Jai Shree Ram Tourism

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📍 Kamakhya Temple Pithoragarh 🛕🚩पिथौरागढ़ का कामाख्या मंदिर मुख्य शहर से लगभग 6 से 7 किलोमीटर दूर कुसौली गाँव में सैनिक ...
18/08/2026

📍 Kamakhya Temple Pithoragarh 🛕🚩
पिथौरागढ़ का कामाख्या मंदिर मुख्य शहर से लगभग 6 से 7 किलोमीटर दूर कुसौली गाँव में सैनिक छावनी के पास एक सुंदर पहाड़ी पर स्थित है। यह उत्तराखंड राज्य में माँ कामाख्या का एकमात्र और प्रसिद्ध मंदिर है, जिसकी स्थापना वर्ष 1972 में मदन मोहन शर्मा द्वारा की गई थी।

मुख्य विशेषताएँ

स्थान: पिथौरागढ़-झूलाघाट मार्ग पर सैन्य छावनी के ऊपर पहाड़ी।

दूरी: पिथौरागढ़ मुख्य बाजार से 6-7 किमी।

दृश्य: मंदिर परिसर से हरी-भरी घाटी, सीढ़ीदार खेत और नैनी सैनी हवाई पट्टी का सुंदर नजारा दिखता है।

अन्य मूर्तियाँ: मुख्य देवी के अलावा बटुक भैरव, हनुमान और लक्ष्मी नारायण की मूर्तियाँ भी यहाँ स्थापित हैं।

यात्रा की जानकारी

खुले रहने का समय: यह मंदिर साल भर खुला रहता है। सुबह और शाम की आरती यहाँ नियमित होती है।

उत्सव: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान यहाँ दस दिनों तक विशेष अनुष्ठान और अखंड ज्योति जलाई जाती है। मकर संक्रांति और शिवरात्रि पर भी भारी भीड़ होती है।

कैसे पहुँचें: पिथौरागढ़ शहर से टैक्सी या निजी वाहन द्वारा आसानी से सड़क मार्ग से मंदिर पहुँचा जा सकता है।

यदि आप इस यात्रा के बारे में कुछ और जानना चाहते हैं, तो बताइए:

क्या आप यहाँ पहुँचने के रास्तों के बारे में जानना चाहते हैं?

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📍KEDARNATH 🛕🚩 केदारनाथ मंदिर भारत के उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का एक...
10/08/2026

📍KEDARNATH 🛕🚩 केदारनाथ मंदिर भारत के उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का एक प्रसिद्ध और पवित्र मंदिर है। समुद्र तल से लगभग 3,584 मीटर की ऊँचाई पर बसा यह धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, उत्तराखंड के चार धामों और पंच केदारों में शामिल है।

मंदिर का महत्व और इतिहास

ज्योतिर्लिंग: यहाँ भगवान शिव त्रिकोणीय शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं।

पौराणिक कथा: मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों को पाप से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव यहाँ बैल के रूप में अंतर्ध्यान हुए थे। पांडवों ने ही सबसे पहले यहाँ मंदिर का निर्माण कराया था, जिसका बाद में आदि गुरु शंकराचार्य ने जीर्णोद्धार किया।

बनावट: यह मंदिर विशाल ग्रेनाइट पत्थरों को आपस में जोड़कर बनाया गया है। अत्यधिक ठंड और भारी बर्फबारी के कारण यह मंदिर साल में केवल 6 महीने (अप्रैल/मई से नवंबर तक) ही दर्शन के लिए खुलता है।

यात्रा और मार्ग

आधार शिविर: केदारनाथ के लिए मुख्य पैदल यात्रा गौरीकुंड से शुरू होती है, जो लगभग 18 किलोमीटर लंबी है।

पहुंचने के साधन: गौरीकुंड तक सड़क मार्ग से जाने के बाद आगे की यात्रा पैदल, घोड़े, खच्चर, पालकी या गुप्तकाशी व फाटा से हेलीकॉप्टर द्वारा की जा सकती है।

पंजीकरण: यात्रा पर जाने से पहले Uttarakhand Tourism वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है।

क्या आप केदारनाथ यात्रा की तिथि, रूट या बुकिंग प्रक्रिया के बारे में कुछ और जानना चाहते हैं?

जय बाबा केदार जी 🙏 🕉️

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01/08/2026

जागेश्वर धाम मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिला से लगभग 35 किलोमीटर दूर, जटा गंगा नदी के तट पर और देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित भगवान शिव का एक अति प्राचीन और भव्य मंदिर समूह है। यहाँ लगभग 125 छोटे-बड़े प्राचीन मंदिर हैं।मुख्य विशेषताएँ और जानकारीस्थान: अल्मोड़ा, उत्तराखंड (समुद्र तल से लगभग 6,200 फीट या 1,870 मीटर की ऊँचाई पर)।मंदिरों की संख्या: इस क्षेत्र में कुल 250 के करीब मंदिर हैं, जिनमें मुख्य परिसर में 124 या 125 मंदिर एक साथ स्थित हैं।प्रमुख मंदिर: जागेश्वरनाथ मंदिर, महामृत्युंजय मंदिर (सबसे पुराना) और दंडेश्वर मंदिर।धार्मिक महत्व: इसे कई स्थानों पर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों (नागेश) में से एक माना जाता है। यहाँ शिव पुराण और स्कंद पुराण में भी इस धाम का वर्णन मिलता है।वास्तुकला: ये सभी मंदिर उत्तर भारतीय नागर शैली और केदारनाथ शैली से मिलते-जुलते पत्थरों की बड़ी-बड़ी शिलाओं से बने हैं।क्या आप जागेश्वर धाम की यात्रा के मार्ग (रूट), रुकने की जगह या यहाँ तक पहुँचने के सबसे अच्छे समय के बारे में जानना चाहते हैं?
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30/07/2026

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