05/06/2014
बस बचा खुचा हमारे पास एक
आसमान है
जिसको रोज रात देखकर ये तसल्ली कर लेते हैं की
वो वहीँ आसमान है जो तुम्हारे ऊपर है
मुट्ठियों में भर लेते है हर रात
तुम्हारे शहर से आने वाली हवा
वो हवा, जो उतरने से मना कर देती है मेरे फेफड़ों में
तुम्हारी तरह ये कहते हुए की
"मुझे सिगरेट की गंध से नफरत है"
कुछ बासी उखड़ी बेढब सी कवितायेँ हैं
जिनमे तुमको तुमसे चुराकर रक्खा है हमने
शाम किसी छत पर बैठकर खुदको सुनाने के लिए
अलमारियों के बीच, कहीं किसी कोने में
जिन्दा है एक ओल्ड मोंक की बोतल
जिसको तय करना है मेरे हलक से एक रास्ता
आंसू बन ने के लिए
हथेलियों में बाकी है
अभी मेरे किस्मत की बागी केंचुलियाँ
जिनके टुकड़े ढूँढ ढूंढ कर शायद तुम्हारी किस्मत
मिल जाये मुझसे
बस बचा खुचा इतना ही हैं मेरे पास
और हाँ तुम्हारी दी हुई एक डायरी भी
जिसमे दर्ज है मेरी बर्बादी का अफसाना... :)