Radhika tour

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19/07/2024

Radhika Tour and Travels

धोद का गढ़ जो शेखावाटी क्षेत्र मे आता है इसे धोद फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है यह फोर्ट सीकर रेलवे स्टेशन से लगभग 23 कि...
13/06/2024

धोद का गढ़ जो शेखावाटी क्षेत्र मे आता है इसे धोद फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है यह फोर्ट सीकर रेलवे स्टेशन से लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

धोद का यह किला सीकर रियासत का एक महत्त्वपूर्ण ठिकाना था और सीकर रियासत के दो राजाओं के कार्यकाल में रियासत की राजनीति का यह किला प्रमुख केंद्र था। कभी इस किले पर मुकन्द सिंह का शासन था, मुकन्द सिंह जी सीकर के राव राजा लक्ष्मण सिंह जिन्होंने लक्ष्मणगढ़ किला बसाया था उन्ही के मुकुंद सिंह जी अनौरस (खवासवाल ) पुत्र थे| उन्होंने इस किले को बनाया । उन्हें सीकर इतिहास में पंडित झाबरमल शर्मा ने खवासवाल पुत्र लिखा है राजस्थान में राजपूत राजा या ठाकुर जब किसी विजातीय महिला या दासी को पत्नी बनाते थे तब उसे पासवान व पड़दायत आदि पदवी दी जाती थी। राव राजा लक्ष्मण सिंह जी की विजातीय पत्नी से उत्पन्न संतान को पंडित झाबरमल शर्मा ने अपनी पुस्तक में खवास पुत्र लिखा है धोद के इस किले पर मुकंद सिंह का शासन था हालाँकि उन्हें धोद की जागीर कब दी गई, यह किला खुद मुकंद जी ने बनवाया या पहले से यहाँ छोटा मोटा किला मौजूद था, इसके बारे में उपलब्ध इतिहास की किताबों में जानकारी नहीं है बेशक इस किले को लेकर इतिहास मौन है पर इतिहास में इस किले के स्वामी रहे मुकंद सिंह जी सीकर के दो राजाओं के प्रधानमंत्री रहे और सीकर की राजनीती व प्रशासन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई अर्थात धोद ठिकाने के मुकंद सिंह का प्रभाव तत्कालीन सीकर रियासत की राजनीति एवं प्रशासन पर भी काफी अधिक था अधिकांश निर्णयों में इनका दखल हुआ करता था ।

यह गढ़ एक लम्बे चौड़े मैदान में कई वर्षों से अकेला अडिग खड़ा है । गढ़ का प्रवेश द्वार काफी बड़ा और मजबूत प्रतीत होता है। मुख्य द्वार से प्रवेश करते समय यह गढ़ काफी विशाल प्रतीत होता है । गढ़ में काफी कमरे एवं काफी गलियारे हैं जो एक भूलभुलैया की भाँति है तथा मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही सामने एक बड़ा हॉल नजर आता है हॉल के बाहर चद्दर लगाकर बरामदा बनाया गया है जिसे देखकर लगता है कि यह आगुन्तकों के स्वागत के लिए बना है| इस हॉल के ऊपर एक और हॉल बना है जिसे शीश महल कहा जाता है, आज इसमें शीशे का काम तो कहीं नजर नहीं आता पर अन्दर से देखने पर सहज अंदाजा हो जाता है कि इस हॉल में कभी महफ़िलें सजती और नर्तकियां नृत्य करती थी| मुख्य दरवाजे के पास से ही अन्दर की और एक और रास्ता है उसमें जाते ही घोड़ों की घुड़साल नजर आती है और सामने एक दरवाजा है जिसके अन्दर जाने पर मीटिंग हॉल नुमा निर्माण है जो संभवतः यहाँ के शासक का दरबार हुआ करता होगा । इसी जगह बैठकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते होंगे और घुड़साल के सामने एक और दरवाजा नजर आता है जिसे देखकर लगता है कि कभी यह गढ़ यही तक सिमित था, उसके बाहर के निर्माण बाद में करवाये गए हैं इस दरवाजे के अन्दर जाते ही एक बड़ा कक्ष नजर आता है जहाँ कभी इस किले का शासक दरबार लगाता था| गढ़ के मुख्य दरवाजे के सामने से भी इसमें प्रवेश किया जा सकता है । अन्दर गलियारों से गुजरकर जाने पर एक दो मंजिला महल नुमा निर्माण आता है जो काफी भव्य है । चारों तरफ स्तंभों से बना हुआ यह महल अपनी सभी दीवारों पर सुन्दर चित्रकारी को समेटे हुए है। गढ़ के चारों कौनों पर गोलाकार बुर्ज बने हुए हैं। इन बुर्जों को अंदर से देखने पर ये अत्यंत भव्य कक्ष हैं जिनमे दीवारों और छत पर सुन्दर नक्काशी और चित्रकारी की हुई है। अधिकाँश चित्र नष्ट हो गए हैं लेकिन कई चित्र आज भी उस दौर की कला से हमें रूबरू कराते हैं।प्रांगन के एक कोने में एक छोटा द्वार नजर आता है जिसके आगे जनाना ड्योढ़ी है जिसमें किले के शासक की रानियाँ और महिलाऐं रहती थी, उनके अलग अलग कक्ष बने है| गढ़ की उपरी मंजिलों पर उस समय के स्नानागार और शौचालय भी बने हुए हैं और इस किले के पास में ही कुछ छतरियाँ बनी हुई है जिनमे मुकंद सिंह की छतरी भी मौजूद है । यहाँ पर एक शिलालेख भी लगा हुआ है।

अंत मे आपको यही बताना चाहूंगा कि वर्तमान में रखरखाव नहीं होने के कारण अब इस किले की दुर्दशा ही हो रही है लेकिन इसे देखने पर यह अंदाजा लगाना बिलकुल भी मुश्किल नहीं है कि यह गढ़ अपने स्वर्णिम काल में काफी गुलजार रहा होगा व रखरखाव व देखरेख के अभाव में किले में कई जगह ऐसे स्थान भी नजर आते हैं जो देखने पर लगता है कि असामाजिक तत्वों ने गड़ा हुआ धन निकालने के लालच में यहाँ खुदाई की है| बेशक मुकंद सिंह का और सीकर रियासत का इतिहास बहुत रोचक और विस्तृत है

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सेवा में,
श्रीमान जिलाधीश महोदय
हरिद्वार
उत्तराखंड
विषय :- होटल स्टाफ द्वारा ड्राइवर के साथ बदतमीजी करने में रेस्ट रूम की व्यवस्था नहीं करने बाबत
महोदय,। निवेदन है कि टूरिस्ट में चलने वाला ड्राइवर 300 से लेकर 600 किलोमीटर के लगभग रोजाना वाहन चलाता है मगर उसको आराम करने के लिए होटल के कर्मचारी सुविधा नहीं देते हैं हरिद्वार से ऋषिकेश के बीच में होटल रेनेस्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया के द्वारा हमारे पास पहुंचा जिसमें होटल का स्टाफ ड्राइवर के साथ बदतमीजी करता हुआ पाया गया ड्राइवर को वीडियो बनाने के लिए मना किया गया होटल से बाहर जाने के लिए कहा गया 45 डिग्री टेंपरेचर में ड्राइवर होटल के बाहर कहां बैठेगा जबकि पर्यटन विभाग की गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक होटल में ड्राइवर को रेस्ट करने के लिए रेस्ट रूम होना आवश्यक है मगर होटल के कर्मचारी हमेशा अभद्र व्यवहार करते हैं लगातार वाहन चलाने के कारण थकान हो जाती है पर्याप्त मात्रा में आराम नहीं मिलेगा तो वाहन दुर्घटनाग्रस्त होते हैं जिससे सवारी और ड्राइवर दोनों को अपनी जान का खतरा बना रहता है श्रीमान से निवेदन है कि ऐसे जितने भी हरिद्वार में होटल है जो ड्राइवर के आराम करने की व्यवस्था नहीं करते हैं या उनके पास रेस्ट रूम नहीं है उनको पाबंद किया जाए जिससे दुर्घटनाओं में कमि लाई जा सके और ड्राइवर को उचित आराम करने की आरामदायक व्यवस्था मिल सके

निवेदन
भारत के सभी ड्राइवर

Radhika Tour and Travels शेखावाटी,अर्थात महाराव शेखा जी द्वारा बसाया गया बगीचा,इसका नाम राव शेखा (1433-1488) के नाम पर प...
10/05/2024

Radhika Tour and Travels
शेखावाटी,अर्थात महाराव शेखा जी द्वारा बसाया गया बगीचा,इसका नाम राव शेखा (1433-1488) के नाम पर पड़ा, यह उत्तरी राजस्थान में स्थित एक क्षेत्र है। राजस्थान के 3 जिलों में लगभग 5000 वर्ग मील में फैली, 2000 से अधिक इमारतें हैं, जिनमें से अधिकांश 17वीं से 20वीं सदी की शुरुआत तक बनी हवेलियाँ हैं, जो भित्तिचित्रों से ढकी हुई हैं, जो इसे सबसे बड़ी ओपन एयर गैलरी बनाती हैं।
मंडावा, नवलगढ़, रामगढ़, फ़तेहपुर जैसे शहर जहां क्लासिक शेखावाटी भित्तिचित्र देखे जा सकते हैं।
19वीं शताब्दी तक शेखावाटी के अधिकांश भित्तिचित्र खनिज और वनस्पति रंगों से बनाए गए थे। लाल गेरू रंग के लिए गेरू सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला रंग है, काले के लिए काजल, सफेद के लिए चुना, नील, नारंगी के लिए पानी में पतला केसर, चमकीले पीले रंग के लिए पेवड़ी (पीली मिट्टी)। लेकिन 1860 के बाद कई और सिंथेटिक रंगद्रव्य उपलब्ध हुए और चित्रों के लिए उनका उपयोग किया गया।

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