04/01/2026
📜 Nanda Raj Jaat
नंदा राज जात उत्तराखंड का एक बहुत प्राचीन, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व/यात्रा (यात्रा-यात्रा) है। यह राजजात या देवयात्रा कहलाती है, जिसका अर्थ है देवी का यात्रा/यात्रा पर जाना। यह यात्रा माँ नंदा देवी को समर्पित है, जिन्हें इस क्षेत्र की मुख्य देवी/मूल देवी माना गया है।
🕉️ महत्त्व और पौराणिक कथा
🙏 माँ नंदा देवी को पुराणों और लोक मान्यताओं में भगवान शिव की पत्नी के रूप में माना जाता है और वे देवभूमि उत्तराखंड की कुलदेवी/इष्टदेवी मानी जाती हैं।
इस यात्रा का प्रतीकात्मक अर्थ है:
UK Digital
देवी का मायके (माता के घर) से ससुराल (कैलाश/शिव के घर) की ओर प्रस्थान।
इसे माँ की विदाई यात्रा की तरह देखा जाता है।
UK Digital
ऐसा माना जाता है कि देवी अपने मायके नौटी गाँव (कर्णप्रयाग के पास) से विदा होकर रूपकुंड/होमकुंड तक पैदल जाती हैं।
Glorious Uttarakhand
🗓️ समय और अंतराल
📍 यह यात्रा लगभग हर 12 वर्षों में आयोजित होती है।
📍 पिछली यात्रा 2014 में हुई थी और अगली इस वर्ष 2026 में आयोजित होने की तैयारी है।
लोक मान्यता के अनुसार यह यात्रा हिमालय की कठिन ऊँची चढ़ाइयों, घाटियों और सुंदर प्राकृतिक मार्गों से होकर गुजरती है — इसलिए इसे विश्व की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित तीर्थयात्राओं में से एक भी कहा जाता है।
Glorious Uttarakhand
🛕 यात्रा का मार्ग (Route)
🚶♀️ यात्रा करीब 280 किलोमीटर लंबा है और लगभग 20-22 दिनों में पूरा होता है।
मुख्य मार्ग:
👉 नौटी गाँव (शुरू) → पैदल-पर्वतीय रास्ते → रोपकुंड → होमकुंड (अंतिम स्थान)।
Glorious Uttarakhand
Glorious Uttarakhand
🎎 यात्रा का सांस्कृतिक महत्त्व
✔ स्थानीय लोग पारंपरिक पगड़ी, लोक संगीत, मंत्र, भजन और पूजा-अर्चना के साथ इस यात्रा में भाग लेते हैं।
✔ रास्ते में देवी की दोली (धार्मिक प्रतिमा) को सजी-धजी ले जाया जाता है।
✔ चार-सिंघा (चार सींग वाला भेड़) यात्रा का नेतृत्व करता है — जिसे विशेष पूजा-यज्ञ के बाद मुक्त किया जाता है।
✔ यह यात्रा समुदाय, संस्कृति, आस्था और पहाड़ी पहचान को जोड़ने का एक बड़ा माध्यम है।
🌿 भौगोलिक और प्राकृतिक पहलू
📍 यह यात्रा पहाड़ी, जंगल, ग्लेशियर, घाटी और नदी पार करते हुए गुजरती है — इसलिए तीर्थयात्रा के साथ एक लंबा हाइकिंग अनुभव भी बनती है।
Glorious Uttarakhand
🧠 संस्कृति एवं लोक विश्वास
➡ “जात” शब्द का अर्थ है पर्व/यात्रा।
➡ कई गाँवों में हर साल छोटी-छोटी जातें होती हैं — लेकिन राजजात हर 12 साल में ही बड़ा पैमाने पर होता है।