Haridwar - देवभूमि हरिद्वार उत्तराखंड

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Haridwar - देवभूमि हरिद्वार उत्तराखंड Haridwar देवभूमि हरिद्वार is an important Hindu pilgrimage site & Gateway to the Char Dham Yatra
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Haridwar देवभूमि हरिद्वार is the gateway to the four pilgrimages Char Dham Yatra of Uttarakhand (Gangotri, Yamunotri, Badrinath and Kedarnath). Haridwar is an important pilgrimage city and municipality in the Haridwar District of Uttarakhand, India. The River Ganges, after flowing for 253 kilometres (157 miles) from its source at Gaumukh at the edge of the Gangotri Glacier, enters the Indo-Ganget

ic Plains of North India for the first time at Haridwar, which gave the city its ancient name, Gangadwára. Haridwar - देवभूमि हरिद्वार is also your starting point on the journey to the sacred sources of the rivers Ganga and the Yamuna. According to legend, Prince Bhagirath performed penance here to salvage the souls of his ancestors who had perished due to sage Kapil’s curse. The penance was answered and the river Ganga trickled forth from Lord Shiva's locks and its bountiful water revived the sons of King Sagara. In the tradition of Bhagirath, devout Hindus stand in the sacred waters here, praying for salvation of their ancestors. Haridwar is regarded as one of the seven holiest places to Hindus. According to the Samudra manthan, Haridwar along with Ujjain, Nasik and Allahabad is one of four sites where drops of Amrit, the elixir of immortality, accidentally spilled over from the pitcher while being carried by the celestial bird Garuda. This is manifested in the Kumbh Mela or Kumbha Mela being celebrated every 3 years in one of the 4 places, and thus every 12 years in Haridwar. Amidst the Kumbha Mela, millions of pilgrims, devotees, and tourists congregate in Haridwar to perform ritualistic bathing on the banks of the river Ganges to wash away their sins to attain Moksha. Brahma Kund, the spot where the Amrit fell, is located at Har ki Pauri (literally, "footsteps of the Lord") and is considered to be the most sacred ghat of Haridwar. Haridwar is the headquarters and the largest city of the district. Today, the Haridwar city is developing beyond its religious importance, with the fast developing industrial estate of State Infrastructure and Industrial Development Corporation (SIDCUL), and the close by township of Bharat Heavy Electricals Limited in Ranipur, Uttarakhand as well as its affiliated ancillaries. Haridwar, Haridwar Tourism, Haridwar Uttarakhand, Haridwar Dehradun Nainital India, Haridwar Railway Station, Haridwar Packages, About Haridwar Etymology

In Sanskrit, Haridwar stands for Dwara of Hari or Gateway to God, where 'Hari' means God and 'Dwar' means Gate. In ancient times, the city was referred to as Gangadwára, the place where the Ganges descends to the plains. Haridwar is a vegetarian city by law, as well as an alcohol-free city as alcohol is banned in Haridwar.

हरिद्वार, उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले का एक पवित्र नगर तथा हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ है। यह नगर निगम बोर्ड से नियंत्रित ह...
20/06/2023

हरिद्वार, उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले का एक पवित्र नगर तथा हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ है। यह नगर निगम बोर्ड से नियंत्रित है। यह बहुत प्राचीन नगरी है। हरिद्वार हिन्दुओं के सात पवित्र स्थलों में से एक है। ३१३९ मीटर की ऊंचाई पर स्थित अपने स्रोत गोमुख (गंगोत्री हिमनद) से २५३ किमी की यात्रा करके गंगा नदी हरिद्वार में मैदानी क्षेत्र में प्रथम प्रवेश करती है, इसलिए हरिद्वार को 'गंगाद्वार' के नाम से भी जाना जाता है; जिसका अर्थ है वह स्थान जहाँ पर गंगाजी मैदानों में प्रवेश करती हैं। हरिद्वार का अर्थ "हरि (ईश्वर) का द्वार" होता है।

पश्चात्कालीन हिंदू धार्मिक कथाओं के अनुसार, हरिद्वार वह स्थान है जहाँ अमृत की कुछ बूँदें भूल से घड़े से गिर गयीं जब धन्वन्तरी उस घड़े को समुद्र मंथन के बाद ले जा रहे थे। ध्यातव्य है कि कुम्भ या महाकुम्भ से सम्बद्ध कथा का उल्लेख किसी पुराण में नहीं है। प्रक्षिप्त रूप में ही इसका उल्लेख होता रहा है। अतः कथा का रूप भी भिन्न-भिन्न रहा है। मान्यता है कि चार स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरी थीं। वे स्थान हैं:- उज्जैन, हरिद्वार, नासिक और प्रयाग। इन चारों स्थानों पर बारी-बारी से हर १२वें वर्ष महाकुम्भ का आयोजन होता है। एक स्थान के महाकुम्भ से तीन वर्षों के बाद दूसरे स्थान पर महाकुम्भ का आयोजन होता है। इस प्रकार बारहवें वर्ष में एक चक्र पूरा होकर फिर पहले स्थान पर महाकुम्भ का समय आ जाता है। पूरी दुनिया से करोड़ों तीर्थयात्री, भक्तजन और पर्यटक यहां इस समारोह को मनाने के लिए एकत्रित होते हैं और गंगा नदी के तट पर शास्त्र विधि से स्नान इत्यादि करते हैं।

एक मान्यता के अनुसार वह स्थान जहाँ पर अमृत की बूंदें गिरी थीं उसे हर की पौड़ी पर ब्रह्म कुण्ड माना जाता है। 'हर की पौड़ी' हरिद्वार का सबसे पवित्र घाट माना जाता है और पूरे भारत से भक्तों और तीर्थयात्रियों के जत्थे त्योहारों या पवित्र दिवसों के अवसर पर स्नान करने के लिए यहाँ आते हैं। यहाँ स्नान करना मोक्ष प्राप्त करवाने वाला माना जाता है।
हरिद्वार जिला, सहारनपुर डिवीजनल कमिशनरी के भाग के रूप में २८ दिसम्बर १९८८ को अस्तित्व में आया। २४ सितंबर १९९८ के दिन उत्तर प्रदेश विधानसभा ने 'उत्तर प्रदेश पुनर्गठन विधेयक, १९९८' पारित किया, अंततः भारतीय संसद ने भी 'भारतीय संघीय विधान - उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम २०००' पारित किया और इस प्रकार ९ नवम्बर २०००, के दिन हरिद्वार भारतीय गणराज्य के २७वें नवगठित राज्य उत्तराखंड (तब उत्तरांचल), का भाग बन गया।

आज, यह अपने धार्मिक महत्त्व के अतिरिक्त भी, राज्य के एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र के रूप में, तेज़ी से विकसित हो रहा है। तेज़ी से विकसित होता औद्योगिक एस्टेट, राज्य ढांचागत और औद्योगिक विकास निगम, SIDCUL (सिडकुल), भेल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) और इसके सम्बंधित सहायक इस नगर के विकास के साक्ष्य हैं।

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हरिद्वार, उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले का एक पवित्र नगर तथा हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ है। यह नगर निगम बोर्ड से नियंत्रित ह...
08/08/2022

हरिद्वार, उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले का एक पवित्र नगर तथा हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ है। यह नगर निगम बोर्ड से नियंत्रित है। यह बहुत प्राचीन नगरी है। हरिद्वार हिन्दुओं के सात पवित्र स्थलों में से एक है। ३१३९ मीटर की ऊंचाई पर स्थित अपने स्रोत गोमुख (गंगोत्री हिमनद) से २५३ किमी की यात्रा करके गंगा नदी हरिद्वार में मैदानी क्षेत्र में प्रथम प्रवेश करती है, इसलिए हरिद्वार को 'गंगाद्वार' के नाम से भी जाना जाता है; जिसका अर्थ है वह स्थान जहाँ पर गंगाजी मैदानों में प्रवेश करती हैं। हरिद्वार का अर्थ "हरि (ईश्वर) का द्वार" होता है।
पश्चात्कालीन हिंदू धार्मिक कथाओं के अनुसार, हरिद्वार वह स्थान है जहाँ अमृत की कुछ बूँदें भूल से घड़े से गिर गयीं जब धन्वन्तरी उस घड़े को समुद्र मंथन के बाद ले जा रहे थे। ध्यातव्य है कि कुम्भ या महाकुम्भ से सम्बद्ध कथा का उल्लेख किसी पुराण में नहीं है। प्रक्षिप्त रूप में ही इसका उल्लेख होता रहा है। अतः कथा का रूप भी भिन्न-भिन्न रहा है। मान्यता है कि चार स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरी थीं। वे स्थान हैं:- उज्जैन, हरिद्वार, नासिक और प्रयाग। इन चारों स्थानों पर बारी-बारी से हर १२वें वर्ष महाकुम्भ का आयोजन होता है। एक स्थान के महाकुम्भ से तीन वर्षों के बाद दूसरे स्थान पर महाकुम्भ का आयोजन होता है। इस प्रकार बारहवें वर्ष में एक चक्र पूरा होकर फिर पहले स्थान पर महाकुम्भ का समय आ जाता है। पूरी दुनिया से करोड़ों तीर्थयात्री, भक्तजन और पर्यटक यहां इस समारोह को मनाने के लिए एकत्रित होते हैं और गंगा नदी के तट पर शास्त्र विधि से स्नान इत्यादि करते हैं।
एक मान्यता के अनुसार वह स्थान जहाँ पर अमृत की बूंदें गिरी थीं उसे हर की पौड़ी पर ब्रह्म कुण्ड माना जाता है। 'हर की पौड़ी' हरिद्वार का सबसे पवित्र घाट माना जाता है और पूरे भारत से भक्तों और तीर्थयात्रियों के जत्थे त्योहारों या पवित्र दिवसों के अवसर पर स्नान करने के लिए यहाँ आते हैं। यहाँ स्नान करना मोक्ष प्राप्त करवाने वाला माना जाता है।
हरिद्वार जिला, सहारनपुर डिवीजनल कमिशनरी के भाग के रूप में २८ दिसम्बर १९८८ को अस्तित्व में आया। २४ सितंबर १९९८ के दिन उत्तर प्रदेश विधानसभा ने 'उत्तर प्रदेश पुनर्गठन विधेयक, १९९८' पारित किया, अंततः भारतीय संसद ने भी 'भारतीय संघीय विधान - उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम २०००' पारित किया और इस प्रकार ९ नवम्बर २०००, के दिन हरिद्वार भारतीय गणराज्य के २७वें नवगठित राज्य उत्तराखंड (तब उत्तरांचल), का भाग बन गया।
आज, यह अपने धार्मिक महत्त्व के अतिरिक्त भी, राज्य के एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र के रूप में, तेज़ी से विकसित हो रहा है। तेज़ी से विकसित होता औद्योगिक एस्टेट, राज्य ढांचागत और औद्योगिक विकास निगम, SIDCUL (सिडकुल), भेल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) और इसके सम्बंधित सहायक इस नगर के विकास के साक्ष्य हैं।
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Haridwar Tourism - देवभूमि हरिद्वार उत्तराखंड

Haridwar देवभूमि हरिद्वार is the gateway to the four pilgrimages Char Dham Yatra of Uttarakhand (Gangotri, Yamunotri, Badrinath and Kedarnath). Haridwar is an important pilgrimage city and municipality in the Haridwar District of Uttarakhand, India. The River Ganges, after flowing for 253 kilometres (157 miles) from its source at Gaumukh at the edge of the Gangotri Glacier, enters the Indo-Gangetic Plains of North India for the first time at Haridwar, which gave the city its ancient name, Gangadwára.

Haridwar - देवभूमि हरिद्वार is also your starting point on the journey to the sacred sources of the rivers Ganga and the Yamuna. According to legend, Prince Bhagirath performed penance here to salvage the souls of his ancestors who had perished due to sage Kapil’s curse. The penance was answered and the river Ganga trickled forth from Lord Shiva's locks and its bountiful water revived the sons of King Sagara. In the tradition of Bhagirath, devout Hindus stand in the sacred waters here, praying for salvation of their ancestors.

Haridwar is regarded as one of the seven holiest places to Hindus. According to the Samudra manthan, Haridwar along with Ujjain, Nasik and Allahabad is one of four sites where drops of Amrit, the elixir of immortality, accidentally spilled over from the pitcher while being carried by the celestial bird Garuda. This is manifested in the Kumbh Mela or Kumbha Mela being celebrated every 3 years in one of the 4 places, and thus every 12 years in Haridwar. Amidst the Kumbha Mela, millions of pilgrims, devotees, and tourists congregate in Haridwar to perform ritualistic bathing on the banks of the river Ganges to wash away their sins to attain Moksha. Brahma Kund, the spot where the Amrit fell, is located at Har ki Pauri (literally, "footsteps of the Lord") and is considered to be the most sacred ghat of Haridwar.

Haridwar is the headquarters and the largest city of the district. Today, the Haridwar city is developing beyond its religious importance, with the fast developing industrial estate of State Infrastructure and Industrial Development Corporation (SIDCUL), and the close by township of Bharat Heavy Electricals Limited in Ranipur, Uttarakhand as well as its affiliated ancillaries.