22/07/2022
नीति वैली रूट
जोशीमठ (10/07/2022)
किसने सोचा था इंडो चाइना बॉर्डर में भी ऐसी रोड देखने को मिलेगी, गढ़वाल में देखा जाए तो सबसे पहले बॉर्डर में रोड आई है जहा पे लोगो का पैतृक गांव है। रोड आने से बहुत कुछ बदल गया है गांव वालो का, अब घोड़े खच्चरों से समान लाद के नही जाना पड़ता, ना चलने की कोई आवश्यकता है। अब हर साल गांव के पूजा में भी जाना आसान हो गया और अब तो गांव में ही शादियों होने लग गई। ऐसा क्यों हो रहा, क्युकी रोड आ गई और अब जीवन आसान है और अब खुद नौजवान घर की तरफ लौट आए और अब खुद का होमस्टे चला रहे। रोजगार की भी कोई कमी नही है, लोन लेके नौजवान गाड़ी खरीद के लोकल में चला रहे, ऑर्गेनिक खेती करके देश विदेशों में अपने वहा की दालें, जड़ी बूटियां ऑनलाइन बेच रहे। देखते ही देखते गांव फिर से लोगो से भर रहा, जो घर खंडार थे आज फिर से हसी खुशी से गूंज रहे। बस यही तो फिर से करना है हमें, जिस चीज को छोड़ा था हमने फिर से वापिस लाना है।
यहीं तो है मेरे पेज का उद्देश्य, सबको एक जुट करना है। आज के नई पीढ़ी को समझना है की हमारे गांव कैसे थे और अब कैसे हो गए है, उनको ले जा के वहा दिखाना है जिंदगी कैसे जिया करते थे हमारे लोग। थोड़े दो कदम आप चलो, थोड़े दो कदम हम चलेंगे। बस ऐसे ही करके अपना पहाड़ और अपने लोग वापिस आयेंगे।
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