15/08/2016
मैं रमाकांत शर्मा पिता आकाश शर्मा बदनसीब बाइकर ,जिसका कोई बाइकर दोस्त नहीं है ,जिसके मरने का किसी भी बाइकर को दुख नहीं है आज आप बाइकर्स के बुलाने पर जबाहर सर्कल पहुचा था।लेकिन आप लोगों ने मुझसे बात नहीं की।लगता है आप मुझसे बात नहीं करना चाहते,मेरा साथ नहीं देना चाहते हैं।
मैं आपसे कोई अनलीगल काम के लिये नहीं कह रहा ।मैं मेरे बेटे के लिये इंसाफ मांग रहा हूँ।आप मुझे अबोइड क्यूँ कर रहे हो,कहीं ऐसा तो नहीं कि आप बाइकर्स में से ही किसी की साजिश शिकार हुआ हो मेरा आकाश।
यदि ऐसा है तो मैं अदालत की शरण में जाऊँगा,और उस दिन शामिल सभी बाइकर्स के खिलाप वाद दायर कर न्यायालय से न्याय की गुहार लगाऊँगा।मैं चाहता था किसी को भी मेरी बजह से परेशानी नहीं हो,मगर जिस तरह आप मुझे अनदेखा कर रहे हैं,उससे मेरे दिल के ये यकीन होने लगा है कि हो न हे आप में से ही कोई मेरे बेटे का कातिल है।
ये तो आप समझते ही होंगे कि जिस पर केस चलता है,उसे आपराधिक गतिविधियों से किसी सर्विस आदि के लिये क्लीन चिट नहीं मिलती।जितने साल मुकदमा लंबित रहता तब तक कोई राजकीय सेवा में नहीं जा सकता।
मेरा दिल रो रहा हा,इससे नहीं कि आकाश मरा है,इससे कि वह आप जैसे लोगों के साथ था।मगर आकाश को न्याय दिलाने के लिये मैं मेरी पूरी ताकत ,पैसा(जो नुझ पर है)और जन सहयोग से अदालत की देहरी पर बैठुँगा। मुझे भारत की न्यायालय ,मीडिया,और जनतांत्रिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है।मैं इनके सहयोग से कातिलों को उनके अंजाम तक पहुँचाऊँगा ,चाहे वो बाइकर्स हों या ट्रम्फ मोरानी मोटर्स ।मेरा बेटा मुझे देख रहा है।मैं ईश्वर की कृपा से अपने मकसद में अवश्य कामयाब होऊँगा।
मैं जानता हूँ ऐसे हालातों में मेरी जान को भी खतरा हो सकता है,अतः सरकार से मैं अपनी सुरक्षा की अपील करूँगा ।