की सैर करने लगा।अब इस 70 की उम्र तक आते आते ऐसा नशा हो चला है कि घर में बमुश्किल ही टिक पाने को दिल करता है ।इन नो दिनो का एक एक पल अविस्मरणीय यादों से भरा है । इच्छा तो है कि यदि भगवान की कृपा और दोस्तों का साथ रहा तो इससे लम्बी यात्रा जल्दी ही कर पाऊँगा ( वैसे हर वर्ष कम से कम चार या पांच यात्रा करता ही हूँ) । अचानक मन में किसी महानुभाव से सुनी बात याद हो आई : यदि माथे पर झुर्रियाँ पड़नी ही हैं, तो उन्हें हृदय पर न पड़ने दें। आत्मा को कभी बूढ़ा नहीं होना चाहिए। झुर्रियाँ तो बस उन जगहों की निशानी होती हैं जहाँ मुस्कानें रही हों।...

अभी पिछले दिनों गुगल महाराज पर एक सज्जन की सुनो सुनो सुनो पोस्ट पढ कर मेरा मन मानो तो आकाश की सैर करने लगा।अब इस 70 की ....

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -4जगन्नाथ मंदिर समुद्र किनारे पर है। मंदिर में एक सिंहद्वार है। जब तक सिंहद्वार में कदम अंदर न...
25/04/2026

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -4

जगन्नाथ मंदिर समुद्र किनारे पर है। मंदिर में एक सिंहद्वार है। जब तक सिंहद्वार में कदम अंदर नहीं जाता तब तक समंदर की लहरों की आवाज सुनाई देती है, लेकिन जैसे ही सिंहद्वार के अंदर कदम जाता है लहरों की आवाज गुम हो जाती है इसी तरह सिंहद्वार से निकलते वक्त वापसी में जैसे ही पहला कदम बाहर निकलता है, समंदर की लहरों की आवाज फिर आने लगती है। सिंहद्वार का ये रहस्य अब तक रहस्य ही बना हुआ है। जगन्नाथ मंदिर, पुरी में दर्शन का सबसे अच्छा समय सुबह (5:30 AM - 7:00 AM) मंगला आरती के बाद या देर शाम (8:00 PM - 10:00 PM) है, जब भीड़ कम होती है और माहौल शांत होता है। मंदिर मुख्य रूप से सुबह 5:30 से रात 11:30 बजे तक खुला रहता है। अक्टूबर से फरवरी के बीच जाना मौसम के लिहाज से सबसे अच्छा माना जाता है। मंदिर का ध्वज (पतित पावन बाना) 800 वर्षों से परंपरा के अनुसार 'चोला परिवार' के सदस्यों द्वारा प्रतिदिन शाम को सर्दियों में 5 बजे और गर्मियों में 6 बजे बदला जाता है। पुजारी 214 फीट ऊँचे मंदिर के शिखर पर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के, उल्टा चढ़कर पुराना झंडा उतारते हैं और नया लाल/केसरिया झंडा लगाते हैं। यह प्रक्रिया हर दिन होती है। मान्यता है कि एक दिन भी न बदलने पर मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो जाएगा।

जगन्नाथ मंदिर समुद्र किनारे पर है। मंदिर में एक सिंहद्वार है। जब तक सिंहद्वार में कदम अंदर नहीं जाता तब तक समंदर क.....

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -3पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में कुल 22 सीढ़ियां हैं, जिन्हें ‘बैसी पहाचा’भी कहा जाता है। मा...
24/04/2026

मेरी पुरी-गंगासागर यात्रा -3

पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में कुल 22 सीढ़ियां हैं, जिन्हें ‘बैसी पहाचा’भी कहा जाता है। माना जाता है कि ये सीढ़ियां मानव जीवन की बाईस कमजोरियों या बुराइयों का प्रतीक हैं, जिन पर विजय प्राप्त करके ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन इन सीढ़ियों में नीचे से तीसरी सीढ़ी सबसे अलग है। बाकी सीढ़ियों से इस सीढ़ी का रंग अलग है। मान्यताओं के अनुसार इस सीढ़ी में यम का वास है, यानी मृत्यु के देवता यमराज इस सीढ़ी में बसते हैं।...

पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में कुल 22 सीढ़ियां हैं, जिन्हें ‘बैसी पहाचा’भी कहा जाता है। माना जाता है कि ये सीढ़िया...

Address

Delhi
110085

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Yadram ki Kalam Se posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category