06/02/2026
मिर्ज़ापुर के नारघाट स्थित ‘नगर द्वार’ का इतिहास
मिर्ज़ापुर के नारघाट में स्थित यह भव्य ऐतिहासिक भवन महान इतिहासकार, विचारक और लेखक डॉ काशी प्रसाद जायसवाल की विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। 27 नवम्बर 1881 को मिर्ज़ापुर में जन्मे डॉ जायसवाल बीसवीं सदी के उन अग्रणी भारतीय विद्वानों में रहे, जिन्होंने भारतीय इतिहास और बौद्धिक विमर्श को नई दिशा दी। उन्हें भारतीय इतिहास लेखन में उनके महत्वपूर्ण योगदान के कारण भारतीय इतिहास का जनक भी माना जाता है।
इंग्लैंड से लौटने के बाद वर्ष 1917 में उन्होंने इस भव्य द्वारनुमा भवन का निर्माण हथुआ स्टेट (पटना) के राजा के स्वागत के लिए कराया, जो आज भी मिर्ज़ापुर की ऐतिहासिक पहचान के रूप में खड़ा है। मात्र 56 वर्ष की आयु में 4 अगस्त 1937 को पटना में उनका निधन हो गया, लेकिन इतिहास और विचार के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी प्रेरणास्रोत है।
वर्तमान समय में इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण उनके परिवार द्वारा किया जा रहा है। मिर्ज़ापुर में शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में भी उनका नाम सम्मान के साथ जुड़ा हुआ है। जायसवाल समाज समय-समय पर उनके योगदान को देखते हुए उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किए जाने की मांग करता रहा है।
यह भवन केवल एक स्थापत्य नहीं, बल्कि मिर्ज़ापुर की बौद्धिक और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।