28/11/2025
प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार सिंह (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) उत्तर प्रदेश और देशभर के शिक्षाविदों का प्रेरक संदेश
16वीं ITHC अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दौरान बोह सल्ली घाटी में जो हिमालयी संस्कृति, लोक-परंपरा, सत्कार और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव मिला, उसने देशभर से आए शिक्षाविदों और विशेषज्ञों को गहराई से प्रभावित किया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रतिष्ठित विद्वान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि धारकंडी ने दिखा दिया कि पर्यटन केवल भ्रमण नहीं, बल्कि एक जीवित संस्कृति से संवाद है।
भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रोफेसरों व शोधकर्ताओं ने बोह सल्ली की मेजबानी की जमकर प्रशंसा करते हुए इसे भारत के ग्रामीण पर्यटन का प्रेरणादायक मॉडल बताया। अतिथियों का कहना था कि यहाँ मिला
स्थानीय लोगों का विनम्र व्यवहार, पारंपरिक हिमाचली लोक-संगीत, नरसिंघा और वीन-वाजा की मधुर धुनें, पहाड़ी जैविक भोजन का स्वाद, और प्रकृति के बीच बसे गांवों की सरल जीवन-शैली ने उन्हें ऐसा अनुभव कराया जो किसी भी पर्यटन स्थल से परे, आत्मा को छू लेने वाला था।
डॉ. अनिल कुमार सिंह ने विशेष रूप से बोह सल्ली के युवाओं की मेहनत, ट्रेक मार्गों की व्यवस्थाओं, स्थानीय खाद्य संस्कृति और सामुदायिक समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ की मेजबानी ने हिमालय के असली रूप को दुनिया के सामने रख दिया—यह सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि सीखने और समझने की यात्रा रही।
देशभर से आए शिक्षाविदों ने धारकंडी मॉडल को सतत पर्यटन + सांस्कृतिक संरक्षण + लोक–समुदाय की भागीदारी का सबसे शक्तिशाली उदाहरण बताया।
उनके शब्दों में बिहारी बोह की खूबसूरती, संस्कृति और लोगों का दिल से किया स्वागत ऐसा था कि हम इसकी तारीफ करते थके नहीं। यह अनुभव प्रेरणादायक है, जिसे विश्वभर में आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
यह प्रेरक संदेश न केवल धारकंडी के लोगों के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि आने वाले समय में स्थानीय युवाओं, शोधकर्ताओं और पर्यटन उद्यमियों के लिए नई दिशा और नया उत्साह भी लेकर आया है।