10/04/2021
1026 KM और 32 घंटे का सफर *15 अप्रैल से शुरू होगी HRTC की दिल्ली-मनाली-लेह बस सर्विस*
👉🏻: दिल्ली से लेह तक चलने वाली इस बस सेवा का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है. लेह रूट का हमारे देश के लिए सामरिक दृष्टि से बहुत महत्व है. कारगिल युद्ध के दौरान इस रूट का प्रयोग भारतीय सेना ने असला बारूद पहुंचाने के लिए किया था.
कुल्लू. देश-विदेश के सैलानियों के लिए अच्
कुल्लू. देश-विदेश के सैलानियों के लिए अच्छी खबर है. विश्व के सबसे ऊंचे दिल्ली-मनाली-लेह रूट पर हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बस सेवा का जल्द आगाज होगा. अगर सब कुछ सही रहा तो 15 अप्रैल से यह बस सेवा शुरू हो जाएगी.
पहले 1072 किमी की दूरी के लिए 1727 रुपये किराया था, लेकिन अब अटल टनल की वजह से दूरी कम हुई है और ऐसे में अब दिल्ली से लेह के लिए 1026 किमी के लिए 1656 रुपये किराया लगेगा.
साल 2008 में शुरू हुई थी सेवा: देश के सबसे ऊंचे और लंबे रूट लेह-मनाली-दिल्ली पर मई 2008 में सबसे पहले बस सेवा शुरू हुई थी और अब बीते दस साल से हर साल यह बस सेवा लेह जाने वाले के लिए उपलब्ध रहती है.
1074 किमी का सफर: दिल्ली-मनाली-लेह रूट की दूरी 1072 किलोमीटर है. दिल्ली से लेह पहुंचने के लिए यात्रियों को पहले 36 घंटे का समय लगता था, लेकिन अब अटल टनल के बनने से रोहतांग पास नहीं जाना होगा और चार घंटे का समय बचेगा. ऐसे में अब यह सफर 32 घंटे का रहेगा.
बीते साल पूरे सफर के दौरान तीन ड्राइवर और दो कंडक्टर रहते थे. इस बार भी कुछ ऐसी ही उम्मीद है. केलांग में रात को बस के लिए हॉल्ट रहता है. यहां से फिर सुबह बस चलती है.
इस बार मौसम में बदलाव के कारण बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की ओर से मनाली लेह-हाईवे बहाल कर दिया गया है. इस कारण यह सुविधा रिकॉर्ड अप्रैल महीने में शुरू होने की उम्मीद है.
एचआरटीसी की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी बुकिंग करवाई जा सकती है. कुल्लू-मनाली में एचआरटीसी कार्यालय में एडवांस बुकिंग भी की सुविधा भी रहेगी.
दिल्ली से लेह के रोमांचक सफर में यह बस और सैलानी बारालाचा पास (16043 फीट) और तंगलांगला (17480फीट) और लाचूंगला पास (16598 फीट) से गुजरेंगे. इस दौरान सैलानी खतरनाक रास्तों के अलावा, प्रकृति के अदभुत नजारों का लुत्फ भी ले सकेंगे.
यह बस केलांग, पटसू, जिंगजिंग बार, 21 लूप्स, व्हिस्की नाला और सूरजताल से होते हुए कई रमणीय स्थानों से गुजरेगी. दिल्ली से लेह तक चलने वाली इस बस सेवा का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है. बता दें कि लेह रूट का हमारे देश के लिए सामरिक दृष्टि से बहुत महत्व है. कारगिल युद्ध के दौरान इस रूट का प्रयोग भारतीय सेना ने असला बारूद पहुंचाने के लिए किया था.