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Mero Vrindavan प्रिय भक्तगणों, राधे-राधे/हरे कृष्णा!

"मेरो वृन्दावन" पेज का मुख्य उद्देश्य वृन्दावन के पर्यटक, तीर्थ, धार्मिक स्थानों के बारे में वास्तविक व रोचक जानकारी प्रदान करना है। फलस्वरूप वृन्दावन में आनेवाले भक्तगणों को तीर्थ यात्रा का लाभ प्राप्त हो सके।

मान धर्यो मनमोहिनी प्यारी, घन-निभृत निकुंज अँधियारी।विटप-वितान बिलसत छाया, झरति सुधा ससि रजनी प्यारी॥बैठी राधा तिरछे दृग...
17/05/2026

मान धर्यो मनमोहिनी प्यारी, घन-निभृत निकुंज अँधियारी।
विटप-वितान बिलसत छाया, झरति सुधा ससि रजनी प्यारी॥
बैठी राधा तिरछे दृग धारि, अधर अरुण, उर अंतर भारी।
कुंचित भ्रुकुटि, कुटिल मुसुकानि, आगम पिय को निहारी॥
आवत श्याम सरस सुघराई,
मृदु मनुहार करत बनवारी॥
कसुम्बी पाग सिर, चंद्रिका सुँहारी,
कटि पट सोहत श्याम मुरारी॥
अंतर हास, बहिरंग रोष, यह प्रणय-मान गति अति न्यारी।
कहै ‘दास’ मिलि हँसि दुहुँ मुख, बरसै प्रेम सुधा सुखकारी॥

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श्री बांके बिहारी जी के आज सुबह के बहुत प्यारे दर्शन 16/05/2026कुंज बिहारी श्री हरिदास 🙏
16/05/2026

श्री बांके बिहारी जी के आज सुबह के बहुत प्यारे दर्शन 16/05/2026
कुंज बिहारी श्री हरिदास 🙏

(राग काफ़ी)हरि हरि जप लेनी औसर बीतो जाय।जो दिन गये सो फिर नहिं आवैं, करि विचार मन लाय॥ [1]या जग बाजी साँच न जानो, तामें ...
16/05/2026

(राग काफ़ी)
हरि हरि जप लेनी औसर बीतो जाय।
जो दिन गये सो फिर नहिं आवैं, करि विचार मन लाय॥ [1]
या जग बाजी साँच न जानो, तामें मत भरमाय।
कोई किसी का है नहिं बौरे, नाहक लियौ लगाय॥ [2]
अंत समय कोई काम न आवैं, जब जम देहि बोलाय।
चरणदास कहैं ‘सहजो बाई’, सत संगत सरनाय॥ [3]
- श्री सहजोबाई

सहजोबाई कहती हैं कि हे मूर्ख! समय बीतता जा रहा है, इसलिए अवसर रहते 'हरि-हरि' नाम का जप कर लो। अपने मन को एकाग्र कर इस बात पर विचार करो कि जो दिन एक बार बीत गए, वे फिर कभी लौटकर नहीं आएंगे। [1]

इस संसार को एक खेल मात्र समझो, इसे सत्य मानकर इसमें भ्रमित मत हो। हे बावरे मन! यहाँ वास्तव में कोई किसी का नहीं है; तू व्यर्थ ही मोह में क्यों जीवन व्यतीत कर रहा है? [2]

जब मृत्यु (यमराज) का बुलावा आएगा, तब अंत समय में कोई भी सांसारिक संबंधी काम नहीं आएगा। संत चरणदास जी की शिष्या सहजोबाई कहती हैं कि केवल संत की संगति (सत्संग) और प्रभु की शरण ही कल्याणकारी है। [3]

चलो मन ! गहवर कुंज लतान।जहँ विहरति वृषभानुनंदिनी, अरु नँदनंदन कान्ह॥नित नव लीला करत गौर – हरि, सँग लै ब्रज बनितान।सिंहास...
15/05/2026

चलो मन ! गहवर कुंज लतान।
जहँ विहरति वृषभानुनंदिनी, अरु नँदनंदन कान्ह॥
नित नव लीला करत गौर – हरि, सँग लै ब्रज बनितान।
सिंहासन आसीन ललिहिं पग, चापत श्याम सुजान॥
फिरत रहत गहवर गलियन महँ, करत लली गुन गान।
मुकुट उतारि ‘कृपालु’ धरत पग, लखि मानिनि को मान॥

15/05/2026
कौन बड़ा कौन छोटा     ये पहेली राज हैजो है करीब मेरे "वल्लभ"  के     उनकी तो बात ही कुछ खास है मत भूलो "श्री वल्लभ" नाम ...
14/05/2026

कौन बड़ा कौन छोटा
ये पहेली राज है
जो है करीब मेरे "वल्लभ" के
उनकी तो बात ही कुछ खास है
मत भूलो "श्री वल्लभ" नाम को,
जाना सागर पार है..
जीवन है छोटी सी नैया,
"वल्लभ" नाम पतवार है..💞

जय श्री वल्लभ

सुन्दर यमुना तीर री, मनमोहन ठाड़े।जबतें दृष्टि परी या मुख पे,तबतें धरत न धीर री।।मृगमद तिलक अलक घुंघरारी,नासा मुक्ता कीर...
13/05/2026

सुन्दर यमुना तीर री, मनमोहन ठाड़े।
जबतें दृष्टि परी या मुख पे,तबतें धरत न धीर री।।
मृगमद तिलक अलक घुंघरारी,नासा मुक्ता कीर री।
सूरदास प्रभु वेणु बजावत,थाक्यो सरिता नीर री।।

जागो हो तुम नंदकुमार,बलि-बलि जाऊँ मुखारविंद की, गोसुत मेलो करो शृंगार ॥१॥आज कहा सोवत त्रिभुवनपति, और वार तुम उठत सवार।वा...
11/05/2026

जागो हो तुम नंदकुमार,
बलि-बलि जाऊँ मुखारविंद की, गोसुत मेलो करो शृंगार ॥१॥

आज कहा सोवत त्रिभुवनपति, और वार तुम उठत सवार।
वारंबार जगावत माता, कमल-नयन भयो भवन उजियार ॥२॥

दधि मथौं, नवनीत देहौं, संग सखा ठाढ़े सिंहद्वार।
उठो क्यों न मोहि वदन दिखावो, सूरदास के प्राण आधार ॥३॥

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प्रातःकाल की मधुर बेला है—व्रज में भोर की हल्की आभा फैल चुकी है, घर-घर मंथन की ध्वनि गूँज रही है। ऐसी सुहावनी घड़ी में मैया यशोदा अपने लालन नंदकुमार को बड़े कोमल भाव से जगाने आती हैं। वे प्रेम से निहारते हुए कहती हैं—हे त्रिभुवन के स्वामी, अब तक क्यों सो रहे हो? तुम्हारे उठते ही तो सारा भवन, सारा व्रज उजियारा हो जाता है।
मैया बार-बार स्नेहभरी मनुहार करती हैं—उठो लाला, मुखारविंद दिखाओ, मैं तुम्हारा शृंगार करूँ, ताज़ा माखन खिलाऊँ। द्वार पर सखा भी प्रतीक्षा में खड़े हैं, सब तुम्हारी राह देख रहे हैं। इस प्रकार यशोदा जी का मातृ-हृदय वात्सल्य से भरकर, अत्यंत कोमलता और प्रेमपूर्ण आग्रह से श्रीकृष्ण को जगाने में लीन है—जहाँ हर शब्द में ममता और हर भाव में अनुराग झलकता है।

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