23/01/2026
आज भी माता बगलामुखी बाखली द्वारा अपनी शक्ति स्वरूप दिया हुआ ढोल प्रभु श्री महाकालेश्वर हनुमान जी के पास है ,जो स्वयं माता का प्रभु के साथ होने का प्रतीक हैं।
माता बगलामुखी और प्रभु हनुमान के बारे में कुछ रोचक बातें।
माता बगलामुखी (शक्ति) और भक्त शिरोमणि हनुमान जी (भक्ति और संकटमोचन) का संबंध बहुत गहरा है। शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी माता बगलामुखी के मुख्य रक्षक और उनके अस्त्र-शस्त्रों के अधिपति माने जाते हैं।
इन दोनों की संयुक्त महिमा से जुड़ी कथा और आध्यात्मिक रहस्य नीचे दिए गए हैं:
1. हनुमान जी: माता बगलामुखी के 'स्तम्भन' देव
माता बगलामुखी स्तम्भन (रोक देने वाली) की देवी हैं। तंत्र शास्त्र के अनुसार, जब साधक माता की पूजा करता है, तो उसकी रक्षा का भार हनुमान जी पर होता है। हनुमान जी को माता बगलामुखी का "एकपाद" अवतार या उनका अनन्य सेवक माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि बिना हनुमान जी की आज्ञा या उनकी पूजा के, बगलामुखी साधना पूर्ण नहीं होती क्योंकि हनुमान जी ही उस ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं।
2. पौराणिक संदर्भ: रावण का वध और पाताल लोक
एक प्रचलित कथा के अनुसार, जब अहिरावण भगवान राम और लक्ष्मण को चुराकर पाताल लोक ले गया था, तब हनुमान जी ने उन्हें बचाने के लिए भयंकर युद्ध किया।
कहा जाता है कि उस समय हनुमान जी ने शक्ति की उपासना की थी ताकि वे मायावी राक्षसों का अंत कर सकें।
माता बगलामुखी की कृपा से ही हनुमान जी को वह शक्ति प्राप्त हुई जिससे वे शत्रुओं की बुद्धि और बल को जड़ कर सके।
इसी कारण कई जगहों पर हनुमान जी को 'बगलामुखी हनुमान' के रूप में भी पूजा जाता है, जहाँ उनके हाथ में माता का प्रिय अस्त्र 'गदा' और 'स्तम्भन शक्ति' होती है।
3. आध्यात्मिक रहस्य: बुद्धि और वाणी का नियंत्रण
माता बगलामुखी वाणी और शत्रुओं के षड्यंत्र को रोकने वाली देवी हैं। दूसरी ओर, हनुमान जी 'बुद्धिमतां वरिष्ठम्' (बुद्धिमानों में श्रेष्ठ) हैं।