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भगवद्‍गीता 1.25 — श्लोक, अनुवाद और सरल व्याख्या (हिंदी में)🙏🙏🙏🙏📜 संस्कृत श्लोकसैनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्।भी...
27/11/2025

भगवद्‍गीता 1.25 — श्लोक, अनुवाद और सरल व्याख्या (हिंदी में)🙏🙏🙏🙏
📜 संस्कृत श्लोक
सैनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्।
भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम्॥ १.२५॥🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🌼 अनुवाद (हिंदी)
(संजय कहते हैं:) भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का श्रेष्ठ रथ दोनों सेनाओं के बीच, भीष्म, द्रोण और अन्य राजाओं के सामने खड़ा कर दिया।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🕉 सरल व्याख्या
इस श्लोक में संजय यह बता रहे हैं कि जब अर्जुन युद्ध का पूरा दृश्य देखना चाहता है, तब श्रीकृष्ण उसके रथ को युद्धभूमि के बीच ले जाकर उन महान योद्धाओं के सामने खड़ा करते हैं — जैसे भीष्म पितामह, गुरु द्रोण, और बाकी राजा।
यहाँ श्रीकृष्ण अर्जुन को उसकी कर्तव्य-स्थिति समझाने की तैयारी कर रहे हैं।
अर्जुन युद्ध में किसके खिलाफ लड़ने जा रहा है, यह दिखाकर आगे होने वाली गीता की शिक्षा का आधार तैयार किया जा रहा है।
यह दृश्य अर्जुन के भीतर भावनात्मक संघर्ष को बढ़ाता है, जिससे आगे उसके संशय और दुविधाएँ सामने आती हैं।

श्रीमद्भगवद् गीता — अध्याय 1, श्लोक 24🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏संस्कृत:तदैव पार्थं हृषीकेशोगुडाकेशं इदं वचः ।सेनयोरुभयोर्मध्येस्थापयित्वा ...
25/11/2025

श्रीमद्भगवद् गीता — अध्याय 1, श्लोक 24
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
संस्कृत:
तदैव पार्थं हृषीकेशो
गुडाकेशं इदं वचः ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये
स्थापयित्वा रथोत्तमम् ॥ १.२४ ॥
हिंदी अनुवाद (सरल):
उस समय हृषीकेश (श्रीकृष्ण) ने गुडाकेश (अर्जुन) से यह कहा, और दोनों सेनाओं के बीच उस उत्तम रथ को खड़ा कर दिया।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
भावार्थ:
अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा था कि मेरा रथ दोनों सेनाओं के बीच ले चलो ताकि मैं युद्ध करने वालों को देख सकूँ।
इस श्लोक में बताया गया है कि श्रीकृष्ण अर्जुन की इच्छा के अनुसार रथ को दोनों सेनाओं के बीच ले जाकर खड़ा करते हैं। यह महाभारत युद्ध का वह निर्णायक क्षण है जहाँ अर्जुन युद्ध की वास्तविकता देखने वाले हैं और आगे चलकर उनका मोह उत्पन्न होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1, श्लोक 23 इस प्रकार है –🙏🙏🙏🙏🙏🙏सanskrit श्लोक:यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्।कैर्मया...
17/09/2025

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1, श्लोक 23 इस प्रकार है –🙏🙏🙏🙏🙏🙏
सanskrit श्लोक:
यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्।
कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे।।1.23।।🙏🙏🙏🙏
हिन्दी अनुवाद:
अर्जुन कहते हैं – हे अच्युत! जब तक मैं इन युद्ध की इच्छा रखने वाले कौरव पक्ष के लोगों को, जो यहाँ पर खड़े हैं, भली-भाँति देख न लूँ, तब तक मेरा रथ दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा कीजिए, ताकि मैं जान सकूँ कि इस रण में मुझे किन-किन से युद्ध करना है।
भावार्थ / व्याख्या:🙏🙏🙏🙏🙏
इस श्लोक में अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण से कहते हैं कि रथ को दोनों सेनाओं के बीच खड़ा करें। अर्जुन युद्ध शुरू करने से पहले अपने शत्रुओं का सामना करना चाहते हैं, ताकि देख सकें कि किस-किससे उन्हें युद्ध करना है।
यहाँ अर्जुन का मनोविज्ञान सामने आता है—वह युद्धभूमि में प्रवेश कर चुके हैं, परंतु भीतर से अभी भी उनका मन स्थिति को समझने और परखने में लगा हुआ है। यह आगे चलकर उनके मोह और करुणा का कारण बनेगा।

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 22 👇🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏श्लोक (Sanskrit):यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्।कैर्मया सह योद्धव...
15/09/2025

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 22 👇🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
श्लोक (Sanskrit):
यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्।
कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे।। 1.22 ।।🙏🙏🙏🙏🙏
हिन्दी अनुवाद:
अर्जुन कहते हैं — हे अच्युत! जब तक मैं इन युद्ध के लिए उत्सुक कौरव पक्ष के योद्धाओं को भली प्रकार देख न लूँ, तब तक मेरी रथ को दोनों सेनाओं के बीच खड़ा कीजिए।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
भावार्थ:
अर्जुन यहाँ श्रीकृष्ण से निवेदन कर रहे हैं कि वे रथ को सेनाओं के मध्य ले जाएँ ताकि वह अपने विपक्षियों (कौरवों और उनके सहयोगियों) को भलीभाँति देख सकें। यह अर्जुन के मन में उठी जिज्ञासा और भावनात्मक स्थिति को दर्शाता है, जहाँ वह युद्ध से पहले अपने शत्रुओं का सामना आँखों से करना चाहता है।

14/09/2025

भगवद्गीता अध्याय 1, श्लोक 21 इस प्रकार है –🙏🙏🙏🙏🙏🙏
श्लोक (संस्कृत):
अर्जुन उवाच ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥ 21 ॥🙏🙏🙏🙏🙏🙏
हिंदी अनुवाद:
अर्जुन ने कहा —
हे अच्युत! आप मेरा रथ दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा कर दीजिए।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
सरल अर्थ:
अर्जुन चाहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण उनका रथ दोनों सेनाओं के बीच ले जाएँ, ताकि वे युद्ध करने वालों को सामने से देख सकें।

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1, श्लोक 20🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏श्लोकअथव्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान् कपिध्वजः ।प्रवृत्ते शस्त्रसम्पात...
14/09/2025

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1, श्लोक 20🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
श्लोक
अथव्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान् कपिध्वजः ।
प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥ 20 ॥🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
अनुवाद (सरल हिंदी में):
इसके बाद, जब युद्ध आरम्भ होने वाला था, उस समय कपिध्वज अर्जुन (जिनके रथ पर हनुमान जी का ध्वज था) ने धृतराष्ट्र के पुत्रों की सेना को युद्ध के लिए व्यवस्थित खड़ा देखा। तब पाण्डुपुत्र अर्जुन ने अपना धनुष उठा लिया।
भावार्थ:
🙏🙏🙏🙏
यहाँ अर्जुन का युद्ध के लिए तैयार होना दर्शाया गया है। उनके रथ पर हनुमान जी का ध्वज (कपिध्वज) विशेष रूप से उल्लेखित है, जो विजय और शक्ति का प्रतीक है। इस श्लोक से संकेत मिलता है कि अर्जुन शस्त्र उठाकर युद्ध के लिए तत्पर हुए, लेकिन आगे वे अपने मन में गहन दुविधा का अनुभव करने लगते हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1, श्लोक 19 इस प्रकार है –🙏🙏🙏🙏🙏संस्कृत श्लोक🙏🙏🙏🙏🙏🙏स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्।नभश्...
11/09/2025

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1, श्लोक 19 इस प्रकार है –🙏🙏🙏🙏🙏
संस्कृत श्लोक🙏🙏🙏🙏🙏🙏
स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्।
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलोऽभ्यनुनादयन्।।1.19।।🙏🙏🙏🙏🙏🙏
अनुवाद (हिंदी में)
उस (शंखनाद आदि) महान् शब्द ने आकाश और पृथ्वी को गूंजा दिया तथा धृतराष्ट्र के पुत्रों के हृदयों को विदीर्ण (भय से व्याकुल) कर डाला।🙏🙏🙏🙏🙏
सरल भावार्थ
पाण्डवों की ओर से किए गए शंखनाद, नगाड़े, और रणघोष इतने प्रचण्ड थे कि उनका तुमुल शब्द आकाश और पृथ्वी में गूंज उठा। इस अद्भुत ध्वनि से कौरवों की सेना के योद्धाओं के हृदय भय से काँप उठे।

📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1, श्लोक 18🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏संस्कृत श्लोक:🙏🙏🙏🙏🙏🙏द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते।सौभद्रश्च महाबाह...
09/09/2025

📖 श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1, श्लोक 18🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
संस्कृत श्लोक:🙏🙏🙏🙏🙏🙏
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते।
सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान् दध्मुः पृथक् पृथक् ॥ 18 ॥🙏🙏🙏🙏🙏🙏
अनुवाद (हिंदी में):
हे पृथ्वी के स्वामी (राजन्)! राजा द्रुपद, द्रौपदी के पाँचों पुत्र तथा महान् धनुर्धारी सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु— इन सबने भी अलग-अलग शंख बजाए।🙏🙏🙏🙏
भावार्थ:
इस श्लोक में बताया गया है कि पाण्डव पक्ष के सभी वीर— राजा द्रुपद, द्रौपदी के पाँच पुत्र (उपपाण्डव) और अर्जुन-पुत्र अभिमन्यु ने भी अपने-अपने शंखों का निनाद किया।
यह युद्ध-घोष केवल शौर्य का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि धर्म की रक्षा के लिए किए जाने वाले युद्ध का संकल्प भी था।

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 17 इस प्रकार है –🙏🙏🙏🙏🙏श्लोक (संस्कृत):युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्।सौभद्...
07/09/2025

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 17 इस प्रकार है –🙏🙏🙏🙏🙏
श्लोक (संस्कृत):
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्।
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः।। 1.17 ।।🙏🙏🙏🙏🙏
अनुवाद (हिंदी में):
और पराक्रमी युधामन्यु तथा बलशाली उत्तमौजा, अभिमन्यु (अर्जुनपुत्र) और द्रौपदी के पाँचों पुत्र—ये सब-के-सब महारथी हैं।
👉 इस श्लोक में दुर्योधन, कौरवों की ओर से पाण्डव पक्ष के सेनानायकों और उनके महान योद्धाओं का वर्णन कर रहा है। वह देखता है कि पाण्डवों की ओर केवल पाण्डव ही नहीं बल्कि उनके पुत्र, मित्र और सहयोगी भी महारथी होकर युद्ध में खड़े हैं

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 16🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः।नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः।।...
06/09/2025

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 16🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः।
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः।।1.16।।🙏🙏🙏🙏🙏
हिंदी अनुवाद:
इसके अतिरिक्त मेरे लिए प्राणों की बाज़ी लगाने वाले और भी बहुत से पराक्रमी योद्धा हैं, जो भिन्न-भिन्न अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित और सब-के-सब युद्ध-कला में निपुण हैं।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
भावार्थ:
दुर्योधन यहाँ आगे बताता है कि उसके पक्ष में केवल बड़े-बड़े महारथी ही नहीं, बल्कि और भी असंख्य योद्धा हैं, जो उसके लिए अपने जीवन का त्याग करने को तैयार हैं। वे सभी नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से सज्जित और युद्ध की बारीकियों में पारंगत हैं।
👉 इसका आशय यह है कि दुर्योधन अपने बल और समर्थ सेना को दिखाकर द्रोणाचार्य को यह विश्वास दिलाना चाहता है कि उसकी सेना अजेय है।

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 15 इस प्रकार है —🙏🙏🙏🙏🙏श्लोक (संस्कृत):पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः।पौण्ड्रं दध्मौ...
04/09/2025

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 15 इस प्रकार है —🙏🙏🙏🙏🙏
श्लोक (संस्कृत):
पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः।
पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदरः।। 15 ।।🙏🙏🙏🙏🙏🙏
हिंदी अनुवाद:
हृषीकेश (भगवान श्रीकृष्ण) ने अपना पाञ्चजन्य शंख बजाया।
धनंजय (अर्जुन) ने देवदत्त शंख बजाया।
और भीमकर्मा (अत्यन्त पराक्रमी भीम) ने पौण्ड्र नामक महान् शंख ध्वनि की।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
भावार्थ:
जब युद्ध का समय आया तो भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीम ने अपने-अपने शंख बजाए।
यह शंख-ध्वनि पांडवों की वीरता, संकल्प और उत्साह का प्रतीक है।
विशेष बात यह है कि हर महापुरुष का शंख नाम सहित उल्लेख किया गया है, जिससे उनकी शक्ति और महत्त्व स्पष्ट होता है। 🌟🌈🎉🙏🌱

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 14🙏🙏🙏🙏🙏ततः श्वेतैर् हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ ।माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्र...
04/09/2025

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 14
🙏🙏🙏🙏🙏
ततः श्वेतैर् हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ ।
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥ 14 ॥🙏🙏🙏🙏
अनुवाद (हिंदी में)
इसके बाद श्वेत घोड़ों से युक्त महान रथ पर बैठे हुए श्रीकृष्ण (माधव) और अर्जुन (पाण्डव) दोनों ने अपने दिव्य शंख बजाए।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
👉 इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के शंखनाद का वर्णन है, जो महाभारत युद्ध की शुरुआत का प्रतीक है। 🌟💫🎶💥

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