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HUM SE ITIHAAS KYO CHIPAYA ?खवासपुरा में खंडहर महल और दरगाह।पीपाड़ सिटी (जोधपुर). देश में नई व पुरानी दिल्ली के नाम चर्च...
04/06/2022

HUM SE ITIHAAS KYO CHIPAYA ?

खवासपुरा में खंडहर महल और दरगाह।

पीपाड़ सिटी (जोधपुर). देश में नई व पुरानी दिल्ली के नाम चर्चित के हैं लेकिन मारवाड़ में किसी जमाने में एक लोड़ी (छोटी) दिल्ली हुआ को करती थी। समय के साथ लोग जुबिसराते चले गए और अब इतिहास के पन्नों से गायब है। बचे हैं केवल की पुराने महल के कुछ अवशेष। दिल्ली में सूरवंश के शासनकाल के दौरान

बसी इस दिल्ली के अवशेष जोधपुर के पीपाड़ उपखंड के खवासपुरा गांव में हैं, इस गांव का नाम खवासपुरा भी शेरशाह के प्रमुख सेनापति खवास खान के नाम पर पड़ा। पहले

शेरशाह सूरी की मौत के बाद उसका सेनापति खवास खान फरार होकर जावा खेड़ा गांव में आ गया और यहां नए नाम लोड़ी दिल्ली राज य बसाया। यहां किले का निर्माण करवाया।

शेरशाह के सेनापति खवास खान की हत्या के बाद उसके समर्थक शव लेकर आए और किले के बाहर दफन कर दरगाह बना दी। यह दरगाह क्षेत्र में सदभावना की प्रतीक के रूप में पहचान रखती हैं।

04/05/2022
इसका इतिहास 15वीं शताब्दी से शुरू होता है, जब इसकी स्थापना रुद्र प्रताप सिंह जू बुन्देला क्षत्रिय राजपूत ने की थी जो सिक...
22/01/2021

इसका इतिहास 15वीं शताब्दी से शुरू होता है, जब इसकी स्थापना रुद्र प्रताप सिंह जू बुन्देला क्षत्रिय राजपूत ने की थी जो सिकन्दर लोदी से भी लड़ा था इस जगह की पहली और सबसे रोचक कहानी एक मंदिर की है। दरअसल, यह मंदिर भगवान राम की मूर्ति के लिए बनवाया गया था, लेकिन मूर्ति स्थापना के वक्त यह अपने स्थान से हिली नहीं। इस मूर्ति को मधुकर शाह बुन्देला के राज्यकाल (1554-92) के दौरान उनकी रानी गनेश कुवर अयोध्या से लाई थीं। रानी गनेश कुंवर वर्तमान ग्वालियर जिले के करहिया गांव की परमार राजपूत थीं। चतुर्भुज मंदिर बनने से पहले रानी पुख्य नक्षत्र में अयोध्या से पैदल चल कर बाल स्वरूप भगवान राम(राम लला)को ओरछा लाईं परंतु रात्रि हो जाने के कारण भगवान राम को कुछ समय के लिए महल के भोजन कक्ष में स्थापित किया गया। लेकिन मंदिर बनने के बाद कोई भी मूर्ति को उसके स्थान से हिला नहीं पाया। इसे ईश्वर का चमत्कार मानते हुए महल को ही मंदिर का रूप दे दिया गया और इसका नाम रखा गया राम राजा मंदिर। आज इस महल के चारों ओर शहर बसा है और राम नवमी पर यहां हजारों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं। वैसे, भगवान राम को यहां भगवान मानने के साथ यहां का राजा भी माना जाता है, क्योंकि उस मूर्ति का चेहरा मंदिर की ओर न होकर महल की ओर है।आज भी भगवान राम को राजा के रूप में(राम राजा सरकार) ओरछा के इस मंदिर में पूजा जाता है और उन्हें गार्डों की सलामी देते हैं।मंदिर में चमड़े से बनी वस्तुओं का प्रवेश निषिद्ध हैं।

रूसी गाईडस को बहुत बहुत बधाई, मै तो सभी विदेशी पर्यटको को कहना चाहूंगा, भारत के गाईड भाई और खद भारत आप सभी का बेसब्री से...
18/01/2021

रूसी गाईडस को बहुत बहुत बधाई,
मै तो सभी विदेशी पर्यटको को कहना चाहूंगा, भारत के गाईड भाई और खद भारत आप सभी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
महिपाल सिंह आलूदा

History of Jorawar Singh Gate, Jaipur!
07/12/2020

History of Jorawar Singh Gate, Jaipur!

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