12/08/2025
यह पुस्तक “दीवार में एक खिड़की रहती थी” वरिष्ठ हिंदी लेखक विनोद कुमार शुक्ल द्वारा लिखित उपन्यास है, जिसे साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह उपन्यास एक भारतीय निम्न-मध्यवर्गीय परिवार विशेषकर एक नवविवाहित दंपत्ति—गणित के व्याख्याता रघुवर प्रसाद और उनकी पत्नी सोनसी—की कहानी के जरिए आम जीवन की सुंदरता, साधारणता और उसमें छिपी कल्पनाओं का उत्सव मनाता है।
कथा-संक्षेप एवं सन्दर्भ:
• कहानी छोटे कस्बे में रह रहे रघुवर प्रसाद और उनकी पत्नी की गृहस्थी, सपनों और संघर्षों के इर्द-गिर्द घूमती है। इनके किराए के एक कमरे वाले घर में ‘एक खिड़की’ है, जो उनके लिए केवल एक वास्तु नहीं, बल्कि कल्पना का नया संसार है।
• इस उपन्यास में जीवन के वास्तविक संघर्ष—सीमित संसाधनों, गरीबी, छोटे-छोटे सुखों को ऐसे ढंग से बुना गया है कि आम आदमी की संवेदनाएं और प्रतिबद्धताएं उसमें झलकती हैं।
• इस कहानी में खास घटनाओं या बड़े ट्विस्ट की बजाय, रोजमर्रा के साधारण अनुभव, प्रकृति, पड़ोसी, रिश्ते, सपने और जीवंत कल्पनाएँ केंद्र में हैं।
• खिड़की उपन्यास का केंद्रीय प्रतीक है—यह कमरे के भीतर से एक जादुई, कल्पनाशील, और सुखद दुनिया में प्रवेश का माध्यम बनती है, जहाँ हर साधारण चीज़ में असाधारण सुंदरता है। इसी एहसास और कल्पना-शक्ति की वजह से यह रचना खास है।
साहित्यिक महत्व:
• “दीवार में एक खिड़की रहती थी” को आम हिंदी उपन्यास की पारंपरिक शैली से अलग, अधिक अनुभूति-प्रधान, काव्यात्मक और शांत संवेदनाओं से भरा माना जाता है।
• किताब को 1999 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था।
• इसमें भाषा की सादगी के माध्यम से गूढ़ भावनाओं की प्रस्तुति, पात्रों की सहजता और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाई देता है, जो इसे हिंदी साहित्य में विशिष्ट बनाता है।
कुल मिलाकर:
यह उपन्यास हर उस पाठक के लिए है, जो साधारण जीवन में असाधारण सुंदरता, सपनों और कल्पना की खिड़की खोलने की तड़प रखता है—और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।