04/04/2023
मेरा **माता पूर्णगिरि यात्रा** का अनुभव और सीख पूरी पोस्ट ज़रूर पढ़े ताकि आपसे वो ग़लतियाँ ना हो🙏🏻
1 april को मेरी lko to tanakpur सुबह 8.10से त्रिवेणी एक्सप्रेस थी हम फ़ैमिली के साथ बाराबंकी से lko चारबाग़ stn अपनी car से पहुँचे रिसीप्ट कटा के जानकारी के अभाव मे गाड़ी प्रीमियम पार्किंग मे खड़ी कर दी जिस कारण हमे 40 घंटे का 400 किराया पड़ा!
(आप अपनी गाड़ी नार्मल पार्किंग मे खड़ी करे और रेट की स्पष्ट जानकारी ज़रूर कर लें!)
ट्रेन 3 घंटे लेट आई और 4 घंटे लेट पहुँचायी यानी रात्रि 7.30
(आप रात मे bbk या lko से बरेली फिर वहाँ से bus से सुबह ही tanakpur पहुँच सकते है इससे आपको पूरा
दिन tanakpur के लिए मिल जाएगा)
stn से हम 10 rs का e रिक्शा करके वहाँ पहुँचे जहां से ठुलीगाड के किए साधन मिलता है इस टाइम बहुत ज़्यादा भीड़ थी काफ़ी देर तक हम परिवार के साथ ना तो बस मे चढ़ पाये ना जीप(मॉर्शल)गाड़ी मे! फिर 300 मीटर पीछे गये जहां से गाड़ियाँ stop पर पहुँच रही थी वही से बैठ गये और ठुलिगाड(12km किराया 40 rs)पहुँच गये वहाँ पता चला कि जो गाड़ियाँ भैरव मंदिर(6km) तक जाती है वो रात्रि 8 बजे बंद हो जाती है सुबह 5 बजे मिलेंगी!(रात्रि मे 12 से 2 मंदिर बंद रहता है)हमने रात्रि मे पैदल चलने का फ़ैसला लिया जोकि सही नहीं था क्योंकि लगेज था, ऊपर से दूसरे शॉर्टकट की इतनी ज़्यादा खड़ी चढ़ायी थी कि लगभग सभी को दिक़्क़त होने लगी और पानी भी नहीं था!
(आप लोग ठुलीगाड मे ही निःशुल्क धर्मशाला बने है वहाँ रुक जाइये सुबह गाड़ी से 6km किराया 30 rs मे पहुँच जायेंगे! यदि पैदल चलने की सोच रहे तो कतई shortcut ना चुने उससे अच्छा रोड रोड जाये सब व्यवस्थाएँ भी मिल जाती हैं!)
बहुत कठिनाइयों के बाद जब पहला धर्मशाला लगभग 5.30km चलने के बाद आया वही रुक गये!
धर्मशाला मे रुकने की एक ही शर्त होती है की आपको उनके यहाँ से प्रसाद लेना होगा जिसका न्यूनतम प्राइस कुछ जगह 151 तो कुछ जगह 251 होता है! नहाने गर्म पानी शौचालय सफ़ाई व्यवस्था अच्छी रहती है!
सुबह प्रसाद लेकर हम फिर लगेज के साथ एक km पैदल चले क्योंकि हम 1km पहले रुक गये थे और लौटने मे गाड़ी लगेज लेने के लिए धर्मशाला रुकती है पर बताया इस time भीड़ बहुत है तो संभवता ना रुके! end पॉइंट पहुँचे तो एक धर्मशाला पर लगेज रखने को कहा तो उसने बताया प्रसाद लेना होगा कम से कम 3 न्यूनतम 151 का है हम मान गये! भीड़ बहुत से बहुत ज्यादा थी लिहाज़ा माता जी के दर्शन होने मे 6 घंटे लग गये बीच बीच मे खाने की व्यवस्थाएँ है चूँकि पहाड़ पर है इसलिए चीज़ महँगी रहती है जैसे पानी की बॉटल 20 वाली 30की!
भीड़ बहुत थी और कोई ख़ास व्यवस्था नहीं दिखी मंदिर से कुछ कदम पहले ही नारियल जमा कर लेते है और दर्शन के पास लगे पुलिस वालों का व्यवहार भी श्रधुलों के प्रति अच्छा नहीं था लगभग सभी को डाँट रहे थे!माता जी के दर्शन चैनल के इस पार से ही करने होते है चैनल बंद रहता है!बहुत दूर से लोग आते है सबकी इच्छा रहती है की माता जी की चौखट पर सर झुकाने को मिले!
नारियल जमा होने के बाद आपको पहले स्टेप पर एक पंडित जी मिलेंगे जहां आपको दक्षिना के साथ माता जी के सिंगार का सामान चढ़ाना होता है फिर आगे माता जी के चैनल कि चौखट पर पंडित जी बैठे होते है वही से दर्शन करके प्रसाद लेकर अपनी झोले की लैया मे मिला लेना होता है!
(यदि आप अच्छे से दर्शन और माथा चौखट मे झुकाना चाहते हैं तो सिंगार का सामान चढ़ाने के बाद 2000 या 500की नोट दिखाते हुए हाथ मे ले ले ऐसा दिखाये की दक्षिना मे देने वाले हो,ना पुलिस वाले डटेंगे ना पंडित जी! दर्शन हो जाएँगे उसके बाद भले ही डाँटे जब आप अंत तक वो नोट ना छोड़ो!)
चढ़ायी जितनी कठिन है उतरना उतना ही आसान पर शार्टकट ना चुने क्योंकि आपके सभी सदस्य बैलेंस ना बना पाए तो किसी को चोट भी लग सकती है! आराम से उतरे!
लौटने वाले यात्रियों के प्रति अधिकांशता धर्मशाला वालों का व्यवहार अच्छा नहीं रहता यदि आपको वाश रूम की आवश्यकता पड़ गई तो इस्तेमाल नहीं करने देते, ना कुछ मिनट आराम करने देते है उनका कहना होता है की यदि प्रसाद नहीं ले सकते तो उनके फ़ूड पॉइंट से कुछ खाओ तो वो परमिशन देंगे!हमारे साथ एक बच्चे को शौचालय जाना था बड़ी मुश्किल से एक धर्मशाला 20 rs एक व्यक्ति के किराया पर माना!
लौटकर आए भैरव जी के दर्शन किए फिर जुगाड़ से सीधे tanakpur के लिए गाड़ी बुक करायी (80rs पर व्यक्ति) चूँकि tanakpur से lko के लिए सुबह ही ट्रेन मिलती है इसलिए हमने बरेली से ट्रेन बुक करायी थी और tanakpur से by bus/प्राइवेट गाड़ी बुक करके बरेली पहुँच सकते हैं! बरेली जंक्शन अच्छा बना है साफ़ सफ़ाई अच्छी थी!(ट्रेन मे आप जब भी ख़ाना ले तो बिल ज़रूर ले क्योंकि हमे 80 वाली थाली 140 की दी,मैंने जब स्टेटस लगाया तो मेरे एक दोस्त ने इसकी जानकारी दी )
ओवरल कई साल बाद माता जी के यहाँ आने का बुलावा मिला और कठिनाई ज़रूर हुई पर माता जी के दर्शन पाकर सब भूल गया।
बोलो पूर्णागिरी माता की जय🙏🏻🙏🏻💐💐💐💐💐