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Discover the Magic of Agra!Step into the pages of history and experience the timeless beauty of Agra, home to the iconic...
06/05/2025

Discover the Magic of Agra!
Step into the pages of history and experience the timeless beauty of Agra, home to the iconic Taj Mahal – a symbol of eternal love and one of the Seven Wonders of the World!

From the majestic Agra Fort to the serene Mehtab Bagh and the exquisite Itmad-ud-Daulah's Tomb, every corner of this city whispers stories of a grand Mughal past.

Must-Do in Agra:

Witness the Taj Mahal at sunrise

Stroll through Mughal gardens

Savor authentic Mughlai cuisine

Shop for intricate marble handicrafts

Pack your bags and get ready for a journey through time and beauty!

Agra is a city in northern India, famous for being the location of the Taj Mahal, a stunning white marble mausoleum buil...
06/05/2025

Agra is a city in northern India, famous for being the location of the Taj Mahal, a stunning white marble mausoleum built by Mughal Emperor Shah Jahan in memory of his wife Mumtaz Mahal. Here are some interesting facts about Agra:

1. *Taj Mahal*: The Taj Mahal is one of the Seven Wonders of the World and a UNESCO World Heritage Site. It's a symbol of love and a testament to Mughal architecture.

2. *Rich History*: Agra has a rich history dating back to the Mughal Empire. It was the capital of the Mughal Empire during the 16th and 17th centuries.

3. *Architectural Marvels*: Apart from the Taj Mahal, Agra is home to other architectural marvels like the Agra Fort, Fatehpur Sikri, and Itmad-Ud-Daulah's Tomb.

4. *Cultural Heritage*: Agra is known for its cultural heritage, including traditional crafts like marble work, handicrafts, and leather goods.

5. *Food*: Agra is famous for its local cuisine, including dishes like petha (a sweet delicacy), dalmoth, and chaat items.

6. *Tourism*: Agra is a popular tourist destination, attracting millions of visitors from around the world every year.

Would you like to know more about Agra's history, culture, or tourist attractions?

यह स्टेशन कोन से राज्य मे पड़ता हैं
04/03/2025

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26/02/2025

My Visitor

Aralvaimozhi, Kanyakumari 💚😍
02/09/2022

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Vizag Railway Station 😍
02/09/2022

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Vizag Beach Road.
02/09/2022

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सुबह सुबह गांव देहात की खूबसूरत दृश्य
02/09/2022

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Dream ❤Ladakh Ride 😍Riders Show The Respect To Their Bike ❤What a View 😍
17/05/2022

Dream ❤
Ladakh Ride 😍
Riders Show The Respect To Their Bike ❤
What a View 😍

Haridwar Darshan
13/04/2022

Haridwar Darshan

बिहार का गौरव एवं जमुई का धरोहर  है बाबा कोकिलचंद धाम गंगरा (गिद्धौर)***गंगरा गाँव की स्थापना काल से ही बाबा कोकिलचंद का...
03/03/2022

बिहार का गौरव एवं जमुई का धरोहर है
बाबा कोकिलचंद धाम गंगरा (गिद्धौर)*
**
गंगरा गाँव की स्थापना काल से ही बाबा कोकिलचंद का त्रिसूत्रीय संदेश का अनुपालन करता है यह गाँव । बाबा कोकिलचंद की पूजा अर्चना गंगरा के साथ साथ बिहार के दर्जनों गाँव में भक्तिभाव से होते आ रहे हैं ।
यहाँ बाबा कोकिलचंद की प्राचीन पिंड स्थापित है ।
स्थानीय लोगों द्वारा 2009 से बाबा का भव्य मंदिर निर्माण कार्य शुभारंभ किया जो निर्माणाधीन है ।
बाबा कोकिलचंद का त्रिसूत्रीय संदेश निम्नलिखित हैं !
1* शराब से दूर रहना
2* नारी का सम्मान करना
3*अन्न की रक्षा करना । समय समय पर कई प्रमुख TVचेनल, पोर्टल प्रिंट मिडिया के माध्यम से गंगरा गाँव की संस्कृति एवं संस्कार की खबर प्रसारित होते ही रहता है ।
आज News18 टीम एवं जमुई के वरिष्ठ संवादाता का आगमन हुआ कई लोगों से साक्षात्कार लिया गया । भू मंत्र परिवार से कुछ विशेष सहयोग की अपेक्षा है ।
अगर माननीय मुख्य मंत्री बिहार इस गाँव को गोद लेकर इसे आदर्श ग्राम घोषित करते हैं तो शराब बंदी ,नारी शशक्तिकरण , आदि सरकारी नियम एवं कानून को बल मिलेगा । एवं शराब बंदी बिहार को मील का पत्थर साबित होगा ।
इस क्षेत्र में बाबा कोकिलचंद विचार मंच गंगरा ,गिद्धौर (जमुई) कई सालों से मुहिम चला रहा है ।
आयें हमसब मिलकर बाबा कोकिलचंद धाम गंगरा को धार्मिक पर्यटन के रुप में विकसित करने हेतू राज्य सरकार से पुनः अपील करें !
निवेदक
चुन चुन कुमार
शिक्षक एवं
संयोजक
बाबा कोकिलचंद विचार मंच गंगरा (जमुई) 9939638084

🚩सारे तीरथ बार-बार गंगा सागर एक बार जाने क्यों🚩✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤गंगा सागर को तीर्थों का पिता कहा जाता है, कहने का ता...
15/01/2022

🚩सारे तीरथ बार-बार गंगा सागर एक बार जाने क्यों🚩
✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤✤

गंगा सागर को तीर्थों का पिता कहा जाता है, कहने का तात्पर्य है कि गंगा सागर का अन्य तीर्थों की अपेक्षा अत्यधिक महत्व है। शायद यही कारण है कि जन साधारण में यह कहावत बहुत प्रचलित है कि- ''सब तीरथ बार-बार, गंगा सागर एक बार।'

' गंगा जिस स्थान पर समुद्र में मिलती है, उसे गंगा सागर कहा गया है। गंगा सागर एक बहुत सुंदर वन द्वीप समूह है जो बंगाल की दक्षिण सीमा में बंगाल की खाड़ी पर स्थित है। प्राचीन समय में इसे पाताल लोक के नाम से भी जाना जाता था। कलकत्ते से यात्री प्रायः जहाज में गंगा सागर जाते हैं।

यहां मेले के दिनों में काफी भीड़-भाड़ व रौनक रहती है। लेकिन बाकी दिनों में शांति एवं एकांकीपन छाया रहता है। तीर्थ स्थान-सागर द्वीप में केवल थोड़े से साधु ही रहते हैं। यह अब वन से ढका और प्रायः जनहीन है। इस सागर द्वीप में जहां गंगा सागर मेला होता है, वहां से एक मील उत्तर में वामनखल स्थान पर एक प्राचीन मंदिर है।

इस समय जहां गंगा सागर पर मेला लगता है, पहले यहीं गंगाजी समुद्र में मिलती थी, किंतु अब गंगा का मुहाना पीछे हट गया है। अब गंगा सागर के पास गंगाजी की एक छोटी धारा समुद्र से मिलती है। आज यहां सपाट मैदान है और जहां तक नजर जाती है वहां केवल घना जंगल।

मेले के दिनों में गंगा के किनारे पर मेले के स्थान बनाने के लिए इन जंगलों को कई मीलों तक काट दिया जाता है। गंगा सागर का मेला मकर संक्रांति को लगता है। खाने-पीने के लिए होटल, पूजा-पाठ की सामग्री व अन्य सामानों की भी बहुत-सी दुकानें खुल जाती हैं।

सारे तीर्थों का फल अकेले गंगा सागर में मिल जाता है। संक्रांति के दिन गंगा सागर में स्नान का महात्म्य सबसे बड़ा माना गया है। प्रातः और दोपहर स्नान और मुण्डन-कर्म होता है। यहां पर लोग श्राद्ध व पिण्डदान भी करते हैं।

कपिल मुनि के मंदिर में जाकर दर्शन करते हैं, इसके बाद लोग लौटते हैं ओर पांचवें दिन मेला समाप्त हो जाता है। गंगा सागर से कुछ दूरी पर कपिल ऋषि का सन् 1973 में बनाया गया नया मंदिर है जिसके बीच में कपिल ऋषि की मूर्ति है।

उस मूर्ति के एक तरफ राजा भगीरथ को गोद में लिए हुए गंगाजी की मूर्ति है तथा दूसरी तरफ राजा सगर तथा हनुमान जी की मूर्ति है। इसके अलावा यहां सांखय योग के आचार्य कपिलानंद जी का आश्रम, महादेव मंदिर, योगेंद्र मठ, शिव शक्ति-महानिर्वाण आश्रम और भारत सेवाश्रम संघ का विशाल मंदिर भी हैं।

रामायण में एक कथा मिलती है जिसके अनुसार कपिल मुनि किसी अन्य स्थान पर तपस्या कर रहे थे। ऐसे ही समय में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा सगर एक अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान करने लगे। उनके अश्वमेध यज्ञ से डरकर इंद्र ने राक्षस रूप धारण कर यज्ञ के अश्व को चुरा लिया और पाताल लोक में ले जाकर कपिल के आश्रम में बांध दिया।

राजा सगर की दो पत्नियां थीं- केशिनी और सुमति। केशिनी के गर्भ से असमंजस पैदा हुआ और सुमति के गर्भ से साठ हजार पुत्र। असमंजस बड़ा ही उद्धत प्रकृति का था। वह प्रजा को बहुत पीड़ा देता था। अतः सगर ने उसे अपने राज्य से निकाल दिया था।

अश्वमेध का घोड़ा चुरा लिये जाने के कारण सगर बड़ी चिंता में पड़ गये। उन्होंने अपने साठ हजार पुत्रों को अश्व ढूंढने के लिए कहा। साठों हजार पुत्र अश्व ढूंढते ढूंढते-ढूंढते पाताल लोक में पहुंच गये।

वहां उन लोगों ने कपिल मुनि के आश्रम में यज्ञीय अश्व को बंधा देखा। उन लोगों ने मुनि कपिल को ही चोर समझकर उनका काफी अपमान कर दिया। अपमानित होकर ऋषि कपिल ने सभी को शाप दिया- 'तुम लोग भस्म हो जाओ।

' शाप मिलते ही सभी भस्म हो गये। पुत्रों के आने में विलंब देखकर राजा सगर ने अपने पौत्र अंशुमान, जो असमंजस का पुत्र था, को पता लगाने के लिए भेजा। अंशुमान खोजते-खोजते पाताल लोक पहुंचा। वहां अपने सभी चाचाओं को भस्म रूप में परिणत देखा तो सारी स्थिति समझ गया।

उन्होंने कपिल मुनि की स्तुति कर प्रसन्न किया। कपिल मुनि ने उसे घोड़ा ले जाने की अनुमति दे दी और यह भी कहा कि यदि राजा सगर का कोई वंशज गंगा को वहां तक ले आये तो सभी का उद्धार हो जाएगा। अंशुमान घोड़ा लेकर अयोध्या लौट आया। यज्ञ समाप्त करने के बाद राजा सगर ने 30 हजार वर्षों तक राज्य किया और अंत में अंशुमान को राजगद्दी देकर स्वर्ग सिधार गये। अंशुमान ने गंगा को पृथ्वी पर लाने का काफी प्रयत्न किया, लेकिन सफल नहीं हो पाया। अंशुमान के पुत्र दिलीप ने दीर्घकाल तक तपस्या की।

लेकिन वह भी सफल नहीं हो पाया। दिलीप के पुत्र भगीरथ ने घोर तपस्या की। गंगा ने आश्वासन दिया कि मैं जरूर पृथ्वी पर आऊंगी, लेकिन जिस समय मैं स्वर्गलोक से पृथ्वी पर आऊंगी, उस समय मेरे प्रवाह को रोकने के लिए कोई उपस्थित होना चाहिए।

भगीरथ ने इसके लिए भगवान शिव को प्रसन्न किया। भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटा में धारण कर लिया। भगीरथ ने उन्हें पुनः प्रसन्न किया तो शिवजी ने गंगा को छोड़ दिया।

गंगा शिवजी के मस्तक से सात स्रोतों में भूमि पर उतरी। ह्रानिदी, पावनी और नलिनी नामक तीन प्रवाह पूर्व की ओर चल गये, वड.क्ष, सीता तथा सिंधु नामक तीन प्रवाह पश्चिम की ओर चले गये और अंतिम एक प्रवाह भगीरथ के बताए हुए मार्ग से चलने लगा।

भगीरथ पैदल गंगा के साथ नहीं चल सकते थे, अतः उन्हें एक रथ दिया गया। भगीरथ गंगा को लेकर उसी जगह आये जहां उनके प्रपितामह आदि भस्म हुए थे। गंगा सबका उद्धार करती हुई सागर में मिल गयी। भगीरथ द्वारा लाये जाने के कारण गंगा का एक नाम भागीरथी भी पड़ा।

जहां भगीरथ के पितरों का उद्धार हुआ, वही स्थान सागर द्वीप या गंगासागर कहलाता है। गंगा सागर से कुछ दूरी पर कपिल ऋषि का सन् 1973 में बनाया गया नया मंदिर है जिसके बीच में कपिल ऋषि की मूर्ति है। उस मूर्ति के एक तरफ राजा भगीरथ को गोद में लिए हुए गंगाजी की मूर्ति है तथा दूसरी तरफ राजा सगर तथा हनुमान जी की मूर्ति हैं।🚩🚩
हर हर गंगे 🙏🙏

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All IN ONE ASSOCIATES Near Century Public School Bijwasan
Gurugram
122001

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