27/06/2025
हमारे लोकप्रिय नेता जी।
“जवान लड़का है, इस उम्र में नींद ज़्यादा आती है – इसकी गलती नहीं है!”
दिसंबर का महीना था और शिमला की ठिठुरती ठंड। तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह का कुल्लू ज़िले का प्रवास था। वैसे तो मैं मुख्यमंत्री का आईटी सलाहकार था और मुख्यमंत्री के सरकारी दौरों में मेरा कोई खास महत्व नहीं था, लेकिन मुख्यमंत्री महोदय का आदेश था कि जब उचित हो, ‘कंप्यूटर बॉय’ को मुख्यमंत्री के साथ दौरों में जाना चाहिए (मेरा नाम ‘कंप्यूटर बॉय’ कैसे पड़ा, इसके पीछे भी एक कहानी है, जो कभी और साझा करूंगा)।
खैर, वीरभद्र जी के अधिकतर प्रदेश प्रवास सुबह 7 बजे अन्नाडेल हेलीपैड से शुरू होते थे। आदेश के अनुसार सभी को प्रस्थान के 15 मिनट पूर्व हेलीपैड पहुंचना होता था। हेलिकॉप्टर पर मुख्यमंत्री जी के साथ जाने वालों की सूची पिछली रात तैयार कर पायलट एवं सुरक्षा अधिकारियों को दे दी जाती थी।
सुबह जब मैं अपने आवास से निकला, तो पता लगा कि मेरे घर की सड़क पर एक महोदय अपनी गाड़ी लगा गए हैं! गाड़ी की विंडशील्ड पर एक नंबर लिखा था, जिस पर मेरे गाड़ी चालक ने कॉल करके गाड़ी हटाने का संदेश दे दिया था। पता चला कि IGMC के डॉक्टर साहब नाइट ड्यूटी से आकर गाड़ी मेरे घर के आगे खड़ी कर गए हैं और उनके आने व गाड़ी हटाने में 10 मिनट लग गए। जैसे ही विधानसभा की ओर से अन्नाडेल के लिए मोड़ लिया, वहां तैनात पुलिसकर्मी से पता चला कि मुख्यमंत्री जी का काफ़िला 5 मिनट पहले ही हेलीपैड की ओर जा चुका है।
वीरभद्र जी का नियम था कि अपने दिन के प्रथम कार्यक्रम में वे हमेशा समय से पहले पहुंच जाते थे। मैंने गाड़ी चालक को तेज चलने को कहा। हेलीपैड के पास आते ही हेलिकॉप्टर के पंखों की आवाज़ सुनाई देने लगी, और मुझे पता चल गया कि आज की फ्लाइट मिस हो गई है। गाड़ी को ग्राउंड में आते देख हेलिकॉप्टर का पंखा धीमा होने लगा, और कुछ ही क्षणों में दरवाज़ा खुला और मुझे अंदर आने का इशारा हुआ! मैं एक सांस में छलांग लगाकर हेलिकॉप्टर के अंदर प्रवेश कर गया।
जैसे ही अंदर गया, वीरभद्र सिंह जी अपनी पहली सीट पर बैठे अख़बार पढ़ रहे थे (यह उनकी नामित सीट थी)। उनके पैर छूकर ‘गुड मॉर्निंग राजा साहब’ बोलकर लेट आने के लिए क्षमा मांगी। राजा साहब ने कोई जवाब नहीं दिया, केवल मुस्कुरा दिए… मुझे पता था कि अब सिक्योरिटी और सीनियर अफसरों से कुछ कठोर सुनने को मिलेगा, इसलिए चुपचाप अपनी सीट पर जाकर नज़रें झुकाए सीट बेल्ट बांध ली। तभी एक सीनियर अफसर बोले: “टाइम पर आया करो – कोई डिसिप्लिन नाम की चीज़ होती है बुटेल साहब।” सामने बैठे सुरक्षा अधिकारी ने भी उनके स्वर में हाँ मिलाते हुए कहा कि “अगली बार लेट हुए तो हेलिकॉप्टर में आने नहीं दिया जाएगा…”
इस तनाव को देखते हुए राजा साहब ने अख़बार साइड वाली सीट पर रख दिया और बोले:
“जवान लड़का है, इस उम्र में नींद ज़्यादा आती है – इसकी गलती नहीं है!”
ऐसा सुनते ही सभी लोग ज़ोर से हँसने लगे… और मेरी भी साँसों में साँस आई – तनाव का माहौल खुशनुमा हो गया।
(Re-sharing after 5 years on his birth anniversary and upcoming 4th death anniversary)