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Jaipur is officially among the world’s happiest cities! 💗🏰According to Time Out’s World’s Happiest Cities 2026 survey, J...
31/07/2026

Jaipur is officially among the world’s happiest cities! 💗🏰

According to Time Out’s World’s Happiest Cities 2026 survey, Jaipur has secured the 6th spot globally, becoming the highest-ranked Indian city on the list. 🇮🇳✨

From its royal heritage and vibrant culture to its delicious food and warm hospitality, it’s no surprise the Pink City has earned global recognition.

How proud are you to call Jaipur home? ❤️

Source: Time Out – World’s Happiest Cities 2026 (Published: July 2026)

Jaipur, Pink City, Time Out 2026, World’s Happiest Cities, Rajasthan, India, Hawa Mahal, Travel, Tourism, Culture, Heritage

HUM SE ITIHAAS KYO CHIPAYA ?खवासपुरा में खंडहर महल और दरगाह।पीपाड़ सिटी (जोधपुर). देश में नई व पुरानी दिल्ली के नाम चर्च...
04/06/2022

HUM SE ITIHAAS KYO CHIPAYA ?

खवासपुरा में खंडहर महल और दरगाह।

पीपाड़ सिटी (जोधपुर). देश में नई व पुरानी दिल्ली के नाम चर्चित के हैं लेकिन मारवाड़ में किसी जमाने में एक लोड़ी (छोटी) दिल्ली हुआ को करती थी। समय के साथ लोग जुबिसराते चले गए और अब इतिहास के पन्नों से गायब है। बचे हैं केवल की पुराने महल के कुछ अवशेष। दिल्ली में सूरवंश के शासनकाल के दौरान

बसी इस दिल्ली के अवशेष जोधपुर के पीपाड़ उपखंड के खवासपुरा गांव में हैं, इस गांव का नाम खवासपुरा भी शेरशाह के प्रमुख सेनापति खवास खान के नाम पर पड़ा। पहले

शेरशाह सूरी की मौत के बाद उसका सेनापति खवास खान फरार होकर जावा खेड़ा गांव में आ गया और यहां नए नाम लोड़ी दिल्ली राज य बसाया। यहां किले का निर्माण करवाया।

शेरशाह के सेनापति खवास खान की हत्या के बाद उसके समर्थक शव लेकर आए और किले के बाहर दफन कर दरगाह बना दी। यह दरगाह क्षेत्र में सदभावना की प्रतीक के रूप में पहचान रखती हैं।

04/05/2022
इसका इतिहास 15वीं शताब्दी से शुरू होता है, जब इसकी स्थापना रुद्र प्रताप सिंह जू बुन्देला क्षत्रिय राजपूत ने की थी जो सिक...
22/01/2021

इसका इतिहास 15वीं शताब्दी से शुरू होता है, जब इसकी स्थापना रुद्र प्रताप सिंह जू बुन्देला क्षत्रिय राजपूत ने की थी जो सिकन्दर लोदी से भी लड़ा था इस जगह की पहली और सबसे रोचक कहानी एक मंदिर की है। दरअसल, यह मंदिर भगवान राम की मूर्ति के लिए बनवाया गया था, लेकिन मूर्ति स्थापना के वक्त यह अपने स्थान से हिली नहीं। इस मूर्ति को मधुकर शाह बुन्देला के राज्यकाल (1554-92) के दौरान उनकी रानी गनेश कुवर अयोध्या से लाई थीं। रानी गनेश कुंवर वर्तमान ग्वालियर जिले के करहिया गांव की परमार राजपूत थीं। चतुर्भुज मंदिर बनने से पहले रानी पुख्य नक्षत्र में अयोध्या से पैदल चल कर बाल स्वरूप भगवान राम(राम लला)को ओरछा लाईं परंतु रात्रि हो जाने के कारण भगवान राम को कुछ समय के लिए महल के भोजन कक्ष में स्थापित किया गया। लेकिन मंदिर बनने के बाद कोई भी मूर्ति को उसके स्थान से हिला नहीं पाया। इसे ईश्वर का चमत्कार मानते हुए महल को ही मंदिर का रूप दे दिया गया और इसका नाम रखा गया राम राजा मंदिर। आज इस महल के चारों ओर शहर बसा है और राम नवमी पर यहां हजारों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं। वैसे, भगवान राम को यहां भगवान मानने के साथ यहां का राजा भी माना जाता है, क्योंकि उस मूर्ति का चेहरा मंदिर की ओर न होकर महल की ओर है।आज भी भगवान राम को राजा के रूप में(राम राजा सरकार) ओरछा के इस मंदिर में पूजा जाता है और उन्हें गार्डों की सलामी देते हैं।मंदिर में चमड़े से बनी वस्तुओं का प्रवेश निषिद्ध हैं।

Address

Jaipur
302002

Telephone

9660666999

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