30/05/2023
अगर आर्यभट्ट ने #ज़ीरो की खोज की तो रामायण में रावण के दस सिरों की गणना कैसे हुई…?
कुछ लोग इस प्रश्न को हिंदू धर्म और " #रामायण" " #महाभारत" " #गीता" को काल्पनिक दिखाने के लिए पूछते हैं कि जब आर्यभट्ट ने लगभग 6 वीं शताब्दी मे (शून्य/ज़ीरो→ 0/0) की खोज की तो आर्यभट की खोज से लगभग 5000 हजार वर्ष पहले रामायण में रावण के 10 सिर कैसे गिने गए? और महाभारत में 100 कौरवों की संख्या कैसे गिनी गई? जब उस समय लोगों को ( ) पता ही नहीं था तो लोग नंबर कैसे गिनते थे…???
अब मैं इस प्रश्न का उत्तर दे रहा हूँ🤔❓
कृपया इसे ध्यान से पढ़ें।👇🏻👇🏻👇🏻
आर्यभट्ट से पहले दुनिया “0” ( ) को नहीं जानती थी।
आर्यभट्ट ने ही खोज की थी (शून्य/ज़ीरो → 0/0), यह एक सत्य है। लेकिन आर्यभट्ट ने "0" ( ) की खोज 'शब्दों' में नहीं, 'संख्याओं' में की थी, इससे पहले '0' अंक को शब्दों में " #शून्य" कहा जाता था। उस समय मे भी हिन्दू धर्म ग्रंथो मे जैसे #शिव_पुराण, #स्कन्द_पुराण आदि में आकाश को "शुन्य" कहा गया है। यहाँ पे "शुन्य" का अर्थ अनंत से है। लेकिन "संस्कृत" में रामायण व महाभारत काल मे गिनती संख्या में न होकर शब्दों मे होती थी।
उस समय "1,2,3,4,5,6,7,8,9,10" संख्याओं के स्थान पर 'शब्दों' का प्रयोग होता था, वह भी 'संस्कृत' के शब्द ही प्रयुक्त होते थे। जैसे:— (1 = पहला ' #प्रथम') (2 = दूसरा ' #द्वितीय') (3 = तीसरा ' #तृतीय') (4 = चौथा ' #चतुर्थ') (5 = पांचवां ' #पंचम') (6 = छठा ' #षष्टं') (7 = सातवां ' #सप्तम') (8 = आठवां ' #अष्टम') (9 = नौवां ' #नवंम') (10 = दसवां ' #दशम')।
" #दशम = दस" यानि दसवें में "10" आया, लेकिन अंक 0 (Zer0/Zer0) नहीं आया, रावण को #दशानन कहा जाता है। 'दशानन' का अर्थ है दश+आनन = 'दस सिर' अब रावण के दस सिरों की गिनती देखिए। लेकिन 0 (Zer0) संख्या नहीं आया।
इसी प्रकार महाभारत काल में " #संस्कृत" शब्द में " #कौरवों" की सौ की संख्या को "शत्-शतम" बताया गया है। ' #शत्' एक संस्कृत शब्द है, जिसका हिंदी में अर्थ सौ "100" होता है। सौ "100" को संस्कृत में शत् कहते हैं। ('शत्' = 'सौ') इस गिनती में भी अंक का "00 (दोहरा शून्य)" नहीं आया और गिनती भी पूरी हो गई। महाभारत धर्मग्रंथ में कौरवों की संख्या सौ बताई गई है।
रोमन भाषा में भी 1–2–3–4–5–6–7–8–9–10 को (i), (ii), (iii), (iv), (v), (vi), (vii), (viii), और (ix) के रूप में लिखा जाता है। जहाँ दस को (x) कहा जाता है। X = दस इस रोमन 'x' में अंक (ज़ीरो/0) नहीं आता है और हम "दस पढ़ते हैं" और "गिनती पूरी हो गई"! इस प्रकार रोमन शब्द में कहीं भी "0 (शून्य)" नहीं आता है। और आप रोमन में "एक से एक सौ" पढ़ और लिख भी सकते हैं। आपको 0 या 00 लिखने की भी आवश्यकता नहीं है।
पहले के समय में गिनती शब्दों में लिखी जाती थी। उस समय अंकों का ज्ञान नहीं था। जैसे गीता में रामायण 1"2"3"4"5"6 या शेष पाठ इस प्रकार पढ़े जाते हैं। जैसे (प्रथम अध्याय, द्वितीय अध्याय, पंचम अध्याय, दशम अध्याय...आदि!) उनका दसवाँ अध्याय अर्थात दसवां पाठ (10th Chapter/Lesson) होता है। दसवाँ अध्याय = दसवाँ पाठ इसमें 'दस' शब्द आया है। परन्तु इस दस में अंक के '0' (शून्य) का प्रयोग नहीं किया गया है।
कुछ नास्तिक लोग अपने गलत कुतर्क से हिन्दू धर्म और शास्त्रों को काल्पनिक सिद्ध करना चाहते हैं। ताकि हिन्दू समाज को हिन्दुओं के मन में हिन्दू धर्म के प्रति द्वेष भरकर तथा हिन्दू धर्म को काल्पनिक सिद्ध करके अन्य धर्मों में परिवर्तित किया जाए। लेकिन आज का हिन्दू समाज इन लोगों की धार्मिक शिक्षा को न मानने के कारण इनके झूठ को सही मान लेता है। यह हमारे धर्म और संस्कृत के लिए हानिकारक कारक है। अपनी सभ्यता पहचानें, गर्व करें की
" ातनी_हैं", " िन्दू_हैं"।
#सत्य_सनातन_धर्म_की_जय 🚩🇮🇳🚩