Indian Tourism

Indian Tourism Complete travel guide for tourist destinations in India.

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https://www.youtube.com/watch?v=zp4ieE0y0dY
20/02/2014

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kamal kishore ji nagar,bhagwat, katha,bhajan, songs Great speech of Jagat Guru sankara charya said by shree grudeva, malawa mati ke vard putra shree kamal ki...

INDORE RAJWADHA
10/02/2014

INDORE RAJWADHA

Krishna Janmashtami (Devanagari कृष्ण जन्माष्टमी kṛṣṇa janmāṣṭami), also known as Krishnashtami, Saatam Aatham, Gokulash...
28/08/2013

Krishna Janmashtami (Devanagari कृष्ण जन्माष्टमी kṛṣṇa janmāṣṭami), also known as Krishnashtami, Saatam Aatham, Gokulashtami, Ashtami Rohini, Srikrishna Jayanti, Sree Jayanti or sometimes merely as Janmashtami, is an annual commemoration of the birth of the Hindu deity Krishna, the eighth avatar of Vishnu.[1]

The festival is celebrated on the eighth day (Ashtami) of the Krishna Paksha (dark fortnight) of the month of Bhadrapada (August–September; However, in both traditions it is the same day. So, we have works like Vishnudharmottara Purana saying Krishna Ashtami is in the Bhadrapada month and Skanda Purana stating that it falls in the month of Shravana) in the Hindu calendar. Rasa lila, dramatic enactments of the life of Krishna, are a special feature in regions of Mathura and Vrindavan, and regions following Vaishnavism in Manipur.[2] While the Rasa lila re-creates the flirtatious aspects of Krishna's youthful days, the Dahi Handi celebrate God's playful and mischievous side, where teams of young men form human towers to reach a high-hanging pot of butter and break it. This tradition, also known as uriadi, is a major event in Tamil Nadu on Gokulashtami.

पौराणिक प्रसंगराखी का त्योहार कब शुरू हुआ यह कोई नहीं जानता। लेकिन भविष्य पुराण में वर्णन मिलता है कि देव और दानवों में ...
21/08/2013

पौराणिक प्रसंग

राखी का त्योहार कब शुरू हुआ यह कोई नहीं जानता। लेकिन भविष्य पुराण में वर्णन मिलता है कि देव और दानवों में जब युद्ध शुरू हुआ तब दानव हावी होते नज़र आने लगे। भगवान इन्द्र घबरा कर बृहस्पति के पास गये। वहां बैठी इन्द्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी। उन्होंने रेशम का धागा मन्त्रों की शक्ति से पवित्र करके अपने पति के हाथ पर बाँध दिया। संयोग से वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था। लोगों का विश्वास है कि इन्द्र इस लड़ाई में इसी धागे की मन्त्र शक्ति से ही विजयी हुए थे। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बाँधने की प्रथा चली आ रही है। यह धागा धन,शक्ति, हर्ष और विजय देने में पूरी तरह समर्थ माना जाता है।[20]

स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में रक्षाबन्धन का प्रसंग मिलता है। कथा कुछ इस प्रकार है- दानवेन्द्र राजा बलि ने जब 100 यज्ञ पूर्ण कर स्वर्ग का राज्य छीनने का प्रयत्न किया तो इन्द्र आदि देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। तब भगवान वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेष धारण कर राजा बलि से भिक्षा माँगने पहुँचे। गुरु के मना करने पर भी बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी। भगवान ने तीन पग में सारा आकाश पाताल और धरती नापकर राजा बलि को रसातल में भेज दिया। इस प्रकार भगवान विष्णु द्वारा बलि राजा के अभिमान को चकनाचूर कर देने के कारण यह त्योहार बलेव नाम से भी प्रसिद्ध है।[21] कहते हैं एक बार बाली रसातल में चला गया तब बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया।[ङ] भगवान के घर न लौटने से परेशान लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय बताया। उस उपाय का पालन करते हुए लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे रक्षाबन्धन बांधकर अपना भाई बनाया और अपने पति भगवान बलि को अपने साथ ले आयीं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। विष्णु पुराण के एक प्रसंग में कहा गया है कि श्रावण की पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने हयग्रीव के रूप में अवतार लेकर वेदों को ब्रह्मा के लिये फिर से प्राप्त किया था। हयग्रीव को विद्या और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

Aao milke hum salam kare jinko…Jinke hisse me yeh mukaam hota he.Khush nashib to veer vo hote he…Jinka khoon Desh ke kam...
15/08/2013

Aao milke hum salam kare jinko…
Jinke hisse me yeh mukaam hota he.
Khush nashib to veer vo hote he…
Jinka khoon Desh ke kam aata he.

**Happy Independence Day 2013**

ॐकारेश्वर एक हिन्दू मंदिर है। यह मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। यह नर्मदा नदी के बीच मन्धाता या शिवपुरी नामक द्...
03/08/2013

ॐकारेश्वर एक हिन्दू मंदिर है। यह मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। यह नर्मदा नदी के बीच मन्धाता या शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगओं में से एक है। यह यहां के मोरटक्का गांव से लगभग 12 मील (20 कि.मी.) दूर बसा है। यह द्वीप हिन्दू पवित्र चिन्ह ॐ के आकार में बना है। यहां दो मंदिर स्थित हैं।

ॐकारेश्वर
अमरेश्वर

ॐकारेश्वर का निर्माण नर्मदा नदी से स्वतः ही हुआ है। यह नदी भारत की पवित्रतम नदियों में से एक है, और अब इस पर विश्व का सर्वाधिक बड़ा बांध परियोजना का निर्माण हो रहा है।
ॐकारेश्वर में नर्मदा नदी


जिस ओंकार शब्द का उच्चारण सर्वप्रथम सृष्टिकर्ता विधाता के मुख से हुआ, वेद का पाठ इसके उच्चारण किए बिना नहीं होता है।

इस ओंकार का भौतिक विग्रह ओंकार क्षेत्र है। इसमें 68 तीर्थ हैं। यहाँ 33 करोड़ देवता परिवार सहित निवास करते हैं तथा 2 ज्योतिस्वरूप लिंगों सहित 108 प्रभावशाली शिवलिंग हैं। मध्यप्रदेश में देश के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। एक उज्जैन में महाकाल के रूप में और दूसरा ओंकारेश्वर में ममलेश्वर (अमलेश्वर) के रूप में विराजमान हैं।

भोले बाबा अमरनाथ की यह पवित्र गुफा कश्मीर घाटी के दक्षिण पूर्वी भाग में समुद्र तल से 12729 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। इस ...
21/07/2013

भोले बाबा अमरनाथ की यह पवित्र गुफा कश्मीर घाटी के दक्षिण पूर्वी भाग में समुद्र तल से 12729 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। इस गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। गुफा 11 मीटर ऊंची है। गुफा के ऊपरी ढलान पर जमा बर्फ तेज़ धूप से पिघलती है और वही बर्फानी पानी रिस-रिस कर गुफा की चट्टानी छत से बूंद-बूंद करके नीचे टपकता है। ठंडी गुफा के फर्श पर गिरते-गिरते पानी की इन्हीं बूंदों से एक तरह का हिम स्तूप बन जाता है। इसे ही भक्तजन शिवलिंग मानकर उसकी पूजा करते हैं। साथ ही नज़दीक में, उससे कुछ छोटे दो और हिम स्तूप उसके दाएं-बाएं भी बनते हैं। जून से जुलाई के बीच की समयावधि में बीच वाला स्तूप दो से तीन मीटर तक ऊंचा हो जाता है। भक्त इन हिम पिंडों को क्रमश: पवित्र शिवलिंग, मां पार्वती और भगवान गणेश का स्वरूप मानते हैं और इनके दर्शन पाकर धन्य हो जाते हैं।

अमरनाथ हिन्दुओ का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में १३५ सहस्त्रमीटर दूर समुद्रतल...
21/07/2013

अमरनाथ हिन्दुओ का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में १३५ सहस्त्रमीटर दूर समुद्रतल से १३,६०० फुट की ऊँचाई पर स्थित है। इस गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) १९ मीटर और चौड़ाई १६ मीटर है। गुफा ११ मीटर ऊँची है।[1] अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्यों कि यहीं पर भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था।[2]

यहाँ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखो लोग यहां आते है। [3] गुफा की परिधि लगभग डेढ़ सौ फुट है और इसमें ऊपर से बर्फ के पानी की बूँदें जगह-जगह टपकती रहती हैं। यहीं पर एक ऐसी जगह है, जिसमें टपकने वाली हिम बूँदों से लगभग दस फुट लंबा शिवलिंग बनता है। चन्द्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इस बर्फ का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। आश्चर्य की बात यही है कि यह शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है, जबकि गुफा में आमतौर पर कच्ची बर्फ ही होती है जो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाए। मूल अमरनाथ शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग अलग हिमखंड हैं।

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