07/08/2021
अभी हाल ही में कुछ दिन पूर्व , फारेस्ट गॉर्ड और ATO टीम हामटा में कैम्पिंग साइट निरीक्षण पर निकली थी । चेंगिग के दौरान वहां पर सराकरी भूमि पर बाहरी लोगों द्वारा कैम्पिंग लगाई गई थी , सरकार द्वारा उन्हें 1 या 2 टेंट की परमिशन थी लेकिन लगाए 10 टेंट गए थे , कचरा फैला रखा था और भी कई कुछ सीधे तौर पर कहा जाए तो पहाड़ों का सत्यानाश किया जा रहा है । अभी हाल ही में ATO मनाली द्वारा सरकार को कहा गया है कि बाहरी लोगों को इन सब की अनुमति ना दें क्योंकि पहाड़ों की फिक्र जितनी पहाड़ी कर सकता है उतना कोई नहीं , बाहरी लोग सिर्फ कमाने आते हैं और संसाधनों का दोहन करते हैं उन्हें संस्कृति , सफाई , वातावरण से कुछ लेने देना नहीं होता तभी शहरों में हालात खराब होने के बाद पहाड़ों का रुख करते हैं । सरकार को समझना चाहिए हिमाचल एक छोटा राज्य है जहां मौजूदा समय में 8 लाख 40 हज़ार के करीब युवा बेरोजगार है । वहीं मनाली की बात करें तो 70% यूथ एडवेंचर एक्टिविटी से घर चलाता है यदि इस छोटे से राज्य में सब बाहरी कम्पनियों को ही करने दिया जाएगा तो यहां के लोकल यूथ का क्या होगा ? वे कहां जाएंगे सालों से वे टूरिस्टों को सुविधा दे रहें है और एकदम से ऐसे सरकारी फरमान से उनका जीवन तहस नहस हो जाता है । हम सभी लोकल लोगों को एकजुट होना होगा नहीं तो बाहरी अतिक्रमण हमारे कामों के साथ साथ हमारी संस्कृति , कल्चर , बोली , परिधान हर चीज़ को ले डूबेगा । कृपा करके भविष्य का सोचें व इस हिमाचल बेचनी वाली सोच का पुरजोर तरीके से विरोध करें । देवी देवताओं की भूमि , जोत जोगणी जैसे पावन भूमि की गरिमा लोकल ही समझ सकता है कोई बाहरी इस पर सिर्फ हंसता है , उदहारण के लिए जोगणी फॉल में कचरे की तस्वीर जो कुछ दिन पहले आई थी उसे ही समझ लें आप सभी को भविष्य समझ आ जाएगा । Share and comments
धन्यवाद