Himadri Tour-Trek & Advanture Gears

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HiMADRi Tour - Trek & Adventure Gears is working in the field of trekking, Mountaineering and skiing with a view of taking young boys and girls to nature study camps to make then go near nature and understand her wonders. We manage some of the unique tours and treks for the younger students to give them opportunity to study nature and its surroundings in addition to our regular packages viz. River

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21/03/2024

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14/02/2024
23/12/2023

HIMADRI Tour Trek & Adventure Gears HIMADRI Holidays and Events

27/03/2021
चारधाम : द्वितीय केदार मद्महेश्वर के खुले कपाट, 6 महीने तक भगवान की पूजा मद्महेश्वर में होगी****************************...
12/05/2020

चारधाम : द्वितीय केदार मद्महेश्वर के खुले कपाट, 6 महीने तक भगवान की पूजा मद्महेश्वर में होगी

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द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर मन्दिर के कपाट सोमवार को सुबह 11 बजे वैदिक मंत्रोच्चार व पौराणिक रीति रिवाजों के साथ खोल दिए गए हैं। अब छह माह भगवान की पूजा अर्चना मद्महेश्वर में ही होगी। वहीं लॉकडाउन के चलते प्रशासन ने सीमित लोगों को ही धाम जाने की अनुमति दी।

सोमवार को सुबह छह बजे डोली गोंडार से रवाना हुई। 10 बजे देवदर्शनी में पहुंचने के बाद कुछ ही देर में मंदिर परिसर पहुंची। यहां ठीक 11 बजे मन्दिर के कपाट खोल दिए गए। बीते शनिवार को शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मन्दिर उखीमठ से भगवान की चलविग्रह उत्सव डोली उच्च हिमालय क्षेत्र मद्महेश्वर धाम के लिए रवाना हुई थी। प्रथम पड़ाव रांसी व द्वितीय पड़ाव गोंडार में रात्रि विश्राम करने के बाद डोली मद्महेश्वर मन्दिर परिसर में पहुंची। सोमवार को सुबह 5 बजे गोंडार में पुजारी गंगाधर लिंग द्वारा भगवान का अभिषेक, श्रृंगार,भोग एवं पूजा अर्चना की गई। भगवान की डोली भोले के जयकारों के साथ धाम के लिए रवाना हुई।

डोली भीमसी, वनतोली, कूनचट्टी, नानू होते हुए सुबह 10 बजे देवदर्शनी में पहुंची। जिसके बाद स्थानीय हकहाकुधारी व मन्दिर समिति द्वारा कपाट खोलने की तैयारी शुरू की गई। करीब एक घण्टे तक देवदर्शनी में विश्राम करने के बाद 11 बजे डोली मन्दिर परिसर में पहुंची।

भगवान की डोली ने मन्दिर परिसर में स्थित पौराणिक बर्तनों का भी निरीक्षण किया। मन्दिर की एक परिक्रमा के बाद वैदिक मंत्रोच्चार,शंख ध्वनि व पौराणिक परम्परा के साथ मन्दिर के कपाट खोले गए। जिसके बाद पुजारी द्वारा भगवान को समाधि से जागृत किया गया। उसके बाद भगवान का महाभिषेक पूजन का कार्य शुरू हुआ। बाद में भगवान की भोगमूर्ति को गर्भगृह में विराजमान किया गया और पुजारी द्वारा विशेष श्रृंगार किया गया। वहीं लॉकडाउन के मद्देनजर इस बार कपाट खोलने के मौके पर सीमित लोग ही शामिल हो पाए।

साभार :: संवाददाता, ऊखीमठ, Mon, 11 May 2020 04:55 PM

द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर मन्दिर के कपाट सोमवार को सुबह 11 बजे वैदिक मंत्रोच्चार व पौराणिक रीति रिवाजों के सा...

अब केवल एक हफ्ते में पूरी कर सकेंगे कैलाश मानसरोवर यात्रा, दुर्गम रास्तों का भी नहीं करना पड़ेगा सफर --------***********...
10/05/2020

अब केवल एक हफ्ते में पूरी कर सकेंगे कैलाश मानसरोवर यात्रा, दुर्गम रास्तों का भी नहीं करना पड़ेगा सफर --------

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चीन सीमा तक सड़क बनने से प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा अब सुगम हो जाएगी। इस यात्रा में अब महज एक सप्ताह का समय लगेगा। अब तक इसमें 21 दिन का समय लगता था। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए अब तक यात्रियों को आधार शिविर धारचूला से लगभग 80 किलोमीटर की यात्रा पैदल ही तय करनी पड़ती थी।

कठिन और दुर्गम स्थलों से होकर गुजरने वाली यात्रा बेहद जोखिम भरी थी। यात्रियों को पहली शाम आधार शिविर में बितानी पड़ती थी। इसके बाद मांगती, गाला, बूंदी, गुंजी और नाभीढांग के पड़ावों में रुकना पड़ता था।

सीमांत तक सड़क बनने से अब कैलाश यात्री दिल्ली से सीधे लिपुलेख पहुंच सकेंगे। इस सड़क के बनने से अब तक कठिन मानी जाने वाली यात्रा सुगम हो जाएगी। इसके अलावा छोटा कैलाश की यात्रा भी सुगम होगी।

छोटा कैलाश के यात्री गुंजी, कुटी और जौलिंगकांग तक वाहन से पहुंच सकेंगे। इसके लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीआरओ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह अद्भुत और प्रशंसनीय है कि सीमा सड़क संगठन ने इस कठिन कार्य को पूरा किया।

घट्टाबगढ़-लिपुलेख सड़क के ऑनलाइन उद्घाटन के अवसर पर मौजूद रहे अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के सांसद अजय टम्टा ने चीन सीमा के लिए मुनस्यारी से बन रही धापा-बोगड्यार-मिलम मार्ग का मामला भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष उठाया। इस पर उन्होंने कहा कि 2021 मार्च तक इस मार्ग का भी निर्माण पूर्ण हो जाएगा।

साभार ::

उत्तराखण्ड अब केवल एक हफ्ते में पूरी कर सकेंगे कैलाश मानसरोवर यात्रा, दुर्गम रास्तों का भी नहीं करना पड़ेगा सफर By Cha...

कोरोना : मंदिरों के कपाट खोलकर सांकेतिक रूप से शुरु होगी चारधाम यात्रा, बदरीनाथ-केदारनाथ के रावल भी होंगे क्वारंटाइनचारध...
08/04/2020

कोरोना : मंदिरों के कपाट खोलकर सांकेतिक रूप से शुरु होगी चारधाम यात्रा, बदरीनाथ-केदारनाथ के रावल भी होंगे क्वारंटाइन

चारधाम यात्रा की शुरुआत इस बार सांकेतिक रूप से ही होने की संभावना है। एक तो यात्रा पर प्रतिबंध के कारण लोगों के यात्रा में शामिल होने पर पहले ही संशय है। उस पर प्रशासन की तैयारी भी अधूरी पड़ी हुई है। उत्तराखंड में चारों धामों के कपाट अप्रैल अंत में खुलने हैं। पर कोरोना के चलते तैयारियां अटकी हुई हैं।

यात्रा सम्पन्न कराने में पुलिस, प्रशासन के साथ ही नगर निकाय और स्वास्थ्य कर्मियों की अहम भूमिका होती है। लेकिन इस बार उक्त चारों महकमें कोरोना की लड़ाई में उलझे हुए हैं। दूसरी तरफ सड़क और पैदल मार्ग खोलने वाले श्रमिक भी अपने घरों को लौट गए हैं। ऐसे में प्रशासन तय तिथि पर किसी तरह कपाट खोलने भर की व्यवस्था जुटाने पर ध्यान दे रहा हैं।

सूत्रों के अनुसार संक्रमण का खतरा पूरी तरह टलने तक प्रशासन कम से कम लोगों को ही चारों धामों में जाने की अनुमति देगा।
संक्रमण रोकने की चिंता : प्रशासन की चिंता यह भी है कि पहाड़ में अभी संक्रमण के मामले सामने नहीं आए हैं। अब अगर यात्रा प्रारंभ होती है तो देशभर के यात्री इसमें शामिल होंगे।

जबकि देश के कई राज्यों में अभी कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। इन राज्यों को पूरी तरह कोरोना मुक्त होने में अभी समय लगेगा। ऐसे में यदि यहां के लोग चारों धामों में आते हैं तो फिर यहां भी संक्रमण का खतरा रहेगा। चारों धामों में यात्रा सीजन में भी मौसम में ठंडक होने के कारण संक्रमण का असर कुछ ज्यादा ही हो सकता है।

बदरीनाथ-केदारनाथ के रावल भी होंगे क्वारंटाइन
बदरीनाथ और केदारनाथ के रावल इन दिनों क्रमश: कर्नाटक और केरल की यात्रा पर गए हैं। इस कारण इन दोनों को उत्तराखंड पहुंचने पर क्वारंटाइन में रहना होगा। चार धाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगाई ने बताया कि चारों धाम के कपाट अपने पूर्व निर्धारित तिथि एवं समय पर खुलेंगे।

कपाट खुलने के दौरान कोरोना से बचाव के लिए केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन किया जाएगा। आचार्य ममगाईं ने बताया कि बदरीनाथ धाम के रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी और केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग का भी चिकित्सकीय परीक्षण होना जरूरी है। बदरीनाथ धाम के रावल, नायब रावल और उनके दो सेवक आजकल केरल में हैं। इसी तरह केदारनाथ मंदिर के रावल, उनके निजी सेवक कर्नाटक में है।

इस तरह कपाट खुलने से पूर्व उनके उत्तराखंड आगमन पर सभी को 14 दिन क्वारंटाइन किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने चमोली और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन से बात कर ली है। बदरीनाथ धाम के कपाट 30 अप्रैल को खुलने है। केदारनाथ धाम के कपाट 29 अप्रैल को खुलने हैं, जबकि गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट अक्षय तृतीया पर 26 अप्रैल को खुल रहे है।

फिलहाल सबकी प्राथमिकता कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकना है। इस कारण यात्रा तैयारियां प्रभावित हुई हैं। फिर भी तय तिथि पर कपाट खोलने से लेकर दैनिक पूजा जैसी परंपराओं का पालन तो किया ही जाना है, इसके लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। धाम में पहुंचने वाले लोगों की स्वास्थ्य जांच भी की जानी है बाकि यात्रा के लिए शासन से जो निर्देश मिलेंगे, उसी क्रम में व्यवस्था बनाई जाएगी। - रविनाथ रमन मंडलायुक्त और सीईओ देवस्थानम

साभार : हिन्दुस्तान टीम, Last updated: Wed, 08 Apr 2020 11:37 AM

यमुनोत्री धाम के कपाट 26 अप्रैल को इस शुभ मुहूर्त में खुलेंगेमां यमुना के शीतकालीन प्रवास खुशीमठ (खरसाली) में यमुना जयंत...
31/03/2020

यमुनोत्री धाम के कपाट 26 अप्रैल को इस शुभ मुहूर्त में खुलेंगे

मां यमुना के शीतकालीन प्रवास खुशीमठ (खरसाली) में यमुना जयंती उत्सव को लॉकडाउन के कारण सामान्य रूप से मनाया गया। यमुना जयंती उत्सव के अवसर पर तीर्थ पुरोहितों ने कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ख्याल रखा। इस मौके पर यमुनोत्री धाम के कपाट खोलने का मुहूर्त भी तय किया गया। इस बार यमुनोत्री धाम के कपाट 26 अप्रैल 2020 को अभिजीत मुहूर्त में 12 बजकर 41 मिनट पर ग्रीष्मकाल के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे ।

चैत्र शुक्ल षष्ठी को मां यमुना जी पृथ्वी लोक पर अवतरित हुई थीं। इसलिए इस दिन को यमुना के मायके खरसाली में धूमधाम से यमुना जयंती उत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक परंपरा अनुसार सोमवार को सुबह से ही खरसाली में शीतकालीन पुजारियों एवं यमुनोत्री मंदिर समिति ने परंपरागत रीति रिवाज के साथ पूजा अर्चना प्रारम्भ की। साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र से लाई गई औषधीय वनस्पति जटामासी, केदारपाती, गुग्गल आदि को भी पूजन के लिए एकत्र किया। शीतकालीन प्रवास खरसाली में विराजमान यमुनाजी की भोग मूर्ति को पंचगव्य से स्नान कराकर उन्हें गाय के घी से बने पकवानों का भोग लगाया।

इसके बाद पुरोहितों ने यमुनाजी के प्रतीक चिह्न छड़ व बल्लम के साथ यमुना नदी के तट पर पहुंचकर उनका अभिषेक किया तथा विधिवत हवन पूजा अर्चना की। आरती के उपरांत यमुना नदी में दीपदान भी किया गया। यमुना मंदिर समिति के सचिव कृतेश्वर उनियाल ने बताया कि यमुना जयंती पर यह अनुष्ठान पीढ़ियों से चला आ रहा है।

हालांकि कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार द्वारा घोषित लॉकडाउन के कारण इस बार मां यमुना की जयंती उत्सव कार्यक्रम को सीमित रखा। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर ग्रीष्मकाल के लिए यमुनोत्री धाम की यात्रा के लिए कपाट खोलने का मुहूर्त भी निकाला गया। जिसमें अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर 26 अप्रैल को अभिजीत मुहूर्त में विधिवत हवन पूजा अर्चना के बाद दोपहर 12 बजकर 41 मिनट पर यमुनोत्री धाम के कपाट देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए दर्शनार्थ कपाट खोल दिये जाएंगे। जिसके बाद 6 माह तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन यमुनोत्री धाम में कर सकेंगे।

Courtesy Source : Live Hindustan.com
हमारे संवाददाता ,बड़कोट
Last updated: Mon, 30 Mar 2020 11:15 PM
https://www.livehindustan.com/astrology/story-yamunotri-dham-kapaat-doors-will-open-on-26-april-on-this-auspicious-time-3118371.html

मां यमुना के शीतकालीन प्रवास खुशीमठ (खरसाली) में यमुना जयंती उत्सव को लॉकडाउन के कारण सामान्य रूप से मनाया गया। यम.....

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25/12/2019

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