31/05/2026
**स्विच बदल दें**
शर्मा जी 68 साल के हो गए। पूरी कॉलोनी में उनकी मिसाल दी जाती थी। PSU में 40 साल नौकरी, एक-एक पैसा जोड़कर घर बनाया, बेटे को IIT भेजा, बेटी की धूमधाम से शादी की। आज उनके पास अपना मकान है और 3 करोड़ की FD, PPF, म्यूचुअल फंड।
*कागज़ पर वो करोड़पति थे। असल ज़िंदगी में?*
मई की रात 2 बजे गर्मी से उनकी आँख खुली। पंखा चल रहा था, AC बंद था। _"एक घंटे बाद बंद कर देता हूँ, वरना बिल बहुत आएगा,"_ बड़बड़ाते हुए उन्होंने करवट बदली। पसीने से कुर्ता भीग गया था।
अगली सुबह घुटने में दर्द उठा। डॉक्टर ने कहा, _"शर्मा जी, नी रिप्लेसमेंट करा लीजिए। 6 महीने में दौड़ने लगेंगे।"_ शर्मा जी ने रिपोर्ट बैग में रख ली। _"अभी तो चल रहा हूँ। 4-5 लाख खर्च हो जाएंगे। रहने दो।"_ बैंक में 3 करोड़ थे, पर मन में डर था - _"कल को कुछ हो गया तो?"_
बेटा अमेरिका से आया। _"पापा, चलो केदारनाथ चलते हैं। आपने हमेशा कहा था जाना है। बिज़नेस क्लास की टिकट करा देता हूँ, घुटनों में दर्द है आपको।"_
शर्मा जी बिदक गए। _"पागल है क्या? 80 हज़ार एक टिकट की? स्लीपर में चले जाएंगे। ट्रेन भी तो वहीं पहुँचाती है।"_ 12 घंटे स्लीपर में, दर्द से रातभर कराहते रहे। केदारनाथ के दर्शन दूर से ही किए। सीढ़ी नहीं चढ़ पाए।
वो हर खुशी को 'कल' पर टालते थे। FD का ब्याज आता, उसी में घर चलाते। मूलधन को छूना पाप लगता। _"बच्चों के लिए रखना है।"_ बेटा 45 का हो गया था, गूगल में VP था। उसे पैसों की ज़रूरत नहीं थी। उसे ज़रूरत थी कि पापा हँसते हुए देखें।
एक दिन वृद्धाश्रम में उनके दोस्त वर्मा जी मिले। वर्मा जी ने हाल ही में स्विट्ज़रलैंड घूमकर आए थे। _"शर्मा, 72 का हूँ। कल का क्या भरोसा? मैंने 'खुशी वाला फंड' बनाया है। 20 लाख अलग रखे हैं। नियम एक ही है - ये सिर्फ़ खर्च करने के लिए हैं। बचाने के लिए नहीं। इससे मैं हर साल एक देश देखता हूँ।"_
शर्मा जी को झटका लगा। _"पर वर्मा जी, अगर पैसा खत्म हो गया तो? अस्पताल का खर्च?"_
वर्मा जी हँसे। _"अरे भाई, पैसा दो बकेट में रखो। Bucket A - बुढ़ापे की सिक्योरिटी, इलाज, घर खर्च। उसे मत छुओ। Bucket B - शौक, घूमना, AC, बिज़नेस क्लास। ये उड़ाने के लिए है। जब दिमाग को पता होता है कि सिक्योरिटी वाला पैसा सेफ है, तो खर्च करने में डर नहीं लगता।"_
उस रात शर्मा जी सो नहीं पाए। 40 साल तक दिमाग का स्विच 'SAVE' पर था। रिटायरमेंट के दिन कोई बोला नहीं कि _"अब इसे 'SPEND' पर कर दो।"_ वो पेड़ को काटने जैसा लगता था जिसे पूरी ज़िंदगी सींचा।
अगली सुबह उन्होंने पहला काम किया। बैंक गए। 15 लाख का नया FD तुड़वाकर 'शर्मा जी खुशी खाता' खोला। घर आकर बेटे को फोन किया। _"बुक कर टिकट। बिज़नेस क्लास। अगले हफ्ते केदारनाथ जा रहे हैं। और हाँ, हेलीकॉप्टर से।"_
बेटा चौंका, फिर रो पड़ा।
ऑपरेशन कराया। नया घुटना, नया जीवन। AC अब रातभर चलता है। _"मैंने 40 साल कमाए हैं, अब आराम खरीदने का हक़ है।"_
दिवाली पर उन्होंने वसीयत बदली। 50% बच्चों को, 30% 'शर्मा जी खुशी खाते' में, 20% वृद्धाश्रम को दान। बेटे से कहा, _"बेटा, तेरे लिए सबसे बड़ी विरासत मेरा बैंक बैलेंस नहीं, मेरी हँसी है। मैं अभाव में मरूँगा तो तू ज़िंदगी भर गिल्टी रहेगा कि पापा ने हमारे लिए खुद को मार लिया।"_
आज 75 साल के शर्मा जी गोवा में बीच पर बैठे हैं। हाथ में नारियल पानी, चेहरे पर सुकून। *उन्होंने आर्थिक दौड़ 40 साल पहले जीत ली थी। ज़िंदगी की दौड़ अब जीत रहे हैं।*
क्योंकि पैसा अगर जीते जी खुशी न दे, तो वो कफ़न में जेब नहीं होती।
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*👉 शिक्षा*
1. *'SAVE' का स्विच 'SPEND' पर बदलो* - बचत का मकसद खर्च करके जीना है, तिजोरी भरना नहीं।
2. *दो बकेट बनाओ* - एक सुरक्षा के लिए, दूसरा खुशी के लिए। जब सुरक्षा पक्की हो, तो खर्च में पाप नहीं लगता।
3. *बच्चों को विरासत नहीं, यादें दो* - आपके 3 करोड़ से ज़्यादा उन्हें आपके साथ बिताए 3 दिन याद रहेंगे।
4. *कल का डर आज को मत मारो* - 105 साल जीने के डर में 70 साल के अच्छे दिन बर्बाद मत करो।
5. *खुद को अनुमति दो* - AC, बिज़नेस क्लास, इलाज - ये खर्च नहीं, आपकी 40 साल की मेहनत का इनाम है।
*🌼 स्विच बदल दे 🌼*
40 साल 'बचत' का बटन दबाया,
पाई-पाई जोड़ी, खुद को भुलाया।
आज तिजोरी भरी है, पर मन खाली,
AC बंद है, और साँसों में गर्मी वाली।
बेटा कहे 'पापा उड़ो बिज़नेस क्लास',
बाप कहे 'स्लीपर भी तो पहुँचाएगा पास'।
घुटना माँगे नया, बैंक कहे 'हाँ' है,
पर दिल बोले 'नहीं', कल का डर वहाँ है।
बस अब बहुत हुआ, स्विच बदल दे बंदे,
'खुशी वाला खाता खोल कर ले कुछ खर्चे।
दो बकेट बना ले - एक सेफ, एक उड़ाने को,
ज़िंदगी मिली है जीने को, ना तिजोरी बढ़ाने को।