Indian heritage

Indian heritage Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Indian heritage, Tour guide, Lucknow.

We aim to tell you about all the historical buildings of India through this page, give information about the food and culture traditions of those places, so that when you visit these places so you should not have any problem in roaming there.

16/11/2025

यह संदेश आधिकारिकता (Champa Rai जी के हवाले से), विनम्रता और स्पष्टता को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
📢 राम भक्तों के लिए आवश्यक सूचना: श्री राम मंदिर, अयोध्या
#जयश्रीराम #अयोध्या #राममंदिर #राष्ट्रीयगौरव
पूरे विश्व में बैठे सभी राम भक्तों को हमारा हाथ जोड़कर सादर प्रणाम।
यह सूचना श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सभी देशवासियों तक पहुंचाना अनिवार्य है:
🚨 25 नवंबर 2025 (मंगलवार) को श्री राम मंदिर, अयोध्या, में दर्शनार्थियों के लिए दर्शन की व्यवस्था पूर्णतः बंद रहेगी।
* दर्शन कब बंद होंगे: 24 नवंबर 2025 की देर रात के बाद से दर्शन बंद कर दिए जाएंगे।
* कारण: मंदिर निर्माण कार्य पूर्ण होने और एक विशेष कार्यक्रम के आयोजन के कारण यह अस्थायी रोक लगाई गई है। यह एक राष्ट्रीय गौरव का क्षण है।
🙏 सभी से विनम्र निवेदन:
हम आप सभी राम भक्तों से विनम्र निवेदन करते हैं कि 25 नवंबर को अयोध्या आने से बचें, ताकि व्यवस्था बनी रहे।
📺 कार्यक्रम देखने की व्यवस्था:
यह ऐतिहासिक और भव्य आयोजन आप संसार भर में कहीं से भी देख सकते हैं!
* घर बैठे दर्शन: आप इस राष्ट्रीय गौरव के कार्यक्रम को अपने घर पर बैठकर, किसी भी टीवी चैनल पर लाइव देख सकते हैं।
* सरकारी प्रसारण: दूरदर्शन (DD National) सभी प्रमुख चैनलों को इस आयोजन का सीधा प्रसारण (Live Feed) उपलब्ध कराएगा।
* अयोध्या में व्यवस्था: जो भक्त अयोध्या नगर में मौजूद होंगे, उनके लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा सड़कों पर और ट्रस्ट की ओर से कुछ स्थानों पर बड़ी-बड़ी स्क्रीन्स (LED Screens) लगाई जा रही हैं, जिन पर यह पूरा आयोजन दिखाया जाएगा।
आपसे निवेदन है कि अपने घरों या स्थानीय व्यवस्थाओं के माध्यम से इस कार्यक्रम का आनंद लें और सहयोग बनाए रखें।
धन्यवाद सहित,
श्री चम्पत राय
महासचिव, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र

नमस्ते दोस्तों!चूंकि मैं उत्तर प्रदेश पर्यटन से जुड़ा हूँ, तो मेरा काम है भारत की अविश्वसनीय विरासत को आप सब तक पहुँचाना...
15/11/2025

नमस्ते दोस्तों!
चूंकि मैं उत्तर प्रदेश पर्यटन से जुड़ा हूँ, तो मेरा काम है भारत की अविश्वसनीय विरासत को आप सब तक पहुँचाना! आज मैं आपको दक्षिण भारत के एक ऐसे चमत्कारी मंदिर से रूबरू करा रहा हूँ, जिसका रहस्य और वास्तुकला हर किसी को हैरान कर देती है!
📍 विरासत छिपी हुई: अवूदैयार कोइल (थिरुपेरुन्थुरई) 📍
यह मूर्ति तमिलनाडु के पुदुक्कोट्टै जिले में स्थित अथमनाथस्वामी मंदिर (Athmanathaswamy Temple) की है, जिसे आम भाषा में अवूदैयार कोइल कहा जाता है।
✨ इसकी ख़ासियतें जो इसे अद्वितीय बनाती हैं:
* निराकार पूजा (Formless Worship): यह शिव का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ गर्भगृह में शिवलिंग नहीं, बल्कि केवल एक वेदी (अवूदैयार) है, जो भगवान शिव के निराकार (Aroopam) स्वरूप का प्रतीक है।
* महान संत की कहानी: इस मंदिर को 9वीं शताब्दी में महान शैव संत और कवि माणिक्कवाचकर ने बनवाया था। यह वही स्थान है जहाँ उन्होंने प्रसिद्ध भक्ति संग्रह 'तिरुवाचकम' की रचना की थी।
* अद्वितीय वास्तुकला: मंदिर की छत पर जटिल ग्रेनाइट नक्काशी और अद्भुत कलाकृति है। तस्वीर में दिख रही बहु-भुजाओं वाली मूर्ति संभवतः भगवान शिव के उग्र रूप वीरभद्र की हो सकती है।
* नो नंदी, नो शिवलिंग: यह मंदिर उन शैव मंदिरों में से एक है जहाँ नंदी बैल (Nandi) की मूर्ति नहीं है!
सच कहूँ तो, भारत की हर दिशा में एक नई कहानी और एक नई विरासत छिपी है। अगर कभी तमिलनाडु जाने का मौका मिले, तो इस अद्भुत स्थान को ज़रूर अपनी लिस्ट में शामिल करें!
आपका लोकल गाइड,
शशांक प्रिया श्रीवास्तव
(उत्तर प्रदेश पर्यटन)

यह कंदरिया महादेव मंदिर का है, जो मध्य प्रदेश के खजुराहो ( ) में स्थित है। यह खजुराहो समूह के मंदिरों में सबसे बड़ा और स...
14/11/2025

यह कंदरिया महादेव मंदिर का है, जो मध्य प्रदेश के खजुराहो ( ) में स्थित है। यह खजुराहो समूह के मंदिरों में सबसे बड़ा और सबसे शानदार मंदिर है और इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ( ) में शामिल किया गया है।
यह मंदिर मध्य भारत की स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जिसके बारे में जानना बहुत महत्वपूर्ण है।
यहाँ इस मंदिर के इतिहास, धार्मिक मान्यता और सांस्कृतिक महत्व का विवरण दिया गया है:
🏛️ इतिहास ( )
* निर्माण काल: इस मंदिर का निर्माण लगभग 1025 ईस्वी से 1050 ईस्वी के बीच हुआ माना जाता है।
* निर्माता: इसका निर्माण चंदेल राजवंश के सबसे शक्तिशाली राजाओं में से एक, विद्याधर चंदेल ने करवाया था।
* निर्माण का उद्देश्य ( #एक #मान्यता): कई इतिहासकारों का मानना है कि राजा विद्याधर ने यह मंदिर महमूद गजनवी पर अपनी सैन्य विजय के उपलक्ष्य में एक विजय स्मारक के रूप में बनवाया था।
* वास्तुकला शैली: यह मंदिर उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला की नागर शैली का एक बेहतरीन उदाहरण है, विशेष रूप से खजुराहो उप-शैली का। इसकी ऊँचाई, भव्यता और जटिल मूर्तिकला इसे नागर वास्तुकला के चरमोत्कर्ष पर रखती है।
🙏 धार्मिक मान्यता ( )
* समर्पण: कंदरिया महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसके गर्भगृह में एक शिवलिंग स्थापित है।
* कंदर्पी नामकरण: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, 'कंदरिया' नाम भगवान शिव के एक नाम 'कंदर्पी' से लिया गया है।
* मनोकामना पूर्ति: यह मान्यता है कि महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर कंदरिया महादेव मंदिर के दर्शन करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह मंदिर शिव भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।
* दिव्य प्रकाश: मंदिर की वास्तुकला इस तरह से डिज़ाइन की गई है कि कुछ मान्यताओं के अनुसार, मुख्य मंडप से जो रोशनी आती है, वह सीधे शिवलिंग पर पड़ती है, जिससे भक्तों को अच्छे से दर्शन हो जाते हैं।
🎨 संस्कृति की मान्यता ( )
* स्थापत्य कला का चमत्कार: यह मंदिर भारतीय शिल्पकला और वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। इसकी बाहरी दीवारों पर लगभग 900 से अधिक मूर्तियाँ उत्कीर्ण हैं।
* जीवन का चित्रण: इन मूर्तियों में देवी-देवता, अप्सराएँ, पौराणिक जीव ( #व्याल), और उस समय के मानवीय जीवन के विभिन्न पहलुओं का चित्रण है।
* मिथुन ( #कामुक) मूर्तियाँ: इस मंदिर की सबसे प्रसिद्ध और विवादास्पद विशेषता इसकी बाहरी दीवारों पर बनी मिथुन (कामुक) मूर्तियाँ हैं।
* दार्शनिक मत: विद्वानों के अनुसार, ये मूर्तियाँ जीवन के चार लक्ष्यों ( #पुरुषार्थों) में से एक 'काम' का प्रतिनिधित्व करती हैं।
* तांत्रिक मत: कुछ लोग इसे तांत्रिक दर्शन से भी जोड़ते हैं, जहाँ जीवन के सभी पहलुओं को मंदिर की दीवारों पर दर्शाया गया है।
* ये मूर्तियाँ कुल मूर्तियों का एक छोटा हिस्सा हैं, लेकिन ये उस समय की सामाजिक और धार्मिक सहिष्णुता और खुली संस्कृति को दर्शाती हैं।
* कैलाश पर्वत का प्रतीक: मंदिर का भव्य और जटिल शिखर ( ) छोटे सहायक शिखरों ( #उरुशृंगों) से घिरा हुआ है, जो सामूहिक रूप से कैलाश पर्वत (भगवान शिव का निवास) का प्रतीक है।
यह मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि चंदेलों की शक्ति, कलात्मक प्रतिभा और भारतीय संस्कृति की गहराई का एक जीवंत प्रमाण है।




14/11/2025

बिहार की राजनीति के संदर्भ में

वर्तमान में (नवंबर 2025 में), नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA), जिसमें जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) शामिल हैं, के नेतृत्व में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं।
अगर NDA गठबंधन चुनाव जीतता है, तो नीतीश कुमार के ही मुख्यमंत्री बनने की सबसे अधिक संभावना है।
प्रमुख बिंदु (Key Points):
* गठबंधन का चेहरा: बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं, जैसे कि गृह मंत्री अमित शाह, ने स्पष्ट रूप से कहा है कि NDA गठबंधन नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ रहा है।
* मुख्यमंत्री पद की गारंटी: JDU नेताओं ने भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि यदि NDA बहुमत हासिल करता है, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे।
* बीजेपी का लक्ष्य: हालांकि बीजेपी बिहार में अपनी बड़ी भूमिका चाहती है और यह हिंदी पट्टी का एकमात्र बड़ा राज्य है जहां उसने अभी तक अपना मुख्यमंत्री नहीं बनाया है, लेकिन गठबंधन की राजनीति को देखते हुए, वह गठबंधन धर्म का पालन करते हुए नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाएगी, खासकर यदि JDU का प्रदर्शन अच्छा रहता है।
संक्षेप में: अगर NDA (बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन) जीतता है, तो नीतीश कुमार के 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने की पूरी संभावना है।



लखनऊ का ऐसा इतिहास जिसके बारे में लोग बहुत कम जानते हैं महाराजा लाखन पासी (Maharaja Lakhna Pasi) का इतिहास लखनऊ के नवाबो...
30/10/2025

लखनऊ का ऐसा इतिहास जिसके बारे में लोग बहुत कम जानते हैं

महाराजा लाखन पासी (Maharaja Lakhna Pasi) का इतिहास लखनऊ के नवाबों के आने से सदियों पुराना है, और उन्हें कई लोग लखनऊ के वास्तविक संस्थापकों में से एक मानते हैं।
यहाँ उनके गौरवशाली इतिहास का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:
👑 महाराजा लाखन पासी का इतिहास
लाखन पासी मध्यकाल में अवध क्षेत्र के शक्तिशाली राजा थे, जो पासी समुदाय से आते थे।
🏛️ लखनऊ के संस्थापक (Founder of Lucknow)
* शासन काल: माना जाता है कि उनका राज्यकाल 10वीं से 11वीं शताब्दी ईस्वी के बीच था, जो दिल्ली सल्तनत या मुगल शासन से काफी पहले था।
* किला और शहर: उन्होंने ही गोमती नदी के किनारे एक विशाल किले 'लाखनकोट' का निर्माण कराया था। इसी किले और बस्ती के नाम पर इस शहर को पहले लखनपुर या लखनावती कहा जाने लगा, जो बाद में लखनऊ बन गया।
* किला कहाँ था: लाखन पासी का किला उसी ऊँचे टीले पर स्थित था, जहाँ बाद में मच्छी भवन बना और फिर बड़ा इमामबाड़ा परिसर (आज का किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी - KGMU क्षेत्र भी इसी विशाल किले के कुछ हिस्से पर है) बनाया गया। उनका किला लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबा और चौड़ा था तथा ज़मीन से करीब 20 मीटर ऊँचा था।
🗺️ राजधानी का नामकरण
* कुछ लोक कथाओं और ऐतिहासिक दावों के अनुसार, राजा लाखन पासी की पत्नी का नाम लखनावती था, और उनके नाम पर ही शहर का नाम 'लखनावती' या 'लखनपुर' पड़ा।
* उन्होंने अपने राज्य में लखन कुंड (एक कुंड) और नाग मंदिर का भी निर्माण कराया था, क्योंकि वह नागों के उपासक थे।
⚔️ अंतिम युद्ध और बलिदान
* राजा लाखन पासी एक वीर योद्धा थे। उनका अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण युद्ध सैयद सालार मसूद गाज़ी की सेनाओं के साथ हुआ था, जो 11वीं शताब्दी की शुरुआत में इस क्षेत्र पर आक्रमण करने आए थे।
* वीरगति: लाखनकोट के इस युद्ध में राजा लाखन पासी ने अभूतपूर्व साहस का प्रदर्शन किया, लेकिन अंततः वीरगति को प्राप्त हुए।
* लोक कथाएँ: लोकगीतों में उनकी बहादुरी की कहानियाँ आज भी प्रचलित हैं, जिनमें कहा जाता है कि युद्ध में सिर कट जाने के बाद भी उनका धड़ लड़ता रहा, जिसने शत्रु सेना में दहशत पैदा कर दी थी।
इस प्रकार, महाराजा लाखन पासी का इतिहास लखनऊ के उद्भव से जुड़ा हुआ है, जिसे नवाबों और मुगलों के आगमन से पहले इस क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली शासकों में से एक माना जाता है।
क्या आप अवध क्षेत्र के एक और प्रसिद्ध पासी राजा, महाराजा बिजली पासी के बारे में जानना चाहेंगे?

“जब दुनिया पत्थरों को रगड़कर आग जलाना सीख रही थी,तब हमारे पूर्वज उन्हीं पत्थरों में जीवन की लौ जगा रहे थे।उनके औज़ार भले...
30/10/2025

“जब दुनिया पत्थरों को रगड़कर आग जलाना सीख रही थी,
तब हमारे पूर्वज उन्हीं पत्थरों में जीवन की लौ जगा रहे थे।
उनके औज़ार भले साधारण थे,
पर उनकी कला ने समय को अमर कर दिया।
आज भी ये मूर्ति आधुनिक शिल्प को चुनौती देती है,
और इसे तोड़ने वालों के हाथ इतिहास के आगे काँप जाते हैं।”

यह शानदार मूर्ति कर्नाटक, भारत के हासन जिले में स्थित बेलूर के प्रसिद्ध चेन्नकेशव मंदिर (Chennakeshava Temple) की दीवारों पर पाई जाती है।
यह मूर्ति होयसला कला (Hoysala Art) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अपनी बारीक नक्काशी और असाधारण अलंकरण के लिए जानी जाती है।
⏳ इस मूर्ति और मंदिर का इतिहास
* स्थान: चेन्नकेशव मंदिर, बेलूर, हासन जिला, कर्नाटक, भारत।
* निर्माण काल: इसका निर्माण होयसला वंश के महान राजा विष्णुवर्धन द्वारा 1117 ईस्वी में करवाया गया था। यह मंदिर लगभग एक शताब्दी तक बनाया गया था।
* समर्पण: यह मंदिर मुख्य रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है, जिन्हें यहाँ के शव या चेन्नकेशव (अर्थात सुंदर केशव) के रूप में पूजा जाता है।
* कला शैली: यह मंदिर होयसला स्थापत्य शैली का एक प्रमुख नमूना है, जिसमें मूर्तियों को बनाने के लिए नरम सोपस्टोन (steatite) का उपयोग किया गया है, जिससे मूर्तिकारों को अविश्वसनीय रूप से जटिल और बारीक नक्काशी करने की सुविधा मिली।
* महत्व: मंदिर की बाहरी दीवारों पर हिंदू धर्मग्रंथों, जैसे रामायण और महाभारत के दृश्यों को दर्शाया गया है। इसके अलावा, यहाँ की मदनिका (स्वर्गीय नर्तकियों) की मूर्तियां, जो कि इस मंदिर की एक खास विशेषता हैं, विश्व प्रसिद्ध हैं। आपकी तस्वीर में दिखाई गई मूर्ति संभवतः भगवान विष्णु या किसी अन्य महत्वपूर्ण देवता/देवता का रूप है, जो मंदिर की बाहरी या भीतरी दीवारों पर लगे अनेक शिल्पों में से एक है। ये मूर्तियां तत्कालीन कला, संस्कृति, पहनावे और आभूषणों की झलक प्रस्तुत करती हैं।
यह मंदिर भारतीय विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और अपनी अद्भुत वास्तुकला तथा मूर्तिकला के कारण लाखों पर्यटकों और भक्तों को आकर्षित करता है।

जरा गौर से आप इस मूर्ति को देखिए। यह विष्णु भगवान के वराह अवतार की है जिसमे वह पृथ्वी को समुद्र में से निकालते हुए दिखाए...
29/10/2025

जरा गौर से आप इस मूर्ति को देखिए। यह विष्णु भगवान के वराह अवतार की है जिसमे वह पृथ्वी को समुद्र में से निकालते हुए दिखाए गए है।
अब सबसे बड़ा सवाल और आश्चर्य ये होता है की इसमें पृथ्वी का आकार गोल दिखाया गया...
और दुनिया को पृथ्वी के गोल होने का निश्चित ज्ञान आज से 500-600 साल पहले मिला, जबकि यह मूर्ति जगन्नाथ मंदिर में हजारों साल पहले से है।

सनातन का गौरवपूर्ण इतिहास जोर जोर से चीख चीख कर गवाही दे रहा है,कि पृथ्वी गोल है ये हमको सदियों से पता है।

इसी लिए तो हमारे विषय का नाम भी भू गोल रखा, भू चपटे भी रख सकते थे, क्योंकि हमे ज्ञान था की पृथ्वी किस आकार की है।

चेतावनी है उन लोगो को जो हमारे इतिहास को मिटाने की बात करते है।
हमारा इतिहास तो पत्थरो पर लिखा हुआ है, कोई इसको क्या मिटाएगा, खुद ही मिट्टी हो जाएगा।

☺️

*ll शुभ दीपावलीll*   आपको ओर आपके परिवार को  दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओॅ के साथ "प्रकाश व प्रसन्नता के पर्व दीपावली पर...
20/10/2025

*ll शुभ दीपावलीll*
आपको ओर आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओॅ के साथ "प्रकाश व प्रसन्नता के पर्व दीपावली पर बहुत बहुत मंगलकामनाएं।

धन, वैभव, यश, ऐश्वर्य के साथ दीपावली पर माँ लक्ष्मी आपकी सुख सम्पन्नता स्वास्थ्य व हर्षोल्लास में वृद्धि करें, इन्हीं शुभेच्छाओं के साथ।"

🌹🙏ll शुभ दीपावलीl🙏🌹

14/09/2025

📢 *जॉब का सुनहरा अवसर – तुरंत भर्ती* 🔐

*पद उपलब्ध हैं:*
✅ *सुरक्षा अधिकारी* (पूर्व सैनिक)
✅ *सुरक्षा गार्ड*
✅ *महिला सुरक्षा गार्ड*

📍 *कार्य स्थल:* *लखनऊ*
🎓 *शैक्षिक योग्यता:* *न्यूनतम 10वीं पास*
👮‍♂️ *अनुशासित, जिम्मेदार और ईमानदार उम्मीदवारों को प्राथमिकता*

💼 *सुविधाएं:*
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📞 *सीधे संपर्क करें:*
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*सीटें सीमित हैं – आज ही संपर्क करें!*
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Thanks for being a top engager and making it on to my weekly engagement list! 🎉 Sushil Pershad, Tathagata Chakraborti, N...
09/09/2025

Thanks for being a top engager and making it on to my weekly engagement list! 🎉 Sushil Pershad, Tathagata Chakraborti, Navneet Dongarwar, Pramod Dubey, Arogya Pariwar

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Lucknow
226010

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